Shatrughan Sinha On PM Modi: राजनीति में दोस्ती और मतभेद अक्सर एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं. लेकिन जब कोई वरिष्ठ नेता वर्षों बाद एक पुराने राजनीतिक रिश्ते को सार्वजनिक मंच पर "एक बार का दोस्त, हमेशा का दोस्त" कहकर याद करता है, तो इसके पीछे केवल भावनाएं नहीं, बल्कि सियासत भी झलकती है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर बधाई देने वालों की कतार में एक नाम ऐसा भी था, जिसने सबका ध्यान खींचा, शत्रुघ्न सिन्हा. उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "Once a friend, always a friend." बस, फिर क्या था, इस एक लाइन से राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे कि क्या शत्रुघ्न सिन्हा फिर बीजेपी की राह देख रहे हैं?
Once a friend always a friend indeed!!! pic.twitter.com/RyVIU44GpP
— Shatrughan Sinha (@ShatruganSinha) September 17, 2025
दोस्ती, मतभेद और दूरी
शत्रुघ्न सिन्हा और नरेंद्र मोदी, दोनों ही भाजपा की राजनीति की उपज हैं और एक समय में लालकृष्ण आडवाणी खेमे के करीबी माने जाते थे. शत्रुघ्न सिन्हा ने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री पद तक की जिम्मेदारी निभाई, लेकिन मोदी के उदय के साथ ही इन दोनों के रिश्तों में दूरी आनी शुरू हुई.
2013 में जब मोदी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने की चर्चा थी, शत्रुघ्न सिन्हा ने खुले मंच से आडवाणी के पक्ष में बयान दिए और मोदी को वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन की जरूरत बताई. यहीं से संबंधों में दरार आई, और 2014 में टिकट तो मिला, लेकिन पार्टी में असर लगभग खत्म हो गया.
आलोचक से प्रशंसक तक का सफर, पर बैलेंस नहीं बना
शत्रुघ्न सिन्हा ने 2014 में मोदी की संभावित जीत की भविष्यवाणी की थी, यहां तक कि कहा कि वे पहले नेता थे जिन्होंने मोदी को "नमो" कहा. इसके बावजूद, उन्हें मोदी कैबिनेट में कोई जगह नहीं मिली. इससे नाराज होकर वे धीरे-धीरे पार्टी से कटते चले गए.
2019 में उन्होंने बीजेपी छोड़ी, पहले कांग्रेस और फिर टीएमसी का दामन थामा. हालांकि दोनों ही दलों में उन्हें वह राजनीतिक वजन नहीं मिला, जिसकी वे अपेक्षा रखते थे.
अब क्यों याद आ रही है "पुरानी दोस्ती"?
प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर किया गया शत्रुघ्न सिन्हा का यह पोस्ट केवल एक औपचारिक बधाई नहीं लगता. यह ऐसे समय आया है जब बिहार में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है. टीएमसी में उन्हें अपेक्षित 'स्पेस' नहीं मिल पा रहा. इसके अलावा वो कांग्रेस से दूरी बना चुके हैं और राजनीतिक वापसी की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. इस पोस्ट को कुछ लोग संकेत मान रहे हैं कि शायद शत्रुघ्न सिन्हा ‘घर वापसी’ के मूड में हैं.
सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाएं भी दे रहीं हैं संकेत
उनके पोस्ट पर यूज़र्स की टिप्पणियों से भी यह अटकलें और मजबूत हुई हैं. एक यूजर ने लिखा, "क्या अब BJP में वापसी का वक्त आ गया है?" अन्य यूजर ने लिखा, "ममता बानो से दिल भर गया क्या?" इसके अलावा एक यूजर ने लिखा, "मतभेद राजनीति में आम हैं, पर दिलों का रिश्ता हमेशा बना रहता है."
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