दुनिया जब सोच रही थी कि अफगानिस्तान अब शांति और स्थिरता की ओर बढ़ेगा, तभी एक बार फिर अमेरिका और अफगान तालिबान के बीच पुराने घावों को कुरेदने वाला विवाद सामने आ गया है. इस बार आग में घी डाला है अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने, जिन्होंने बगराम एयरबेस पर फिर से अमेरिकी दावा ठोक दिया है.
लेकिन अफगानिस्तान ने भी बिना वक्त गंवाए बेहद सख्त और स्पष्ट जवाब दिया है, "जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं देंगे." विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने सीधे तौर पर ट्रंप के बयान को "छलावा" कहा और दो टूक शब्दों में अमेरिका को अपनी सीमाओं में रहने की नसीहत दी.
ट्रंप को अफगान का तीखा जवाब
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यूके दौरे के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा कि अमेरिका भले ही अफगानिस्तान से सेना वापस ले रहा था, लेकिन बगराम एयरबेस को छोड़ने का उनका कोई इरादा नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि यदि अफगान सरकार ने बगराम को अमेरिका को नहीं सौंपा, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
ट्रंप के इस बयान के बाद अफगानिस्तान की ओर से जिस तरह की प्रतिक्रिया सामने आई है, उसने यह साफ कर दिया है कि अफगान सरकार अब किसी दबाव, धमकी या बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगी. विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने कहा कि बगराम अब तालिबान सरकार के नियंत्रण में है और अमेरिका को अफगानिस्तान की जमीन पर अधिकार जताने का कोई हक नहीं है.
अफगान सरकार की कूटनीतिक भाषा में कड़ा संदेश
अफगानिस्तान की इस प्रतिक्रिया में एक खास बात रही कि भले ही भाषा कूटनीतिक रही, लेकिन भावनाएं बेहद मजबूत और राष्ट्रवादी थीं. मुत्ताकी ने यह साफ किया कि अफगानिस्तान की विदेश नीति अब संतुलित और अर्थव्यवस्था-केंद्रित है.
देश अब उन रिश्तों को तरजीह देगा जो आपसी हितों और सम्मान पर आधारित होंगे. किसी भी ताकतवर देश की धमकी अब अफगान नीति को प्रभावित नहीं करेगी. इस बयान ने यह संदेश भी दिया कि अफगानिस्तान अब पुराने दौर की कमजोरियों से बाहर आ चुका है और उसकी प्राथमिकता अब अपनी "संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता" है.
बगराम: सिर्फ एक एयरबेस नहीं, इतिहास है
बगराम एयरबेस कोई आम एयरबेस नहीं है. यह दो दशकों तक अमेरिका और सहयोगी सेनाओं के लिए अफगानिस्तान में सैन्य संचालन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण केंद्र रहा है.
काबुल के उत्तर में स्थित यह एयरबेस वही जगह है, जहां अमेरिका ने अपने सैन्य ऑपरेशनों का नियंत्रण रखा था और जहां एक कुख्यात जेल भी बनाई गई थी. इस जेल में हजारों अफगानों को बिना मुकदमा या आरोप के कैद रखा गया, और कई मामलों में उनके साथ अमानवीय व्यवहार और यातना के आरोप लगे.
अब जब यह एयरबेस तालिबान सरकार के नियंत्रण में है, तो यह अफगानिस्तान के लिए स्वतंत्रता की प्रतीक भूमि बन चुकी है. यही वजह है कि जब ट्रंप ने दोबारा इसपर दावा ठोका, तो अफगान नेतृत्व का खून खौल उठा.
तालिबान ने दोहा समझौते की याद दिलाई
तालिबान सरकार ने अपने बयान में अमेरिका को दोहा समझौते की याद भी दिलाई, जो 2020 में अमेरिका और तालिबान के बीच हुआ था. इस समझौते में अमेरिका ने वादा किया था कि वह अफगानिस्तान की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करेगा और देश की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेगा.
तालिबान ने कहा कि उन्हें अमेरिका से उम्मीद थी कि वह अपने वादों का पालन करेगा, लेकिन अब ट्रंप के बयान उन वादों का उल्लंघन हैं. ऐसे में अफगानिस्तान ने एक बार फिर अपने रुख को साफ किया कि बगराम अब अफगान है, और रहेगा.
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