सीरीया पर बरसा अमेरिक... रातों-रात किया बड़ा हमला; तबाह किए 70 से अधिक ठिकाने

वाशिंगटन में सुरक्षा एजेंसियों में हलचल तेज है. 13 दिसंबर को हुए एक घातक हमले में दो नेशनल गार्ड सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक की मौत के बाद अमेरिका ने सीरिया में ISIS के खिलाफ निर्णायक जवाबी कार्रवाई की है.

America attacked on isis hideouts over deaths of his citizens
Image Source: ANI

वाशिंगटन में सुरक्षा एजेंसियों में हलचल तेज है. 13 दिसंबर को हुए एक घातक हमले में दो नेशनल गार्ड सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक की मौत के बाद अमेरिका ने सीरिया में ISIS के खिलाफ निर्णायक जवाबी कार्रवाई की है. अमेरिकी सेना ने कुछ ही दिनों के भीतर व्यापक सैन्य अभियान चलाते हुए आतंकी संगठन के ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे यह साफ संदेश गया कि ऐसे हमलों का जवाब तुरंत और कड़े तरीके से दिया जाएगा.

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, 13 दिसंबर को हुए हमले में तीन अन्य अमेरिकी सैनिक और कई सीरियाई सुरक्षा बल भी घायल हुए थे. इस घटना के पीछे ISIS से जुड़े एक बंदूकधारी का हाथ बताया गया है. इसके बाद शुक्रवार को अमेरिकी सेना ने सीरिया में आतंकी संगठन के खिलाफ जवाबी हमलों की एक श्रृंखला शुरू की. इस अभियान को ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ नाम दिया गया है. इसका उद्देश्य ISIS के बुनियादी ढांचे, हथियारों के भंडारण स्थलों और ऑपरेशनल केंद्रों को पूरी तरह ध्वस्त करना है. रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने हमले से कुछ मिनट पहले ऑपरेशन की जानकारी देते हुए कहा कि यह किसी नए युद्ध की शुरुआत नहीं, बल्कि आतंक के खिलाफ बदले की स्पष्ट घोषणा है.

ISIS अब भी खतरा, हजारों लड़ाके सक्रिय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के बाद बेहद सख्त प्रतिक्रिया देने का वादा किया था. वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सीरियाई सरकार और आतंकवाद विरोधी साझा प्रयासों के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता दोहराई. व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, यह पहले ही तय कर लिया गया था कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा. सीरियाई सरकारी टेलीविजन के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में उन ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनका इस्तेमाल ISIS क्षेत्र में अपने अभियानों के लिए लॉन्चिंग पॉइंट के रूप में करता था. हालांकि ISIS को काफी हद तक कमजोर किया जा चुका है, फिर भी अनुमान है कि सीरिया और इराक में अब भी 5000 से 7000 आतंकी सक्रिय हैं, जो लगातार खतरा बने हुए हैं.

पल्मायरा के पास हुआ था घातक हमला

13 दिसंबर को यह जानलेवा हमला सीरिया के पल्मायरा के नजदीक एक संयुक्त अमेरिकी-सीरियाई गश्ती अभियान के दौरान हुआ था. बाद में हमलावर की पहचान सीरियाई सुरक्षा बलों से जुड़े एक कट्टरपंथी सदस्य के रूप में हुई. उसने गश्ती काफिले पर अचानक गोलियां चला दीं. इस हमले में 29 वर्षीय सार्जेंट विलियम नथानिएल हॉवर्ड और 25 वर्षीय सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस-टोवर की मौत हो गई. इसके अलावा दुभाषिया अयाद मंसूर सकत भी इस हमले का शिकार हुआ. हमले में तीन अन्य अमेरिकी सैनिक और कई सीरियाई सुरक्षाकर्मी घायल हुए, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई थी.

ISIS के ठिकानों पर हवाई और जमीनी हमले

पीट हेगसेथ के अनुसार, ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ के तहत दीर एज-जोर और रक्का प्रांतों के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ पल्मायरा के आसपास ISIS के ठिकानों को निशाना बनाया गया. इन ठिकानों में हथियारों के भंडारण स्थल, कमांड सेंटर और लॉजिस्टिक अड्डे शामिल थे. अमेरिकी सेना ने इस ऑपरेशन में F-15 ईगल लड़ाकू विमान, A-10 थंडरबोल्ट ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट और AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया. इन हमलों का उद्देश्य ISIS की सैन्य क्षमता को पूरी तरह कमजोर करना और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकना बताया गया है.

अमेरिकी सैनिकों को दी गई श्रद्धांजलि

हमले से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने डेलावेयर स्थित डोवर एयर फोर्स बेस में मारे गए अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक सौंपे जाने के कार्यक्रम में भाग लिया. उन्होंने इससे पहले पीड़ितों के परिवारों से निजी मुलाकात भी की थी. कुल मिलाकर, सीरिया में अमेरिका की यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ उसकी सख्त नीति और सुरक्षा बलों पर हमले के प्रति जीरो टॉलरेंस का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है.

यह भी पढ़ें: ताइवान के ताइपे मेट्रो स्टेशन के पास चाकू और स्मोक ग्रेनेड से हमला, 2 की मौत, कई घायल