पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक साथ बन गए 2 मुख्यमंत्री, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

पाकिस्तान के अशांत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में इन दिनों अजीबोगरीब राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है.

2 Chief Ministers appointed in Khyber Pakhtunkhwa
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इस्लामाबाद/पेशावर: पाकिस्तान के अशांत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में इन दिनों अजीबोगरीब राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है. यहां एक नहीं, बल्कि दो नेता खुद को मुख्यमंत्री बता रहे हैं और दोनों ही दावा कर रहे हैं कि उनके पास वैध जनादेश है. मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां से तय होगा कि इस संवैधानिक गुत्थी को कैसे सुलझाया जाए.

क्या है दो मुख्यमंत्रियों वाला मामला?

साल 2024 में हुए आम चुनावों में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने खैबर पख्तूनख्वा में स्पष्ट बहुमत हासिल किया था. इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता अली अमीन गंडापुर को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी. गंडापुर ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और सरकार का संचालन शुरू कर दिया.

लेकिन कुछ ही महीनों में स्थितियां बदल गईं. पीटीआई के भीतर खेमेबाजी उभरने लगी. गंडापुर पर आरोप लगे कि वह पाकिस्तान की सेना के साथ मिलकर इमरान खान विरोधी रवैया अपना रहे हैं. कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने यह मुद्दा इमरान खान तक पहुंचाया, जो इस समय आदियाला जेल में बंद हैं. इसके बाद जेल में हुई एक अहम बैठक में इमरान ने गंडापुर को मुख्यमंत्री पद से हटाने का निर्णय लिया.

सोहेल अफरीदी को बनाया गया नया सीएम

गंडापुर की जगह इमरान ने सोहेल अफरीदी को नया मुख्यमंत्री नियुक्त करने का फैसला किया. पार्टी के एक धड़े ने विधानसभा में अफरीदी के पक्ष में विश्वास मत भी पेश किया, जिसमें उन्हें बहुमत प्राप्त हुआ. यहीं से संकट गहरा गया.

अली अमीन गंडापुर ने अपने पद से इस्तीफा भेजा, लेकिन राज्यपाल हाजी गुलाम अली ने इस्तीफा यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि दस्तावेज़ पर गंडापुर का असली हस्ताक्षर नहीं है. गंडापुर ने फिर से सफाई दी, लेकिन राज्यपाल अड़े रहे.

दूसरी ओर, सोहेल अफरीदी के समर्थन में बहुमत साबित होने के बावजूद राज्यपाल ने उन्हें शपथ दिलाने से मना कर दिया. परिणामस्वरूप, अब दोनों नेता गंडापुर और अफरीदी खुद को “मुख्यमंत्री” बता रहे हैं, और सरकारी मशीनरी में असमंजस की स्थिति बन गई है.

मामला हाईकोर्ट में पहुंचा, संवैधानिक लड़ाई शुरू

इस जटिल राजनीतिक ड्रामे का अंत अब अदालत के आदेश पर ही निर्भर करता है. पेशावर हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका दायर की गई है, जिसमें यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि:

  • क्या गंडापुर का इस्तीफा वैध माना जाए?
  • क्या विधानसभा में बहुमत साबित कर चुके अफरीदी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दी जानी चाहिए?
  • क्या राज्यपाल की भूमिका राजनीतिक है या संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप?

हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्यपाल और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है.

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