अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच सात साल बाद आमने-सामने की मुलाकात हुई. दुनिया की निगाहें इस बैठक पर टिकी थीं और उम्मीद थी कि इस अहम मुलाकात से रूस-यूक्रेन युद्ध में किसी प्रकार की ठहराव आएगा. हालांकि, परिणाम उम्मीदों के विपरीत रहे. तीन घंटे तक चली वार्ता के बावजूद दोनों नेताओं के बीच युद्धविराम या किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बन पाई.
मुलाकात के बाद, पुतिन अपने विशेष विमान से मॉस्को लौट गए, जबकि ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडोमिर जेलेंस्की को स्पष्ट सलाह दी कि रूस के साथ समझौता करना उनके लिए बेहतर होगा. ट्रंप ने फ़ॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहा, "मेक अ डील… रूस बहुत बड़ी शक्ति है और यूक्रेन नहीं है." यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनयिक महौल में नई बहस को जन्म दे सकता है, क्योंकि पश्चिमी देशों की नीति हमेशा रूस पर दबाव बनाने और यूक्रेन को पूर्ण समर्थन देने पर आधारित रही है.
जेलेंस्की को नहीं किया गया था इंवाइट
ध्यान देने वाली बात यह है कि शिखर सम्मेलन में जेलेंस्की को आमंत्रित नहीं किया गया था. इससे पहले, उन्होंने यूरोपीय नेताओं से मुलाकात की थी और ट्रंप के साथ वर्चुअल बातचीत में चेतावनी दी थी कि पुतिन शांति की आड़ में क्षेत्रीय रियायतें हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का रुख यह संकेत देता है कि वे संघर्ष का समाधान समझौते के माध्यम से ही व्यावहारिक मानते हैं.
पुतिन ने बैठक के बाद कहा कि पिछला दौर द्विपक्षीय संबंधों के लिए बेहद कठिन था. उन्होंने स्पष्ट किया कि शीत युद्ध के बाद अमेरिका और रूस के रिश्ते अपने निचले स्तर पर पहुंच गए थे, और अब समय आ गया है कि संवाद और समझौते की दिशा में कदम बढ़ाए जाएँ. यूक्रेन पर पुतिन ने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रशासन और ट्रंप की इच्छा संघर्ष समाधान में सहायता करने की है, और इसे समझने के लिए सभी वैध चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बैठक और इसके बाद दिए गए बयानों के प्रभाव पर बारीकी से नजर रख रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है, लेकिन कोई व्यापक शांति समझौते की संभावना अभी भी धुंधली दिखाई देती है.
यह भी पढ़ें: पुतिन के सामने ट्रंप की टूटी हेकड़ी! इसलिए दोनों नेताओं के बीच नहीं बनी बात, जानें अंदर की कहानी