दिल्ली के बाद नोएडा-गाजियाबाद भी बने गैस चैंबर, घुटने लगा लोगों का दम! जहरीली हुई हवा की गुणवत्ता

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है. बीते कई दिनों से मौसम में ठंडक बढ़ने और हवा की गति धीमी पड़ने के कारण प्रदूषक ऊपर उठने के बजाय जमीन के पास ही जमने लगे हैं.

After Delhi, Noida-Ghaziabad air becomes poisonous
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है. बीते कई दिनों से मौसम में ठंडक बढ़ने और हवा की गति धीमी पड़ने के कारण प्रदूषक ऊपर उठने के बजाय जमीन के पास ही जमने लगे हैं. इसका सबसे बड़ा प्रभाव नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसे इलाकों में दिखाई दे रहा है, जहां हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी तक पहुंच चुकी है.

लोगों को सुबह और शाम के समय सांस लेने में तकलीफ, आँखों में जलन, गले में खराश और सिरदर्द जैसी समस्याएँ बढ़ती दिखाई दे रही हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, स्थिति तेजी से बिगड़ रही है और आने वाले दिनों में इसमें राहत मिलना मुश्किल लग रहा है.

ठंड बढ़ने के साथ हालात और खराब

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में तापमान में लगातार गिरावट दर्ज हो रही है. सुबह और देर शाम घना कोहरा छाने लगा है. हवाओं की गति बेहद धीमी होने के कारण हवा में मौजूद धूल के कण और जहरीले प्रदूषक वातावरण में फंस रहे हैं.

हवा में नमी बढ़ने से प्रदूषण और धुआं जमीन के समीप चिपककर धुंध जैसा आवरण बना रहा है. यह मिश्रण ‘स्मॉग’ बनाता है, जो फेफड़ों तक गहराई में प्रवेश कर स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है.

सर्दी, कोहरा और हवा की बंदी, इन तीनों मिलकर प्रदूषण के लिए सबसे खतरनाक स्थिति तैयार करते हैं.

दिल्ली से सटे जिलों में हालात सबसे खराब

भले ही उत्तर प्रदेश के कई शहर जैसे लखनऊ, वाराणसी, शामली और कानपुर प्रदूषण की मार झेल रहे हों, लेकिन दिल्ली के नजदीक स्थित नोएडा और गाजियाबाद इस समय सबसे अधिक प्रभावित हैं.

यहां कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 से ऊपर पहुँच गया है, जिसे केंद्र सरकार की मानक सूची में “गंभीर” श्रेणी में रखा जाता है. इस स्तर की हवा को इंसानों के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए.

नोएडा और ग्रेटर नोएडा: AQI 445 तक पहुंचा

गुरुवार, 20 नवंबर की सुबह भी प्रदूषण के स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ. कई इलाकों में स्थिति और खराब दर्ज की गई.

नोएडा–ग्रेटर नोएडा के प्रमुख इलाकों में AQI:

  • नॉलेज पार्क-5 (ग्रेटर नोएडा) – 445
  • नोएडा सेक्टर-116 – 443
  • नोएडा सेक्टर-62/ सेक्टर-1 क्षेत्र – 416–428
  • नोएडा एक्सटेंशन के कई स्थानों पर – 410

इन आंकड़ों से साफ है कि पूरा इलाका जहरीली हवा की चपेट में है. विशेषज्ञों के अनुसार 400 AQI पर कुछ घंटों तक हवा में रहना भी फेफड़ों के लिए खतरनाक हो सकता है.

गाजियाबाद: लोनी और वसुंधरा में दमघोंटू हालात

गाजियाबाद के कई इलाकों में भी प्रदूषण अपनी चरम सीमा पर है.

मुख्य स्थानों का AQI:

  • लोनी – 432
  • इंदिरापुरम – 427
  • संजय नगर – 420
  • वसुंधरा – 429

यह सभी आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि इन क्षेत्रों में कुछ दिनों से लगातार हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी हुई है और यह स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है.

आस-पास के जिलों का हाल भी खराब

दिल्ली से सटे अन्य जिलों में भी प्रदूषण कम नहीं है.

  • हापुड़ – 365
  • बागपत – 382
  • मेरठ – 332

ये क्षेत्र ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आते हैं. हालांकि ये 400 पार नहीं करते, लेकिन लंबे समय तक ऐसी हवा में रहना समान रूप से घातक हो सकता है.

AQI श्रेणियों का मतलब समझें

  • 300–400: बेहद खराब – फेफड़ों पर गंभीर प्रभाव, रोगियों के लिए खतरा
  • 400–500: गंभीर – स्वस्थ लोग भी प्रभावित, अस्पताल में भर्ती होने की संभावना बढ़ती
  • 500 : अत्यंत गंभीर/आपातकालीन स्तर

नोएडा और गाजियाबाद फिलहाल गंभीर श्रेणी में जकड़े हुए हैं.

लोगों को घुटन और स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ीं

डॉक्टरों के अनुसार:

  • साँस फूलना
  • खांसी
  • आँखों में जलन
  • सीने में जकड़न
  • एलर्जी और अस्थमा के अटैक

के मामले पिछले दो हफ्तों में तेजी से बढ़े हैं.

स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है.

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