पढ़ने गया था रूस, अब बंदूक उठाकर लड़ रहा है जंग... पंजाब के युवक ने भारत सरकार से लगाई मदद की गुहार

विदेश में पढ़ाई के सपने संजोकर रूस गए पंजाब के एक युवक की किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि अब वह किताबों की जगह बंदूक उठाकर युद्धभूमि में अपनी जान बचाने की जद्दोजहद कर रहा है.

A youth from Punjab is fighting in the Russian army
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Social Media

विदेश में पढ़ाई के सपने संजोकर रूस गए पंजाब के एक युवक की किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि अब वह किताबों की जगह बंदूक उठाकर युद्धभूमि में अपनी जान बचाने की जद्दोजहद कर रहा है. 25 वर्षीय बुट्टा सिंह, जो मोगा जिले का निवासी है, पिछले साल अक्टूबर 2024 में स्टूडेंट वीज़ा पर रूस गया था. उसका मकसद था- रूसी भाषा का कोर्स करना और साथ-साथ कोई पार्ट-टाइम नौकरी करके अपने परिवार को सहारा देना.

पर जो हुआ, वो न सिर्फ बुट्टा के परिवार बल्कि पूरे देश के लिए चौंकाने वाला है.

सोशल मीडिया पर सामने आया सच

हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें बुट्टा सिंह समेत कई भारतीय युवकों को रूसी सेना की वर्दी में देखा गया. वीडियो में साफ कहा गया कि इन युवाओं को शिक्षा के बहाने रूस बुलाया गया, लेकिन बाद में धोखे से युद्ध में झोंक दिया गया.

बुट्टा सिंह उस वीडियो में यह बताते हुए दिखाई देता है कि वह पढ़ाई करने आया था, लेकिन एक दिन अचानक उसे और अन्य लड़कों को सेना की ट्रेनिंग में भेज दिया गया और कुछ ही समय में उन्हें हथियार देकर रूस-यूक्रेन युद्ध के मैदान में भेज दिया गया.

परिवार ने जमीन बेचकर भेजा था विदेश

बुट्टा के घर की स्थिति बेहद साधारण है. उसके पिता एक दिहाड़ी मजदूर हैं और मां पशुओं की देखभाल करती हैं. पूरे परिवार ने बड़ी उम्मीदों से बेटे को विदेश भेजा था यह सोचकर कि वह पढ़ाई करके एक बेहतर भविष्य बना सकेगा. परिवार ने यहां तक कि अपनी खेती की ज़मीन तक बेच दी ताकि बेटे का सपना पूरा हो सके.

बुट्टा की बहन करमजीत कौर बताती हैं कि उन्हें आख़िरी बार 11 सितंबर को भाई का एक वॉइस मैसेज मिला था, उसके बाद से कोई संपर्क नहीं हो पाया. अब परिवार दिन-रात यही दुआ कर रहा है कि उनका बेटा किसी तरह सुरक्षित घर लौट आए.

अकेले बुट्टा नहीं, कई और फंसे इसी जाल में

यह मामला केवल बुट्टा सिंह तक सीमित नहीं है. कांग्रेस नेता परगट सिंह ने दावा किया है कि उत्तर भारत के 100 से अधिक युवक इसी प्रकार के छलावे का शिकार हो चुके हैं. उनके मुताबिक, रूस में 111 भारतीय युवक सेना में भर्ती कर लिए गए हैं और इनमें से 15 युवकों का कुछ पता नहीं है.

हरियाणा से भी ऐसे ही दो युवकों अंकित जांगर और विजय पूनिया के नाम सामने आए हैं, जो रूसी सेना में भर्ती किए जा चुके हैं.

फौज में भर्ती का झांसा: 2.5 लाख की सैलरी

रिपोर्टों के अनुसार, इन युवाओं को पहले यह कहकर आकर्षित किया गया कि वे एक प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी में नौकरी करेंगे. तीन महीने की ट्रेनिंग के बाद उन्हें ₹2.5 लाख मासिक वेतन का वादा किया गया.

उनसे एक रूसी भाषा में लिखा कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया गया, जिसका अर्थ उन्हें समझाया नहीं गया. बाद में पता चला कि वह कोई आम नौकरी नहीं बल्कि एक सैन्य सेवा का अनुबंध था. कुछ ही दिनों की बेसिक ट्रेनिंग के बाद उन्हें सेना की यूनिफॉर्म थमा दी गई और युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया.

भारत सरकार की चेतावनी और कार्रवाई

इस घटना के सामने आने के बाद भारत सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है. विदेश मंत्रालय ने रूस से तत्काल अनुरोध किया है कि भारतीय नागरिकों की सेना में भर्ती बंद की जाए. साथ ही भारत सरकार ने एक चेतावनी जारी की है जिसमें देश के नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे रोज़गार या पढ़ाई के नाम पर मिलने वाले ऐसे किसी भी संदिग्ध ऑफर से सावधान रहें.

सरकार ने कहा है कि इन मामलों में जान का सीधा खतरा होता है और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे क्षेत्रों में फंसे नागरिकों को बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है.

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