सिरीया पर अमेरिका का बड़ा हमला, घर में घुसकर ISIS कमांडर को किया ढेर

न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को अमेरिकी सैन्य बलों ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया में एक महत्वपूर्ण आतंकवाद-रोधी अभियान चलाया. इस कार्रवाई में आईएस के एक प्रमुख सरगना और दो अन्य आतंकी मारे गए. पेंटागन की सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है.

America airstrike on syria killed isis commander
Image Source: ANI

न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को अमेरिकी सैन्य बलों ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया में एक महत्वपूर्ण आतंकवाद-रोधी अभियान चलाया. इस कार्रवाई में आईएस के एक प्रमुख सरगना और दो अन्य आतंकी मारे गए. पेंटागन की सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि अलेप्पो क्षेत्र में यह कार्रवाई की गई, जिसमें आतंकवादी धिया जावबा मुस्लीह अल-हरदानी और उसके दो बेटे मारे गए.

अमेरिकी सेना द्वारा की गई इस छापेमारी में विशेष ऑपरेशन कमांडो की मदद ली गई थी. ये कमांडो हेलीकॉप्टर द्वारा संचालित होते हैं और आमतौर पर इन अभियानों में हमलावर विमानों और ड्रोनों का भी इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, इस तरह के ऑपरेशन में सैनिकों की जान का खतरा रहता है, क्योंकि यह ड्रोन हमलों से ज्यादा जोखिमपूर्ण होते हैं. बावजूद इसके, इस ऑपरेशन ने अमेरिकी सेना को अहम सफलता दिलाई है.

आईएस के आतंकवादी क्यों थे महत्वपूर्ण लक्ष्य?

सेंट्रल कमांड के अनुसार, मारे गए आतंकवादी अमेरिकी और गठबंधन सेनाओं के लिए ही नहीं, बल्कि सीरिया की नई सरकार के लिए भी एक बड़ा खतरा थे. हालांकि, इस छापेमारी में मौके पर मौजूद तीन महिलाएं और तीन बच्चों को कोई चोट नहीं आई, जो कि राहत की बात है.

अमेरिकी सेना की पहली बड़ी सफलता

यह ऑपरेशन इस साल आईएस के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा किया गया पहला महत्वपूर्ण मिशन था. पेंटागन के अधिकारियों ने कहा कि इस मिशन में कोई अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ, जो इस अभियान की सफलता और सावधानी को दर्शाता है.

फ्रांस में 40 साल बाद रिहा हुआ आतंकी, लेबनान में पहुंचा

इसी बीच, फ्रांस में 40 साल से अधिक समय तक नजरबंदी में रहे एक लेबनानी फलस्तीनी समर्थक आतंकी को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया. जार्जेस इब्राहिम अब्दुल्ला, जो 1982 में पेरिस में दो राजनयिकों की हत्या में शामिल था, अब लेबनान पहुंच चुका है.

अदालत का निर्णय: शर्तों के साथ रिहाई

74 वर्षीय जार्जेस इब्राहिम अब्दुल्ला को पेरिस अपीलीय न्यायालय ने रिहा करने का आदेश दिया. अदालत ने यह शर्त रखी कि वह फ्रांस छोड़ दे और कभी भी देश में वापस न आए. अब्दुल्ला 40 साल से अधिक समय से फ्रांस की जेल में था, और उसके खिलाफ आरोप थे कि उसने दो राजनयिकों की हत्या की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया.

क्या रिहाई के फैसले पर विवाद होगा?

जार्जेस अब्दुल्ला की रिहाई पर फ्रांस में विवाद हो सकता है, क्योंकि कई लोगों का मानना है कि उसे छोड़ने का निर्णय न केवल फ्रांस की न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाता है, बल्कि इससे आतंकी समूहों के लिए एक संदेश भी जा सकता है.

यह भी पढ़ें: खामेनेई की लुटिया डुबाने लगे ईरानी अधिकारी! सत्ता पलटने के लिए तैयार किया प्लान; 50 हजार अधिकारी शामिल