अवैध खनन और शराब तस्करों की अब खैर नहीं! हरियाणा के हर जिले में होगा प्रवर्तन ब्यूरो का थाना

Action Against Illegal Traders: हरियाणा में अब कानून का शिकंजा और भी सख्त होने जा रहा है. राज्य सरकार ने एक अहम और कड़ा फैसला लेते हुए सभी जिलों में राज्य प्रवर्तन ब्यूरो (State Enforcement Bureau) के थाने खोलने का आदेश जारी कर दिया है.

action Against illegal traders police station of Enforcement Bureau in every district of Haryana
Image Source: ANI/ File

Action Against Illegal Traders: हरियाणा में अब कानून का शिकंजा और भी सख्त होने जा रहा है. राज्य सरकार ने एक अहम और कड़ा फैसला लेते हुए सभी जिलों में राज्य प्रवर्तन ब्यूरो (State Enforcement Bureau) के थाने खोलने का आदेश जारी कर दिया है. यह कदम न सिर्फ प्रशासनिक सतर्कता को बढ़ाने वाला है, बल्कि प्रदेश में फैलते अवैध खनन, शराब की तस्करी और बिजली-पानी की चोरी जैसी गंभीर समस्याओं पर रोक लगाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है.

क्या होंगे इन थानों के जिम्मेदारियां?

जिला मुख्यालयों पर बनने वाले ये विशेष थाने केवल आम पुलिसिंग तक सीमित नहीं होंगे. इनकी ज़िम्मेदारी सरकारी संसाधनों और संपत्तियों की रक्षा से लेकर अवैध धंधों पर सीधी कार्रवाई करने तक फैली होगी. इन थानों का काम होगा:

अवैध खनन पर निगरानी और कार्रवाई

शराब की तस्करी को रोकना

बिजली और नहरी पानी की चोरी पकड़ना

सरकारी जमीनों और संपत्तियों से अवैध कब्जा हटाना

कहां-कहां पहले से हैं ये थाने?

फिलहाल हरियाणा के 8 जिलों, अंबाला, करनाल, रोहतक, जींद, रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद और हिसार में राज्य प्रवर्तन ब्यूरो के थाने पहले से काम कर रहे हैं. इनकी सफलता को देखते हुए सरकार ने अब इसे पूरे राज्य में विस्तार देने का फैसला किया है.

ब्यूरो की ताकत

इस ब्यूरो को मजबूत और प्रभावशाली बनाने के लिए इसमें अलग से 1049 अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी. इसमें शामिल होंगे:

1 एडीजीपी

1 एसपी

5 डीएसपी

23 इंस्पेक्टर

65 सब इंस्पेक्टर

123 एएसआई

274 हेड कांस्टेबल

557 कांस्टेबल

यानी कि हर जिले में एक ठोस और प्रशिक्षित टीम मौजूद रहेगी जो विशेष रूप से इन संगठित अपराधों पर नजर रखेगी और कार्रवाई करेगी.

ब्यूरो रहेगा नियंत्रित, लेकिन प्रभावी

इस ब्यूरो की रिपोर्टिंग सीधे पुलिस महानिदेशक (DGP) के माध्यम से गृह विभाग को होगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सामान्य पुलिस व्यवस्था और प्रवर्तन ब्यूरो के बीच टकराव की स्थिति न बने. हालांकि यह पूरी तरह स्वतंत्र इकाई नहीं होगी, लेकिन इसे ठोस कानूनी और प्रशासनिक अधिकार प्राप्त होंगे.

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