थोड़ी सी शराब भी सेहत के लिए बेहद खतरनाक, बढ़ जाता है ओरल कैंसर का खतरा! रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

शराब का सेवन लंबे समय से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है. विशेषज्ञ अक्सर लोगों को शराब से दूरी बनाए रखने की सलाह देते हैं.

A little alcohol increases the risk of oral cancer research
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

Alcohol Risks: शराब का सेवन लंबे समय से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है. विशेषज्ञ अक्सर लोगों को शराब से दूरी बनाए रखने की सलाह देते हैं. लेकिन भारत में शराब पीने वालों की संख्या करोड़ों में है और इनमें से कई लोग रोजाना या कभी-कभार शराब का सेवन करते हैं. कई लोगों का मानना है कि थोड़ी मात्रा में शराब पीने से कोई गंभीर नुकसान नहीं होता, लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च ने इस धारणा को पूरी तरह से गलत साबित किया है.

BMJ ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित एक बड़ी स्टडी में बताया गया है कि शराब का सेवन- कभी-कभार या कम मात्रा में भारतीय पुरुषों में बुक्कल म्यूकोसा कैंसर (Buccal Mucosa Cancer) के खतरे को काफी बढ़ा देता है. बुक्कल म्यूकोसा कैंसर मुंह के अंदर गाल की परत में विकसित होने वाला एक आक्रामक टाइप है. इसके मरीजों में से अधिकतर 5 साल से भी कम समय में अपनी जान गंवा सकते हैं.

स्टडी का दायरा और निष्कर्ष

इस रिसर्च में भारत के 6 प्रमुख कैंसर सेंटर्स का डेटा शामिल किया गया. स्टडी के लिए 2010 से 2021 के बीच 1803 बुक्कल म्यूकोसा कैंसर से पीड़ित पुरुषों और 1903 कैंसर-फ्री पुरुषों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. शोधकर्ताओं ने शराब के सेवन और कैंसर के खतरे के बीच संबंध को समझने की कोशिश की.

स्टडी में शराब के विभिन्न प्रकारों को शामिल किया गया, जैसे कि:

  • बीयर और व्हिस्की जैसी तैयार शराब
  • देसी शराब, ठर्रा और महुआ जैसी लोकल शराब
  • विशेष रूप से लोकल शराब को शामिल करने का कारण यह था कि यह ग्रामीण इलाकों में ज्यादा पी जाती है.

रिसर्च में पाया गया कि शराब की कोई भी मात्रा- भले ही वह कम हो या कभी-कभार पी जाए, बुक्कल म्यूकोसा कैंसर के खतरे को बढ़ा देती है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह स्टडी इस बात का स्पष्ट संकेत देती है कि शराब पीने की कोई भी मात्रा सुरक्षित नहीं मानी जा सकती.

बुक्कल म्यूकोसा कैंसर: जानिए खतरा

बुक्कल म्यूकोसा कैंसर भारत में ओरल कैंसर का एक सामान्य लेकिन एग्रेसिव प्रकार है. यह अक्सर देर से पकड़ में आता है, जिससे मरीजों की मृत्यु दर अधिक होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देश में, जहां तंबाकू और शराब का सेवन आम है, इस प्रकार के कैंसर के मामले गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुके हैं.

विशेषकर ग्रामीण इलाकों में लोकल शराब के सेवन के कारण बुक्कल म्यूकोसा कैंसर का खतरा बढ़ा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को इसके गंभीर प्रभावों के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है.

WHO की चेतावनी

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने भी शराब के सेवन को लेकर अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि शराब की एक बूंद भी सेहत के लिए सुरक्षित नहीं मानी जा सकती. WHO के अनुसार:

  • शराब का सेवन जितना अधिक होगा, कैंसर का खतरा उतना ही बढ़ेगा.
  • कम मात्रा में शराब पीना भी सुरक्षित नहीं है.

उन स्टडीज़ को खारिज कर दिया गया है, जिनमें कम मात्रा में शराब को सुरक्षित बताया गया था.

WHO की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि शराब का पहला घूँट ही स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकता है.

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