ऑस्ट्रेलिया के बाद अब इस देश में सोशल मीडिया बैन की तैयारी, बच्चे नहीं चला पाएंगे फेसबुक-इंस्टाग्राम

दुनियाभर में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर गंभीर बहस हो रही है.

After Australia now social media banned for children in France
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

दुनियाभर में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर गंभीर बहस हो रही है. हाल ही में, ऑस्ट्रेलिया ने बच्चों के सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का एक अहम कदम उठाया है, और अब फ्रांस भी इसी दिशा में विचार कर रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांस सरकार 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर रोक लगाने और इस साल सितंबर से हाई स्कूलों में मोबाइल फोन रखने पर बैन लगाने की योजना बना रही है.

यह कदम फ्रांस में पहले से लागू कड़े प्राइमरी और मिडल स्कूल के मोबाइल फोन बैन को बढ़ाने की प्रक्रिया का हिस्सा है. ऐसा माना जा रहा है कि यह नई योजना बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया एक बड़ा कदम हो सकता है.

फ्रांस की सरकार की तैयारियां

फ्रांस सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, 2026 के जनवरी महीने में इस बैन की तैयारी शुरू कर दी जाएगी. इस सिलसिले में पहले कानून का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा, और फिर इसे संसद में पेश किया जाएगा. गौरतलब है कि 2023 में फ्रांस ने एक कानून पारित किया था, जिसके तहत यदि कोई 15 साल से कम उम्र का बच्चा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाता है, तो उस प्लेटफॉर्म को पैरेंटल कन्सेंट यानी अभिभावक की सहमति लेने की आवश्यकता होगी. हालांकि, तकनीकी समस्याओं के कारण यह कानून अब तक प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सका था.

इस बीच, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कई बार इस बात पर जोर दिया है कि सोशल मीडिया के कारण युवा पीढ़ी में हिंसा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. उन्होंने अपने नए साल के संबोधन में भी यह अपील की थी कि अभिभावक अपने बच्चों को सोशल मीडिया और स्क्रीन से दूर रखें, ताकि उनकी मानसिक स्थिति पर सकारात्मक असर पड़े.

क्या पूरे यूरोपीय संघ में होगा बैन?

फ्रांस में बच्चों के सोशल मीडिया पर प्रतिबंध की योजना के बीच एक सवाल और उठ रहा है कि क्या यह कदम पूरे यूरोपीय संघ (EU) में लागू होगा? दरअसल, इमैनुएल मैक्रों ने पिछले साल 2025 जून में यह बयान दिया था कि वह पूरे यूरोपीय संघ में सोशल मीडिया के लिए कड़े रेगुलेशन की मांग करेंगे.

इस संदर्भ में, 2025 नवंबर में यूरोपीय संसद ने भी फ्रांस के इस कदम का समर्थन करते हुए यह सिफारिश की थी कि बच्चों के सोशल मीडिया तक पहुंचने की न्यूनतम उम्र तय की जानी चाहिए. इसका उद्देश्य बढ़ती हुई मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को कम करना था, जो बच्चों और किशोरों में सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न हो रही हैं.

यूरोपीय संसद का यह कदम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है और यह संकेत देता है कि आने वाले समय में यूरोपीय देशों में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़े कदम उठाए जा सकते हैं.

सोशल मीडिया के बच्चों पर प्रभाव

विश्वभर में सोशल मीडिया के बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव पर कई अध्ययन हो चुके हैं. कई विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग से बच्चों में मनोवैज्ञानिक समस्याएं जैसे अवसाद, आत्मविश्वास की कमी, और मानसिक तनाव की दर बढ़ रही है. इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के बीच नकारात्मक तुलना और हिंसा भी तेजी से बढ़ रही है.

इसके अलावा, सोशल मीडिया पर पोस्ट की जाने वाली सामग्री बच्चों की सोच और उनके व्यवहार को भी प्रभावित करती है. कई बार नकली या भ्रामक जानकारी के कारण बच्चों में भ्रम और डर की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

स्वस्थ डिजिटल वातावरण की आवश्यकता

इसी वजह से, कई देशों ने अब बच्चों के डिजिटल अनुभव को सुरक्षित और स्वस्थ बनाने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने बच्चों के सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित करने के लिए बैन लगाए हैं, जबकि फ्रांस जैसे देशों ने भी इसके लिए कड़े कदम उठाने की योजना बनाई है. यह केवल फिजिकल सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य की रक्षा करना भी एक बड़ी जिम्मेदारी है.

फ्रांस का यह कदम बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका पालन कैसे होगा, यह भी देखने वाली बात होगी. यदि फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों में इस तरह के कानून सफल होते हैं, तो यह निश्चित ही वैश्विक स्तर पर एक उदाहरण बनेगा, जिस पर अन्य देश भी विचार कर सकते हैं.

यूरोपीय संघ में सोशल मीडिया रेगुलेशन

अब तक, यूरोपीय संघ ने सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर विभिन्न देशों में बैन लगाने की योजनाओं का समर्थन किया है, लेकिन किसी एक सामूहिक नीति के तहत यह कदम उठाने की योजना अब तक नहीं बनी है. हालांकि, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की पहल से यह संभव है कि जल्द ही यूरोपीय संघ भी इस दिशा में कड़े नियम बना सके, ताकि बच्चों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल माहौल तैयार किया जा सके.

इसके अलावा, फ्रांस की सरकार की यह योजना भी बच्चों के बीच सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षित रहे और उन्हें ऐसे प्लेटफॉर्म से दूर रखा जाए जो उनके लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं.

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