Piyush Goyal In Berlin Dialogue: वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि भारत किसी भी व्यापार समझौते पर जल्दबाजी में या दबाव में हस्ताक्षर नहीं करता. उन्होंने यह भी कहा कि भारत विभिन्न देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने के लिए सक्रिय वार्ता में लगा हुआ है, जिसमें यूरोपीय संघ (EU), अमेरिका और अन्य वैश्विक साझेदार शामिल हैं.
यह बयान गोयल ने जर्मनी के बर्लिन में आयोजित बर्लिन ग्लोबल डायलॉग के दौरान दिया. उन्होंने व्यापार समझौतों को केवल टैरिफ या बाजार पहुंच तक सीमित न मानने की आवश्यकता पर जोर दिया. उनका कहना था कि ऐसे समझौते विश्वास निर्माण, दीर्घकालिक साझेदारी और वैश्विक व्यापार सहयोग के लिए स्थायी ढांचे का निर्माण करते हैं.
Trade deals are about TRUST pic.twitter.com/KaVu19mpSQ
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) October 24, 2025
गोयल ने कहा, “भारत यूरोपीय संघ के साथ लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) पर वार्ता कर रहा है. हम अमेरिका के साथ भी बातचीत में हैं. लेकिन यह ध्यान रखना आवश्यक है कि हम किसी भी समझौते पर समय की तंग दौड़ में या दबाव में हस्ताक्षर नहीं करेंगे. हमारे लिए महत्वपूर्ण यह है कि व्यापारिक समझौते संतुलित और सभी पक्षों के लिए लाभकारी हों.”
व्यापार समझौते में संतुलन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण
पीयूष गोयल ने बर्लिन डायलॉग में बताया कि भारत की प्राथमिकता यह है कि व्यापारिक समझौते सिर्फ आर्थिक लाभ या बाजार पहुँच तक सीमित न रहें. उनका कहना था, “व्यापार समझौते विश्वास का निर्माण करते हैं. यह दीर्घकालिक साझेदारी का माध्यम है, जिसमें दोनों पक्षों को स्थायी लाभ मिले और वैश्विक व्यापार प्रणाली में स्थिरता आए.”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के खिलाफ किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा. उन्होंने कहा, “अगर कोई मुझसे कहता है कि भारत यूरोपीय संघ के साथ साझेदारी नहीं कर सकता, या केन्या के साथ व्यापार नहीं कर सकता, तो यह स्वीकार्य नहीं होगा. भारत हमेशा अपने हितों और संतुलित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देगा.”
यूरोपीय संघ के साथ लंबित समझौते पर वार्ता
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत वर्षों से लंबित है. इसमें कई मुद्दे हैं, जैसे कि बाजार पहुंच, पर्यावरणीय मानक, उत्पादन नियम और शुल्क नीति. गोयल ने बताया कि भारत इन मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करना चाहता है.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत नए बाजार तलाशने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि घरेलू उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाया जा सके और जरूरत से अधिक टैरिफ के जोखिम को कम किया जा सके.
अमेरिका के दबाव के बीच भारत की स्थिति
पीयूष गोयल की टिप्पणियां ऐसे समय में महत्वपूर्ण हैं जब अमेरिका भारत पर रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने का दबाव डाल रहा है. गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी परिस्थिति में अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा. उनके अनुसार, देश की विदेश नीति और व्यापार रणनीति में समान और स्वतंत्र निर्णय सर्वोपरि हैं.
दीर्घकालिक व्यापार नीति
गोयल ने जोर देकर कहा कि भारत हमेशा व्यापारिक निर्णयों को दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से देखता है. उनका कहना था कि अल्पकालिक लाभ या राजनीतिक दबाव में व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करना भारत की नीति नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि भारत का उद्देश्य नए और विविध बाजारों के साथ स्थायी साझेदारी बनाना है, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लंबे समय तक लाभ सुनिश्चित किया जा सके.
गोयल फिलहाल बर्लिन में हैं और बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में भाग ले रहे हैं, जहाँ उन्होंने भारत की व्यापारिक नीति, वैश्विक साझेदारी और रणनीतिक दृष्टिकोण के बारे में गहन चर्चा की. उनके अनुसार, व्यापार समझौते केवल आर्थिक हित तक सीमित नहीं होते, बल्कि यह विश्वास, स्थायी सहयोग और वैश्विक स्तर पर स्थिरता बनाने का माध्यम भी हैं.
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