Russia Earthquake: रूस के सुदूर पूर्व में स्थित कामचटका प्रायद्वीप एक बार फिर प्रकृति के प्रचंड स्वरूप का गवाह बना. शुक्रवार सुबह यहां 7.8 तीव्रता का भीषण भूकंप दर्ज किया गया, जिसने न केवल स्थानीय इलाकों को दहला दिया, बल्कि पूरे प्रशांत महासागर क्षेत्र में सुनामी की आशंका पैदा कर दी. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, यह झटका समुद्र तल से मात्र 10 किलोमीटर गहराई में आया, जो इसे और अधिक खतरनाक बनाता है.
यह भूकंप उस समय आया जब कुछ ही दिन पहले, इसी क्षेत्र में 7.1 और फिर 7.4 तीव्रता के झटके महसूस किए गए थे. लगातार आ रहे इन शक्तिशाली भूकंपों ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह इलाका ‘प्रशांत रिंग ऑफ फायर’ का हिस्सा है, जहां पृथ्वी की टेक्टॉनिक प्लेटें लगातार सक्रिय रहती हैं.
प्रशासन हाई अलर्ट पर, नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह
भूकंप के तुरंत बाद हवाई स्थित प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने चेतावनी जारी की है. रूस के स्थानीय प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित ऊंचे इलाकों में जाने की सलाह दी है. कामचटका के गवर्नर ने बताया कि अभी तक किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बचाव टीमें पूरी सतर्कता में हैं.
क्यों खास है कामचटका और क्यों बार-बार आते हैं यहां भूकंप?
कामचटका प्रायद्वीप एक ज्वालामुखीय और भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है. यह इलाका तीन प्रमुख टेक्टॉनिक प्लेटों, प्रशांत प्लेट, ओखोत्स्क माइक्रोप्लेट और उत्तर अमेरिकी प्लेट के टकराव बिंदु पर स्थित है. इस क्षेत्र का सबसे खतरनाक हिस्सा है कुरिल-कामचटका ट्रेंच, जहां प्रशांत प्लेट समुद्र के नीचे खिसकती हुई ओखोत्स्क प्लेट के नीचे धंस रही है, जिसे ‘सबडक्शन ज़ोन’ कहा जाता है.
इसी प्लेट टेक्टॉनिक हलचल के चलते यहां अक्सर उच्च तीव्रता के भूकंप आते हैं. सबडक्शन जोन में बनने वाला अत्यधिक दबाव जब एक झटके में निकलता है, तो यह समुद्र के नीचे भूकंप उत्पन्न करता है, जो अक्सर सुनामी में बदल सकता है.
जापान, कोरिया, अलास्का और हवाई द्वीप भी अलर्ट पर
इतने शक्तिशाली भूकंप का असर सिर्फ रूस तक सीमित नहीं होता. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर समुद्र में उठी सुनामी की लहरें तीव्र गति से आगे बढ़ीं, तो सबसे पहले जापान और कोरिया के तटीय इलाके प्रभावित हो सकते हैं. उसके बाद यह लहरें अलास्का और हवाई तक पहुंच सकती हैं. इस वजह से पूरे प्रशांत महासागर क्षेत्र में आपदा एजेंसियां और मौसम संस्थान सक्रिय हो गए हैं और स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है.
विज्ञान और सतर्कता ही है एकमात्र उपाय
कामचटका में आया यह भूकंप एक बार फिर हमें यह याद दिलाता है कि प्रकृति कितनी शक्तिशाली है और किस तरह से हमें उसके साथ सामंजस्य बैठाकर जीना सीखना होगा. विज्ञान ने हमें पहले से चेतावनी देने की क्षमता तो दी है, लेकिन सतर्कता और समय पर निर्णय ही किसी बड़ी त्रासदी से बचा सकते हैं.
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