गाजियाबाद में प्रदूषण की रोकथाम के लिए बड़ा कदम, अब ओला-उबर वाले नहीं चला सकेंगे पेट्रोल-डीजल वाहन

नवम्बर का महीना आते ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर में तेजी से वृद्धि होने लगती है, और यह बढ़ता प्रदूषण अब गाजियाबाद सहित पूरे इलाके में लोगों के लिए गंभीर समस्या बन चुका है. सांस लेने में दिक्कतें, खराब एयर क्वालिटी और स्मॉग से परेशान लोग सरकार की ओर देख रहे हैं, जो प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए लगातार कदम उठा रही है.

Aggregator Services run only cng or electric vehicles in Ghaziabad
Image Source: Social Media

Ghaziabad News: नवम्बर का महीना आते ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर में तेजी से वृद्धि होने लगती है, और यह बढ़ता प्रदूषण अब गाजियाबाद सहित पूरे इलाके में लोगों के लिए गंभीर समस्या बन चुका है. सांस लेने में दिक्कतें, खराब एयर क्वालिटी और स्मॉग से परेशान लोग सरकार की ओर देख रहे हैं, जो प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए लगातार कदम उठा रही है. इसी क्रम में, परिवहन विभाग ने गाजियाबाद में एग्रीगेटर कंपनियों और ई-कॉमर्स फ्लीट के लिए नए नियम लागू किए हैं, जो आने वाले समय में प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण साबित होंगे.

केवल CNG और इलेक्ट्रिक वाहन चलाने की अनुमति

अब से गाजियाबाद में ओला, उबर, जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट जैसी एग्रीगेटर कंपनियों और ई-कॉमर्स फ्लीट की नई गाड़ियाँ केवल CNG या इलेक्ट्रिक वाहनों के रूप में हो सकती हैं. यह कदम प्रदूषण पर काबू पाने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि सड़क पर दौड़ने वाली गाड़ियों से निकलने वाली जहरीली गैसों का स्तर घटाया जा सके. वहीं, मौजूदा फ्लीट में भी कंपनियां सिर्फ CNG और EV वाहनों को जोड़ सकेंगी. इसके अलावा, 2026 से लागू होने वाले नियमों में चार पहिया हल्के वाहनों (LCV), चार पहिया हल्के मालवाहन (LGV), और दो पहिया डिलीवरी वाहनों पर भी इसी तरह का प्रतिबंध लागू होगा.

1 जनवरी 2026 से लागू होगा पूर्ण प्रतिबंध

जिला परिवहन अधिकारी सियाराम वर्मा ने इस संबंध में जानकारी दी कि हर साल नवंबर में एनसीआर का प्रदूषण तेजी से बढ़ता है, और इसे नियंत्रित करने के लिए CAQM विभिन्न प्रकार की पॉलिसी लागू करता है. उन्होंने बताया कि 1 जनवरी 2026 से गाजियाबाद में टैक्सी और एग्रीगेटर सर्विसेज द्वारा चलाए जा रहे पेट्रोल और डीजल वाहनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा. यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि इन कंपनियों के वाहन सड़कों पर बड़ी संख्या में चलते हैं, और इनसे निकलने वाला प्रदूषण शहर की हवा को और भी खराब करता है.

नियमों की निगरानी होगी ऑनलाइन

इसके साथ ही, सरकार प्रदूषण नियंत्रण के इन प्रयासों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग भी करेगी. उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान मिलकर एक वेब पोर्टल विकसित कर रहे हैं, जिस पर इन कंपनियों को अपनी पूरी फ्लीट का डेटा अपलोड करना होगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी कंपनियां इन नए नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं. परिवहन विभाग का कहना है कि यह कदम गाजियाबाद और एनसीआर के प्रदूषण को कम करने के लिए उठाया गया है, और इससे लोगों को स्वच्छ हवा मिलने में मदद मिलेगी.

ये भी पढ़ें: UP: योगी सरकार ने 95 नई सिंचाई परियोजनाओं को दी मंजूरी, 9 लाख किसानों को मिलेगा सीधा लाभ