पाकिस्तान के आरोपों के बीच तालिबान सरकार ने सख्त रुख अपनाया है और इस्लामाबाद से आग्रह किया है कि वह हर समस्या के लिए काबुल को दोष न दे. पाकिस्तान में हालिया बम धमाके के बाद जो तनाव पैदा हुआ, उसके बीच अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने स्पष्ट कहा कि अगर पाकिस्तान सीमा पार आक्रमण या हवाई हमले करता है तो तालिबान खामोश नहीं बैठेगा. उन्होंने पाकिस्तान से कहा है कि वह पहले अपनी आंतरिक चुनौतियों को सुलझाए और काबुल पर आरोप लगाने से पीछे हटे.
मुत्तकी ने साफ किया कि पाकिस्तान अक्सर अपनी हर समस्या का ठीकरा अफगानिस्तान पर फोड़ने की कोशिश करता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है. उन्होंने कहा कि तालिबान ने पहले से ही स्पष्ट कर दिया है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं किया जाएगा. इसके बावजूद, पाकिस्तान काबुल को बार-बार उस हमले का जिम्मेदार मानता रहा है जिससे दोनों देशों के बीच कड़वाहट बढ़ी है. मुत्तकी ने कहा कि पाकिस्तान को यह रवैया छोड़कर अपने भीतर की कमियों पर ध्यान देना चाहिए.
टीटीपी और अफगान तालिबान — समय और संदर्भ मायने रखते हैं
आमिर खान मुत्तकी ने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तान में सक्रिय संगठन टीटीपी (टिहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) और पाकिस्तान सेना के बीच हिंसा की जड़ें कई दशकों पुरानी हैं, जबकि अफगान तालिबान की सत्ता में वापसी महज चार साल पहले हुई है. इसलिए मुत्तकी का कहना है कि किसी भी घटना का सीधा संबंध अफगान सरकार से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा. उन्होंने इस्लामाबाद से कहा कि तथ्यों की पड़ताल के बिना काबुल पर आरोप थोपना संबंधों को और खराब करेगा.
सीमा उल्लंघन पर कड़ा रुख — जवाब देने का इशारा
मुत्तकी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र या धरती पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो तालिबान सरकार चुप नहीं रहेगी. उन्होंने कहा कि काबुल शांति बनाए रखने के लिए प्रयासरत है, लेकिन उसके खिलाफ किसी प्रकार का हमला होने पर तालिबान की ओर से जवाबी कार्रवाई नाटकीय रूप से टालने योग्य नहीं होगी. मुत्तकी ने यह भी कहा कि किसी भी तरह के आक्रामक कदम का जवाब देने के अलावा तालिबान के पास कोई विकल्प बाकी नहीं रहेगा.
कूटनीतिक चुनौती और क्षेत्रीय स्थिरता
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह जुड़ती तनातनी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है. दोनों पक्षों के कड़े शब्द और आपत्तिजनक आरोप-प्रत्यारोप स्थिति को और उलझा सकते हैं. क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए पारदर्शिता, संयुक्त जांच और द्विपक्षीय संवाद जरूरी माने जा रहे हैं, वरना वाकई में सीमापार सैन्य कार्रवाई से तनाव बढ़ सकता है.
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