8th Pay commission: क्या बेसिक सैलरी में होगा बड़ा उछाल, 18 हजार से 69 हजार तक बढ़ने की चर्चा?

8th Pay commission: नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (एनसी-जेसीएम) की ड्राफ्टिंग कमेटी ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी मांगें रख दी हैं. सबसे बड़ी मांग यह है कि अभी जो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है, उसे बढ़ाकर 69,000 रुपये किया जाए.

8th Pay Commission Will there be a big jump in basic salary increasing from 18 thousand to 69 thousand
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

8th Pay commission: नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (एनसी-जेसीएम) की ड्राफ्टिंग कमेटी ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी मांगें रख दी हैं. सबसे बड़ी मांग यह है कि अभी जो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है, उसे बढ़ाकर 69,000 रुपये किया जाए. यानी सैलरी को करीब चार गुना बढ़ाने की बात कही गई है. इसके लिए कमेटी ने 3.83 का फिटमेंट फैक्टर मांगा है, जो सैलरी और पेंशन बढ़ाने का आधार होता है.

क्यों की गई इतनी बड़ी मांग

कमेटी ने इस बढ़ोतरी के पीछे दो बड़े कारण बताए हैं. पहला, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार, एक मेहनत करने वाले व्यक्ति को हर महीने करीब 3,490 कैलोरी ऊर्जा की जरूरत होती है. इसी आधार पर खाने-पीने का खर्च तय किया गया है, ताकि एक परिवार की जरूरतें पूरी हो सकें.

दूसरा कारण यह है कि पहले 7वें वेतन आयोग में 3 सदस्यों वाले परिवार को आधार माना गया था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 5 सदस्यों वाला परिवार माना गया है. इससे खर्च का अंदाजा ज्यादा सही तरीके से लगाया जा सके.

महीने का खर्च कितना माना गया

कमेटी ने जनवरी 2026 के हिसाब से एक औसत परिवार का मासिक खर्च बताया है. इसमें 2025 की औसत कीमतों को आधार बनाया गया है. सबसे पहले खाने-पीने की चीजों जैसे चावल, दाल, सब्जी, फल, दूध, तेल, मांस और अंडे पर करीब 24,000 रुपये से ज्यादा खर्च आता है. 

बाकी खाने की चीजें जोड़ने पर यह खर्च लगभग 27,000 रुपये हो जाता है. इसके बाद कपड़े और सिलाई का खर्च जोड़ने पर कुल राशि करीब 32,500 रुपये तक पहुंच जाती है.

घर और जरूरी खर्च जोड़ने पर

रहने के लिए मकान का खर्च जोड़ने पर यह रकम करीब 35,000 रुपये हो जाती है. फिर बिजली, पानी और ईंधन जैसे खर्च जोड़ने पर कुल खर्च 42,000 रुपये से ज्यादा हो जाता है.

कुल खर्च कितना बैठता है

आखिर में अगर बच्चों की पढ़ाई, शादी-ब्याह, त्योहार, मनोरंजन और तकनीक से जुड़े खर्च भी जोड़ दिए जाएं, तो एक परिवार का कुल मासिक खर्च करीब 68,947 रुपये तक पहुंच जाता है.

क्या हो सकता है आगे

अगर सरकार इस गणना को मान लेती है, तो न्यूनतम सैलरी 69,000 रुपये तक बढ़ सकती है. यह मांग इस आधार पर की गई है कि आज के समय में एक सामान्य परिवार का खर्च काफी बढ़ गया है और उसी के हिसाब से सैलरी भी बढ़नी चाहिए.

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