दक्षिण एशिया में बदलते इस्लामिक समीकरण, भारत और कतर ने अफगानिस्तान में उठाए अहम कदम

दक्षिण एशिया और मुस्लिम दुनिया के राजनीतिक नक्शे में हाल के दिनों में तेज़ी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं. इसी कड़ी में भारत और कतर ने अहम कूटनीतिक निर्णय लिए हैं, जिनसे न केवल अफगानिस्तान बल्कि पूरे इस्लामी जगत में नए संकेत मिले हैं.

Afghanistan and India Relation strengthen new challenge for turkey and pakistan
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दक्षिण एशिया और मुस्लिम दुनिया के राजनीतिक नक्शे में हाल के दिनों में तेज़ी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं. इसी कड़ी में भारत और कतर ने अहम कूटनीतिक निर्णय लिए हैं, जिनसे न केवल अफगानिस्तान बल्कि पूरे इस्लामी जगत में नए संकेत मिले हैं. मंगलवार को भारत सरकार ने काबुल में अपने तकनीकी मिशन को दूतावास का दर्जा दिया, वहीं कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने अफगानिस्तान में मिर्दिफ अली अल काशूती को नया राजदूत नियुक्त किया. यह कदम ऐसे समय में उठाए गए हैं, जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच अगली बैठक तुर्की में होने वाली है और इस्लामी दुनिया में शक्ति संतुलन नए रूप में उभर रहा है.


भारत ने अफगानिस्तान में अपने काबुल स्थित तकनीकी मिशन को तत्काल प्रभाव से दूतावास में अपग्रेड करने का फैसला किया है. भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी के इस महीने भारत दौरे के दौरान इस निर्णय की घोषणा की थी. मुत्तकी 9 से 16 अक्टूबर तक भारत में थे और इस दौरान उन्होंने दक्षिण एशिया की एक प्रमुख इस्लामी संस्था, दारुल उलूम देवबंद, का भी दौरा किया. यह संस्था तालिबान की वैचारिक जड़ों से जुड़ी मानी जाती है, और इससे भारत की ‘धार्मिक संवाद की कूटनीति’ का संदेश भी स्पष्ट होता है. 

भारत का काबुल में दूतावास


मुत्तकी के दौरे के दौरान अफगानिस्तान में भारत की विकास और मानवीय सहायता के मुद्दों पर चर्चा हुई. अब काबुल में दूतावास की पुनः सक्रियता से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध औपचारिक रूप से और मजबूत होंगे. भारत पहले से ही अफगानिस्तान में कई विकास परियोजनाओं और स्वास्थ्य सहायता कार्यक्रमों का हिस्सा रहा है, और अब दूतावास से यह सहभागिता और अधिक प्रभावी होगी.

कतर का काबुल में राजनयिक सुदृढ़ीकरण

उधर, कतर ने भी अफगानिस्तान में अपनी राजनीतिक और कूटनीतिक भूमिका मजबूत करने का कदम उठाया है. कतर के अमीर ने मिर्दिफ अली अल काशूती को अफगानिस्तान में पूर्ण राजदूत नियुक्त किया है. वे पिछले तीन वर्षों से काबुल स्थित कतर दूतावास में वरिष्ठ राजनयिक के तौर पर कार्यरत थे. कतर इस नियुक्ति के माध्यम से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के प्रयास को और सुदृढ़ करना चाहता है, जबकि दोनों देशों के बीच अगली बातचीत तुर्की में निर्धारित है.

इस्लामी दुनिया की धुरी बदल रही है

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और कतर के ये कदम एक बड़े भू-राजनीतिक संदेश का हिस्सा हैं. यह संकेत है कि अब इस्लामी दुनिया की धुरी सिर्फ तुर्की या पाकिस्तान के इर्द-गिर्द नहीं घूमेगी. तुर्की खुद को इस्लामी दुनिया का नेता बनाने की कोशिश करता रहा है, वहीं पाकिस्तान अफगानिस्तान में अपनी प्रभावशाली भूमिका बनाए रखना चाहता है. भारत और कतर की बढ़ती उपस्थिति इन दोनों देशों के लिए चुनौती बन सकती है.

भारत ने मुत्तकी के दौरे और देवबंद जैसी इस्लामी संस्था के माध्यम से धार्मिक संवाद की कूटनीति को आगे बढ़ाया. वहीं कतर ने मध्यस्थ डिप्लोमेसी के जरिए तुर्की की बढ़ती दखलअंदाजी को संतुलित करने की कोशिश की. ये घटनाएं साफ संकेत देती हैं कि दक्षिण एशिया में इस्लामी दुनिया की नई धुरी अब भारत, कतर और अफगानिस्तान के इर्द-गिर्द आकार ले रही है. तुर्की और पाकिस्तान के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि “खलीफा बनने” की पुरानी कोशिशें अब आसान नहीं रहेंगी. इस नए समीकरण में भारत और कतर की भूमिका अफगानिस्तान और व्यापक इस्लामी क्षेत्र में निर्णायक साबित हो सकती है.

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