दिल्ली ब्लास्ट के केंद्र में क्यों आई अल-फलाह यूनिवर्सिटी? इन सवालों के जवाब तलाशने में लगी NIA

Al Falah University: हाल ही में कश्मीर मूल के एक मेडिकल प्रोफेसर की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है. इस कार्रवाई ने न केवल हाल के वर्षों में आतंकवाद-रोधी अभियानों में सबसे बड़ी विस्फोटक बरामदगी को उजागर किया है, बल्कि हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी (Al Falah University) को भी जांच के घेरे में ला खड़ा किया है.

Al-Falah University come at the center of Delhi blast NIA started finding answers to these questions
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Al Falah University: हाल ही में कश्मीर मूल के एक मेडिकल प्रोफेसर की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है. इस कार्रवाई ने न केवल हाल के वर्षों में आतंकवाद-रोधी अभियानों में सबसे बड़ी विस्फोटक बरामदगी को उजागर किया है, बल्कि हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी (Al Falah University) को भी जांच के घेरे में ला खड़ा किया है.

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस और खुफिया एजेंसियों को इस बात का संदेह है कि विश्वविद्यालय परिसर की प्रयोगशालाओं (लैब्स) का उपयोग विस्फोटक सामग्री तैयार करने या उसके भंडारण के लिए किया गया हो सकता है. मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ-साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी इसमें शामिल हो चुकी है.

2,900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद, हथियारों का जखीरा मिला

अधिकारियों के अनुसार, अब तक की छापेमारी में जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में विभिन्न ठिकानों से करीब 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री जब्त की गई है. बरामद सामग्री में अमोनियम नाइट्रेट, फ्यूल ऑयल, टाइमर, डेटोनेटर, हाई पावर बैटरी, वॉकी-टॉकी, और हथियारों का बड़ा जखीरा शामिल है.

पुलिस ने बताया कि फरीदाबाद के धौज इलाके में विश्वविद्यालय से जुड़े एक कर्मचारी डॉ. मुजम्मिल शकील के ठिकाने पर छापा मारने पर 12 सूटकेस और एक बड़ी बाल्टी में विस्फोटक मिला. इसके अलावा 20 टाइमर, रिमोट कंट्रोल डिवाइस, 5 किलो भारी धातु के टुकड़े, और एक वायरलेस कम्युनिकेशन सेट बरामद किया गया. प्रारंभिक जांच के मुताबिक, बरामद विस्फोटकों की प्रकृति सेना द्वारा इस्तेमाल होने वाले उच्च-ग्रेड RDX या उससे मिलते-जुलते केमिकल कंपाउंड जैसी पाई गई है.

यूनिवर्सिटी की लैब्स में हुआ विस्फोटक का प्रयोग या भंडारण

फरीदाबाद पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां अब यह जांच कर रही हैं कि क्या अल-फलाह यूनिवर्सिटी की प्रयोगशालाओं का इस्तेमाल विस्फोटक तैयार करने, मिलाने या छिपाने के लिए किया गया था.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालय की मेडिकल और साइंस लैब्स में कई ऐसे उपकरण हैं, जिनका उपयोग विस्फोटक मिश्रणों के संश्लेषण (synthesis) में किया जा सकता है. इन उपकरणों की जांच विशेषज्ञों द्वारा की जा रही है और कुछ नमूने फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) में भेजे गए हैं.

क्या है अल-फलाह यूनिवर्सिटी?

अल-फलाह यूनिवर्सिटी (Al-Falah University) की स्थापना वर्ष 2014 में हुई थी और इसे 2015 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से मान्यता प्राप्त हुई. यह निजी विश्वविद्यालय अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित होता है.

फरीदाबाद के धौज गांव में स्थित यह विश्वविद्यालय लगभग 70 एकड़ में फैला हुआ है. इसे NAAC द्वारा ‘A’ ग्रेड प्राप्त है और यहां विभिन्न तकनीकी, प्रबंधन, शिक्षा और चिकित्सा पाठ्यक्रम संचालित होते हैं.

यूनिवर्सिटी में पढ़ाए जाने वाले प्रमुख कोर्स

अल-फलाह विश्वविद्यालय में स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और डॉक्टरेट स्तर के कोर्स संचालित हैं. मुख्य संकाय इस प्रकार हैं:

  • इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी (Engineering and Technology)
  • मैनेजमेंट और कॉमर्स
  • कंप्यूटर साइंस और लॉ
  • एजुकेशन और ह्यूमैनिटीज
  • मेडिकल एवं पैरामेडिकल साइंसेज

इसके अलावा, परिसर में 650 बिस्तरों वाला अल-फलाह अस्पताल भी मौजूद है, जो विश्वविद्यालय के मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर के अंतर्गत संचालित होता है.

विश्वविद्यालय परिसर की सुविधाएं

अल-फलाह विश्वविद्यालय में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल, शिक्षकों के लिए आवासीय क्वार्टर्स, और डॉक्टरों के लिए एक रेजिडेंशियल ब्लॉक है. परिसर में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, कंप्यूटर सेंटर और एक बड़ा लाइब्रेरी कॉम्प्लेक्स भी मौजूद है. इसी वजह से जांच एजेंसियों को शक है कि यूनिवर्सिटी के किसी हिस्से का दुरुपयोग आतंकी गतिविधियों के लिए किया गया हो सकता है.

अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के अधीन अन्य संस्थान

यह विश्वविद्यालय अकेला नहीं है; अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के अंतर्गत कई अन्य शैक्षणिक संस्थान संचालित हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी
  • ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी
  • अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग
  • अल-फलाह स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट
  • अल-फलाह स्कूल ऑफ पैरामेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज
  • अल-फलाह स्कूल ऑफ फिजिकल एंड मॉलिक्यूलर साइंसेज

जांच एजेंसियां अब इन सभी संस्थानों के स्टाफ और छात्रों से पूछताछ कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित नेटवर्क या सहायता तंत्र का पता लगाया जा सके.

लाल किला ब्लास्ट से जुड़ रहे हैं तार

ध्यान देने वाली बात यह है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम तब सामने आया जब दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास सोमवार शाम एक हुंडई i20 कार में विस्फोट हुआ. इस घटना में 9 लोगों की मौत और 20 से अधिक घायल हुए.

CCTV फुटेज में कार चलाते हुए जो व्यक्ति दिखा, उसकी पहचान कश्मीर के पुलवामा निवासी डॉ. उमर मोहम्मद के रूप में की गई है. उमर, फरीदाबाद स्थित इसी अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था. एजेंसियों को शक है कि उसने अपने साथियों के साथ विश्वविद्यालय की सुविधाओं का दुरुपयोग कर विस्फोटकों को तैयार या स्टोर किया था.

पुलिस ने लगाया यूएपीए, दिल्ली में हाई अलर्ट

दिल्ली पुलिस ने विस्फोट के बाद पूरे शहर को हाई अलर्ट पर रखा है. फरीदाबाद, नोएडा और गुरुग्राम में भी सुरक्षा बढ़ाई गई है. मामले में यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) और विस्फोटक अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह केवल एक आतंकी घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होती है. जांच में शामिल हर व्यक्ति और संस्था की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है.”

फोरेंसिक टीमों की जांच जारी

फोरेंसिक विशेषज्ञों की कई टीमें फिलहाल यूनिवर्सिटी परिसर, प्रयोगशालाओं और संबंधित ठिकानों पर जांच कर रही हैं. सभी रसायन, नमूने और रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल की जा रही है. एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या RDX या इसी श्रेणी के अन्य विस्फोटकों का संश्लेषण यहीं हुआ था या सामग्री बाहर से लाकर यहां रखी गई थी.

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