Thailand-Cambodia War: दक्षिण-पूर्व एशिया एक बार फिर युद्ध की दहलीज़ पर खड़ा है. थाईलैंड और कंबोडिया, जो कभी पर्यटन और व्यापार की वजह से चर्चा में रहते थे, अब रॉकेट और ड्रोन के धमाकों से गूंज रहे हैं. तीन दिनों से जारी इस भीषण संघर्ष ने हालात को इतना बिगाड़ दिया है कि दोनों देशों में 6 लाख से ज़्यादा नागरिक अपने घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं. सीमावर्ती इलाकों में फाइटर जेट की गरज, आर्टिलरी की आवाज़ और एंटी-एयर मिसाइलों की तैनाती ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है.
थाईलैंड और कंबोडिया दोनों एक-दूसरे पर संघर्ष भड़काने का आरोप लगा रहे हैं. थाई रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सुरसंत कोंगसिरी ने बताया कि सिर्फ थाईलैंड के सात प्रांतों से ही चार लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है. बुधवार सुबह कंबोडिया से दागे गए रॉकेट सुरिन के फानोम डोंग राक अस्पताल के बेहद नज़दीक गिरे, जिसके बाद अस्पताल के मरीजों और स्टाफ को बंकर में शरण लेनी पड़ी.
थाई मीडिया द नेशन के अनुसार, कंबोडियाई सेना ने चोंग बोक-चोंग आन मा क्षेत्र में 80 से अधिक ड्रोन हमले, BM-21 रॉकेट लॉन्चर और टैंक फायरिंग की. चार सीमावर्ती प्रांतों में करीब 1.71 लाख नागरिकों ने शरण ली है.
रातभर चली भारी लड़ाई, ड्रोन, टैंक और रॉकेटों का इस्तेमाल
थाई सेना ने बताया कि 10 दिसंबर की सुबह तक कंबोडिया ने हिल 677 की दिशा में 80 से ज़्यादा ड्रोन भेजे. फू मकुआ इलाके को कब्ज़ाने की कोशिश में BM-21 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर से लगातार फायरिंग हुई. थाईलैंड का दावा है कि प्रीह विहार वाले मोर्चे से कंबोडियाई सेना ने सीधे फायरिंग वाले हथियारों और टैंकों के जरिए कंथारालक जिले को निशाना बनाया. जवाबी कार्रवाई में थाई सेना ने चोंग चोम के दक्षिण में एक कंबोडियाई एंटी-ड्रोन साइट को नष्ट करने की पुष्टि की.
दूसरी ओर कंबोडियाई रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता मैली सोचियाटा ने कहा कि पांच प्रांतों से 1 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित घरों और शेल्टरों में पहुंचाया गया है. कंबोडियन मीडिया Cambodianess ने रिपोर्ट किया कि थाई F-16 फाइटर जेट्स ने कंबोडिया के दो इलाकों में एयरस्ट्राइक की, जबकि तीन अन्य स्थानों पर थाईलैंड की भारी गोलाबारी जारी है.
800 किमी लंबी सीमा, पुराना विवाद, नई आग
दोनों देशों के बीच 800 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसके कई हिस्सों पर दशकों से विवाद चलता आ रहा है. इनमें कई ऐतिहासिक मंदिर और धार्मिक स्थल भी शामिल हैं, जिन पर नियंत्रण को लेकर समय-समय पर हिंसा भड़कती रही है.
जुलाई 2025 में भी दोनों देशों के बीच पाँच दिनों तक लड़ाई चली थी, जिसमें दर्जनों लोगों की मौत हुई और करीब 3 लाख नागरिक बेघर हुए थे. उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मलेशिया की पहल पर युद्धविराम लागू किया गया था. अब जब हालात फिर नियंत्रण से बाहर दिखाई दे रहे हैं, ट्रंप ने एक बार फिर मध्यस्थता की पेशकश की है.
तनाव का बढ़ना, क्षेत्रीय शांति के लिए ख़तरे की घंटी
थाईलैंड और कंबोडिया दोनों ही एशिया के महत्वपूर्ण रणनीतिक देश हैं. आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल, लगातार बढ़ता पलायन और अंतरराष्ट्रीय दखल का संकेत इस बात का है कि यह लड़ाई जल्द थमने वाली नहीं है.
तीन दिन की लड़ाई ने जिस तरह हालात को संकट में बदला है, उससे अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि ये टकराव दक्षिण-पूर्व एशिया की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.
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