ईरान में मोसाद के जासूसों पर कहर बरपा रहे खामेनेई, 5 को फांसी पर चढ़ाया; मानवाधिकारों पर उठे सवाल

Israel Mossad Spy In Iran: ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से चले आ रहे छाया युद्ध (shadow war) में एक और कड़ी शनिवार को उस समय जुड़ गई, जब ईरान सरकार ने जासूसी और आतंकवादी गतिविधियों के आरोप में पांच लोगों को फांसी दे दी.

5 people hanged in Iran on charges of spying for Mossad israel
Image Source: ANI/ File

Israel Mossad Spy In Iran: ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से चले आ रहे छाया युद्ध (shadow war) में एक और कड़ी शनिवार को उस समय जुड़ गई, जब ईरान सरकार ने जासूसी और आतंकवादी गतिविधियों के आरोप में पांच लोगों को फांसी दे दी. ईरानी अधिकारियों का दावा है कि ये लोग इजरायल की खुफिया एजेंसी 'मोसाद' के लिए काम कर रहे थे और देश के भीतर विभिन्न बम धमाकों तथा हत्या की घटनाओं में शामिल थे.

यह फांसी ऐसे वक्त पर दी गई है जब पश्चिम एशिया पहले ही भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रहा है. ईरान का कहना है कि इन लोगों ने खुफिया सूचनाएं इजरायल को पहुंचाईं, पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले किए, और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा किया.

फांसी पाने वालों पर क्या आरोप थे?

ईरानी न्यायिक अधिकारियों के अनुसार, इन पांचों पर खोर्रमशहर और खुजेस्तान प्रांत में बम धमाके करने, सुरक्षा बलों की हत्या, और राज्य विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप लगाए गए थे. यह क्षेत्र पहले भी विरोध प्रदर्शनों और आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहा है. यहां वर्षों से अल्पसंख्यक अरब समुदाय के भीतर असंतोष और स्वायत्तता की मांगें उठती रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि इन सभी अभियुक्तों का संबंध एक इजरायल समर्थित नेटवर्क से था, जिसे मोसाद द्वारा निर्देशित किया जा रहा था.

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों को एक बंद कमरे में मुकदमे के बाद सजा सुनाई गई थी और ईरानी टेलीविजन पर उनका "कबूलनामा" भी प्रसारित किया गया, जिसमें उन्होंने खुद को दोषी बताया. हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने इन कबूलनामों की वैधता पर सवाल उठाया है.

कौन थे ये लोग?

मानवाधिकार संगठन हेंगाव ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, ये सभी अरब जातीय अल्पसंख्यक समुदाय से थे और 2019 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए थे. संगठन ने बताया कि उन पर 'अहवाज की मुक्ति के लिए अरब संघर्ष आंदोलन' से जुड़े होने का आरोप लगाया गया, जो एक अलगाववादी समूह है और अतीत में तेल पाइपलाइनों पर हमले करने के लिए कुख्यात रहा है.

हेंगाव ने यह भी दावा किया कि गिरफ्तार किए गए लोगों को गंभीर मानसिक और शारीरिक प्रताड़नाएं दी गईं, और उन्हें टीवी पर आरोप कबूल करने के लिए मजबूर किया गया. इन फांसियों को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है.

जून में भी हो चुकी हैं जासूसी के आरोप में फांसी

यह पहली बार नहीं है कि ईरान ने इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोप में लोगों को मौत की सजा दी हो. इसी साल जून 2025 में भी तीन लोगों को इसी तरह फांसी दी गई थी. इसके अलावा, इजरायल से संबंध रखने के संदेह में 700 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किए जाने की खबरें भी सामने आई थीं.

ईरान में जासूसी, आतंकवाद या देशद्रोह जैसे मामलों में तेजी से मुकदमा चलाकर फांसी देने की परंपरा रही है, और ये फैसले अक्सर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के निशाने पर रहते हैं.

ईरान और इजरायल के बीच हालिया तनाव

इस साल जून में ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक युद्ध जैसी स्थिति बनी रही थी. इस दौरान इजरायल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए जबकि ईरान ने करीब 200 बैलिस्टिक मिसाइलें इजरायल की ओर दागीं. जिनमें कम से कम 50 मिसाइलें सीधे इजरायली शहरों पर गिरीं. इस संघर्ष को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से विराम मिला, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव अब भी बना हुआ है. ताजा फांसियों को भी इस संघर्ष के एक और अध्याय के रूप में देखा जा रहा है, जहां दोनों देश एक-दूसरे के भीतर अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश में हैं.

क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय समुदाय?

एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच, और अन्य वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने ईरान की न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि वहां अक्सर आरोपियों को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के, बिना वकील की सुविधा के, और जबर्दस्ती कबूलनामों के आधार पर मौत की सजा सुनाई जाती है.

एमनेस्टी की रिपोर्ट के मुताबिक, "चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी देने वाला देश ईरान है." साल 2024 में ही ईरान ने 700 से अधिक लोगों को फांसी दी, जिनमें राजनीतिक कैदी, नशे से जुड़े अपराधों के आरोपी, और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले शामिल थे.

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