इस देश पर अल-कायदा का कब्जा! सड़कों पर खून खराबा, कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए जारी की एडवाइजरी

AL Queda Siege Mali: पश्चिम अफ्रीका का देश माली एक बार फिर हिंसा और अस्थिरता की गिरफ्त में है. लगातार बिगड़ते हालातों के बीच अब अल-कायदा से जुड़े आतंकियों द्वारा राजधानी बमाको को घेरने की खबरें सामने आ रही हैं.

Al-Qaeda takes over Mali Bloodshed on the streets countries issued advisories for their citizens
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AL Queda Siege Mali: पश्चिम अफ्रीका का देश माली एक बार फिर हिंसा और अस्थिरता की गिरफ्त में है. लगातार बिगड़ते हालातों के बीच अब अल-कायदा से जुड़े आतंकियों द्वारा राजधानी बमाको को घेरने की खबरें सामने आ रही हैं. लंबे समय से आतंक और नाकेबंदी की मार झेल रहा यह देश अब एक बार फिर अराजकता की कगार पर है. ईंधन की आपूर्ति बंद होने से राजधानी ठप पड़ने लगी है और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले दिनों में बमाको पर अल-कायदा का कब्ज़ा हो सकता है.

माली की गंभीर स्थिति को देखते हुए कई देशों ने अपने नागरिकों को वहां से निकलने का निर्देश दिया है. अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नागरिक तत्काल माली छोड़ दें. इतालवी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “माली में मौजूद सभी इतालवी नागरिकों से अनुरोध है कि वे जितनी जल्दी हो सके देश छोड़ दें.” इसी तरह, अमेरिका और जर्मनी ने भी अपने नागरिकों को माली की यात्रा न करने की सलाह दी है.

माली में क्या चल रहा है

पश्चिम अफ्रीका का स्थल-रुद्ध देश माली, अल्जीरिया, नाइजर, बुर्किना फासो, कोट डी आइवर, गिनी, सेनेगल और मॉरिटानिया से घिरा हुआ है. यहां लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवाद हावी है. अल-कायदा से जुड़ा समूह जमात नुसरत अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमीन (JNIM) सितंबर से ईंधन नाकेबंदी लागू कर चुका है, जिसने पूरे देश की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है.

क्यों हुई नाकेबंदी

JNIM ने 3 सितंबर से नाकेबंदी तब शुरू की जब माली की सैन्य सरकार ने ग्रामीण इलाकों में ईंधन बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था. इसके जवाब में आतंकियों ने सेनेगल की सीमा से लगे शहरों, कायेस और निओरो में ईंधन की सप्लाई रोक दी और राजधानी तक पहुंचने वाले काफिलों पर हमले शुरू कर दिए.

बढ़ता ईंधन संकट

“अफ्रीका सिक्योरिटी एनालिसिस” के अनुसार, इस नाकेबंदी के ज़रिए JNIM न सिर्फ सीमा पार आवाजाही पर नियंत्रण दिखाना चाहता है, बल्कि माली की सैन्य सरकार की आपूर्ति लाइनों को भी कमजोर कर रहा है. एक वायरल वीडियो में JNIM के नेता अबू हौज़ीफ़ा अल बाम्बारी ने कहा, “हम एक बूंद भी ईंधन अंदर नहीं आने देंगे.” 14 सितंबर को सेनेगल से आने वाले कई ईंधन टैंकरों पर हमले किए गए, जिससे पूरे देश में ईंधन की भारी किल्लत हो गई है.

बढ़ती अराजकता, घटती उम्मीदें

रूस और चीन के सहयोग से सैन्य सरकार ने देश में स्थिरता लाने की कोशिश की थी, लेकिन हालात और बिगड़ गए हैं. आतंकियों के बढ़ते दबदबे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की कमी ने माली को एक गहरे संकट में धकेल दिया है. अगर बमाको पर भी आतंकियों का नियंत्रण हो गया, तो माली पूरी तरह अल-कायदा के कब्जे में आ सकता है, जो पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के लिए एक बड़ा खतरा साबित होगा.

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