भारत के सपोर्ट में अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने ऐसा क्या कहा...पाकिस्तान को लगी मिर्ची

नई दिल्ली में भारत और अफगानिस्तान के बीच जारी एक साझा बयान ने इस बार पाकिस्तान को चिढ़ा दिया है. शुक्रवार को इस बयान के सार्वजनिक होते ही शनिवार को पाकिस्तान ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और इस्लामाबाद स्थित अफगान राजदूत को तलब कर अपनी नाराजगी दर्ज कराई.

Afghanistan foreign minister support to india pakistan summons afghan ambassador
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नई दिल्ली में भारत और अफगानिस्तान के बीच जारी एक साझा बयान ने इस बार पाकिस्तान को चिढ़ा दिया है. शुक्रवार को इस बयान के सार्वजनिक होते ही शनिवार को पाकिस्तान ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और इस्लामाबाद स्थित अफगान राजदूत को तलब कर अपनी नाराजगी दर्ज कराई.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत-अफगानिस्तान की ओर से जारी संयुक्त वक्तव्य में जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताए जाने को लेकर इस्लामाबाद ने ‘गंभीर आपत्ति’ जताई है. पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन है.

अफगान विदेश मंत्री की भारत यात्रा बनी विवाद की जड़

दरअसल, तालिबान सरकार में अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी गुरुवार को छह दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे थे. यह यात्रा इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद किसी वरिष्ठ अफगान नेता की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है. शुक्रवार को उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की, जहां दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रिश्तों, व्यापारिक सहयोग, स्वास्थ्य सेवाओं और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की. भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मुलाकात को "क्षेत्रीय शांति के लिए एक सकारात्मक पहल" बताया है.

अफगानिस्तान ने आतंकवाद की निंदा की, भारत को दिया समर्थन

संयुक्त बयान में यह उल्लेख खास रहा कि अफगानिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है. साथ ही भारत की जनता और सरकार के प्रति संवेदना और एकजुटता भी जाहिर की गई है. दोनों देशों ने साझा रूप से क्षेत्रीय आतंकवाद की निंदा की और साफ तौर पर कहा कि आतंकवाद किसी भी देश या समाज की स्थिरता के लिए खतरा है. बयान में यह भी कहा गया कि क्षेत्रीय शांति और परस्पर विश्वास को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है.

पाकिस्तान की नाराजगी क्यों?

इस बयान में जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा मानने और अफगानिस्तान की ओर से भारतीय सुरक्षा हितों के प्रति समर्थन जताने से पाकिस्तान असहज हो उठा.इस्लामाबाद ने दावा किया कि ऐसा बयान न केवल कश्मीर विवाद की संवेदनशीलता को नजरअंदाज करता है, बल्कि यह संयुक्त राष्ट्र के प्रासंगिक प्रस्तावों के खिलाफ भी जाता है.

कूटनीतिक मायनों में अहम है यह घटनाक्रम

भारत और अफगानिस्तान के बीच जिस गर्मजोशी से संबंधों की पुनर्बहाली हो रही है, वह कूटनीतिक स्तर पर बेहद अहम मानी जा रही है. खासकर ऐसे वक्त में जब अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता को दुनिया के कई देश अभी भी आधिकारिक मान्यता नहीं दे रहे, भारत का यह संवाद एक रणनीतिक सोच का संकेत देता है. दूसरी ओर, पाकिस्तान की आपत्ति इस बात को रेखांकित करती है कि कश्मीर मुद्दे पर वह अब भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की तलाश में है — लेकिन उसे वह समर्थन अब वैसा नहीं मिल पा रहा, जैसा पहले मिलता था.

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