डर के साए में जी रहे ये 5 राष्ट्राध्यक्ष, सता रहा मौत का डर; जानिए पूरा मामला

दुनिया भर में युद्ध, सत्ता संघर्ष, खुफिया हमले और विद्रोह अब सिर्फ आम जनता की मुश्किलें नहीं रहे. अब राष्ट्राध्यक्ष भी डर के साए में जी रहे हैं.

5 heads of states are living in the shadow of fear
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Freepik

दुनिया भर में युद्ध, सत्ता संघर्ष, खुफिया हमले और विद्रोह अब सिर्फ आम जनता की मुश्किलें नहीं रहे, अब राष्ट्राध्यक्ष भी डर के साए में जी रहे हैं. कभी अपने ही देश में बंकर में छिपे रहने को मजबूर, तो कभी रातों-रात सरहद पार कर भागने वाले राष्ट्राध्यक्ष. वजह है – दुश्मनों की टारगेट किलिंग, जनता का गुस्सा, विरोधियों की साजिश और युद्ध की आंच.

इन पांच देशों के राष्ट्राध्यक्ष आज अपनी जान को लेकर सबसे ज्यादा खतरा महसूस कर रहे हैं. न सिर्फ विदेशी ताकतें, बल्कि घरेलू विद्रोही भी इनके खिलाफ खड़े हैं. सवाल ये नहीं कि कौन इन नेताओं को मारना चाहता है, सवाल ये है कि ये कब तक बच पाते हैं?

1. अहमद अल शरा – सीरिया: ताबड़तोड़ हमलों के बीच भागने की खबर

दमिश्क की फिज़ाओं में बारूद घुल चुका है. स्वेदा शहर में ड्रूज़ और बेदौइन समुदाय की लड़ाई अब अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल गई है. इसी बीच ये खबर आई कि सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल शरा देश छोड़ चुके हैं. इजराइल ने हाल ही में राष्ट्रपति भवन के पास ड्रोन हमला किया और ये केवल हमला नहीं, एक चेतावनी थी.

माना जा रहा है कि अल शरा ने दमिश्क से बाहर निकलकर तुर्की का रुख किया है. उनके डर की वजह सिर्फ इजराइली मिसाइलें नहीं, बल्कि मोसाद की 'साइलेंट' टारगेट किलिंग का इतिहास भी है. जो काम खुलेआम नहीं होता, वो खामोशी से कर दिया जाता है — यही सीरिया के राष्ट्रपति को सबसे ज्यादा डराता है.

2. लाई चिंग-ते – ताइवान: चीन की आंखों की किरकिरी

ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के सिर पर एक नहीं, दो तलवारें लटक रही हैं. एक तरफ है चीन, जो उन्हें खुलेआम धमकियाँ देता रहा है. दूसरी तरफ हैं उनके ही देश के वो नागरिक, जो ताइवान को चीन का हिस्सा मानते हैं और अंदर ही अंदर सत्ता पलटने की कोशिशों में जुटे हैं.

लाई चिंग-ते पर वन चाइना पॉलिसी की अवहेलना के आरोप हैं. चीनी इंटेलिजेंस के निशाने पर वो पहले से हैं, लेकिन अब डर इस हद तक बढ़ चुका है कि उनकी सुरक्षा पूरी तरह से सैन्य नियंत्रण में है. वो किसी कार्यक्रम में बिना स्पेशल क्लियरेंस के हिस्सा नहीं ले सकते.

3. अली खामेनेई – ईरान: बंकर से देश चलाने को मजबूर

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हालत कुछ ऐसी हो गई है जैसे एक राजा युद्ध के मैदान में नहीं, महल के तहखाने से लड़ाई लड़ रहा हो. इजराइल की ओर से ईरान के जनरल्स की टारगेट किलिंग के बाद खामेनेई हफ्तों तक बंकर में छिपे रहे.

एक और डर है - मुजाहिदीन ए खल्क जैसे ईरानी विद्रोही संगठन, जो ईरानी सत्ता को जड़ से खत्म करना चाहते हैं. ऊपर से सख्त इस्लामी कानूनों के कारण आम जनता में असंतोष भी उबाल पर है. इस्लामिक क्रांति के नेता के लिए ये सबसे कमजोर दौर बनता जा रहा है.

4. रशद अल अलीमी – यमन: हूतियों के निशाने पर राष्ट्रपति

यमन आज एक अधूरे देश की तरह है - जहां आधे हिस्से पर सरकार का राज है, बाकी पर हूती विद्रोहियों का कब्जा. ऐसे में राष्ट्रपति रशद अल अलीमी की जान हर वक्त खतरे में है. हूती पहले भी सत्ता में बैठे नेताओं को हटाते और मारते रहे हैं. और अब, जब यमन अमेरिका और इजराइल के साए में आ रहा है, तो खतरा और बढ़ गया है. कोई सीधी धमकी नहीं मिली है, लेकिन इतिहास ये बताता है कि यमन में साज़िशें पहले चेतावनी नहीं देतीं.

5. निकोल पशिनयान – आर्मेनिया: अपनों से ही खतरा

निकोल पशिनयान का नाम लें और साथ में ‘डर’ न जोड़ें - ऐसा अब मुमकिन नहीं रहा. नागोर्नो-कराबाख में हार, रूस से बिगड़ते रिश्ते और जनता में गुस्सा - ये तीनों मिलकर उनके लिए ज़हर बन चुके हैं. 2021 में एक जानलेवा हमला टल गया था, लेकिन तब से उनकी सुरक्षा में सिर्फ जवान नहीं, हथियारबंद आर्मी यूनिट्स भी शामिल हो चुकी हैं. सबसे बड़ा खतरा है आर्मीनियाई राष्ट्रवादियों से, जो उन्हें गद्दार मानते हैं.

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