From Crores To Rapido Driver: कभी-कभी जिंदगी सबसे गहरी कहानियां अखबारों या मंचों पर नहीं, बल्कि सड़क पर चलती एक बाइक पर सुना देती है. न कैमरा होता है, न माइक, बस दो अजनबी और कुछ मिनटों की बातचीत. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसने हजारों लोगों को भावुक कर दिया है. यह कहानी है एक रैपिडो बाइक ड्राइवर की, जिसकी मुस्कान के पीछे छुपा दर्द एक आम सफर के दौरान सामने आया.
एक्स (पूर्व ट्विटर) यूज़र चिराग (@0xChiraag) ने अपनी पोस्ट में बताया कि उन्होंने रोज की तरह एक रैपिडो बाइक बुक की थी. शुरुआत में बातचीत बिल्कुल आम थी, घर कहां है, क्या पढ़ाई कर रहे हो, दिन कैसा चल रहा है. लेकिन कुछ ही देर में यह बातचीत जिंदगी की उस सच्चाई तक पहुंच गई, जिसे सुनकर कोई भी चुप हो जाए.
Life is so unfair, man.
— Chiraag (@0xChiraag) December 22, 2025
I was on a Rapido bike today, just a normal ride. The driver asked me where I live, which college I go to. Casual stuff.
Then out of nowhere, he started telling me his story. He said he did hotel management from Amity. Life was good back then when his…
पढ़ाई, सेना से जुड़ा परिवार और स्थिर जिंदगी
ड्राइवर ने बताया कि उसने अमिटी यूनिवर्सिटी से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी. उसके पिता भारतीय सेना में थे और परिवार का खुद का एक अच्छा-खासा बिजनेस था. उस दौर की बातें करते हुए उसकी आवाज में सुकून झलक रहा था, ना पैसों की चिंता, ना भविष्य का डर. जिंदगी पटरी पर थी और सपने साफ नजर आते थे.
कोरोना ने सब कुछ बदल दिया
बातचीत जब कोविड-19 महामारी तक पहुंची, तो कहानी का लहजा बदल गया. ड्राइवर ने बताया कि महामारी ने उनके परिवार की पूरी आर्थिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया. सालों में खड़ा किया गया बिजनेस कुछ ही महीनों में ठप हो गया. करीब 13–14 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और सब कुछ बिखरता चला गया. उम्मीद के सहारे उसने एक दोस्त के साथ स्टार्टअप शुरू किया, लेकिन वह भी नहीं चल सका. वहां भी लगभग 4 लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ा.
“आखिर में मेरे पास बस मेरी बाइक बची”
ड्राइवर ने बेहद भारी आवाज में कहा कि जब सब कुछ खत्म हो गया, तब उसके पास सिर्फ उसकी बाइक बची थी. उसी बाइक के सहारे उसने रैपिडो चलाना शुरू किया. वह बोला, “मैं थक गया हूं, लेकिन टूटा नहीं हूं. भगवान पर भरोसा है. हार मानने से पहले एक आखिरी कोशिश जरूर करूंगा.”
यह कहते हुए वह भावुक हो गया और बाइक चलाते हुए उसकी आंखें भर आईं. चिराग ने लिखा कि उस पल उनके पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं थे. पूरी राइड खामोशी में बीती.
सोशल मीडिया पर छलका लोगों का दर्द
यह पोस्ट सामने आते ही तेजी से वायरल हो गई. अब तक इसे 5 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं. कमेंट सेक्शन में लोगों ने अपने दिल की बात लिखी. कई यूज़र्स ने कहा कि कोविड ने न जाने कितने परिवारों को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया. कुछ ने इसे उन “अदृश्य संघर्षों” की कहानी बताया, जो हमारे आसपास रोज होते हैं, लेकिन नजर नहीं आते.
एक कहानी, जो हमें रुककर सोचने पर मजबूर करती है
यह सिर्फ एक रैपिडो राइड की कहानी नहीं है. यह उस हिम्मत की कहानी है, जो टूटने के बाद भी इंसान को खड़ा रखती है. यह याद दिलाती है कि सड़क पर हमारे बगल से गुजरने वाला हर चेहरा अपनी अलग जंग लड़ रहा होता है, बस हम उसे देख नहीं पाते.
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