अमेरिका ने तैनात किया युद्धपोत और F-35 लड़ाकू जेट, कैरेबियन देशों को क्यों भड़का रहे ट्रंप? जानें प्लान

अमेरिकी रक्षा विभाग ने हाल ही में कैरिबियन सागर में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ एक सैन्य कार्रवाई की जानकारी दी है.

America deployed warships and F-35 fighter jets
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वॉशिंगटन/कैरिबियन: अमेरिकी रक्षा विभाग ने हाल ही में कैरिबियन सागर में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ एक सैन्य कार्रवाई की जानकारी दी है. रक्षा मंत्री पेटे हेगेथ के अनुसार, अमेरिकी सैन्य बलों ने एक नाव पर हवाई हमला किया, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई. यह कार्रवाई अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े नार्को-टेररिस्ट नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए की गई थी.

अमेरिका ने इस अभियान में F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स, नौसेना युद्धपोत और बड़े पैमाने पर सैन्य बलों की तैनाती की है. प्रशासन का दावा है कि यह अभियान केवल ड्रग ट्रैफिकिंग को रोकने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है. हेगेथ ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि मारे गए लोग अमेरिकी खुफिया जानकारी के अनुसार ड्रग्स की तस्करी में सक्रिय थे और अमेरिका के खिलाफ अवैध नेटवर्क में शामिल थे.

अमेरिका का अभियान और कार्रवाई

डिफेंस अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के दौरान अब तक कम से कम 15 नावों को निशाना बनाया गया है और 60 से अधिक लोग मारे गए हैं. अमेरिकी सरकार ने इसे “सशस्त्र संघर्ष और राष्ट्रीय सुरक्षा की कार्रवाई” करार दिया है. हालांकि, इस तरह की कार्रवाइयों की वैधता और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूपता पर आलोचना भी उठी है.

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की बिना प्रक्रिया के हवाई और नौसैनिक हमले विवादास्पद हो सकते हैं. इस कार्रवाई ने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठाया है कि क्या अमेरिका केवल ड्रग्स के कारोबार को रोकने के लिए इतना सैन्य बल तैनात कर रहा है या इसके पीछे अन्य रणनीतिक उद्देश्यों का हाथ है.

रूस और वेनेजुएला का रुख

रूस ने इस अमेरिकी सैन्य अभियान की कड़ी आलोचना की है. रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा कि अमेरिका ने कैरेबियन सागर में ड्रग्स विरोधी अभियान का बहाना बनाकर सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया है. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाइयां क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा सकती हैं.

रूस ने वेनेजुएला सरकार के समर्थन का भी संकेत दिया है. यह संकेत अमेरिकी रणनीतिकारों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वेनेजुएला रूस के तेल और रक्षा सहयोग में शामिल है. ऐसे में अमेरिकी कार्रवाई का मकसद केवल ड्रग तस्करी रोकना नहीं बल्कि क्षेत्रीय प्रभुत्व और शक्ति संतुलन बनाए रखना भी है.

कैरिबियन और लैटिन अमेरिका में तनाव

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की सैन्य गतिविधियां कैरिबियन और लैटिन अमेरिकी देशों में तनाव बढ़ा सकती हैं. अमेरिका का यह कदम, जिसे वह ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई कहता है, वास्तव में उसके भू-राजनीतिक हितों और शक्ति प्रदर्शन से भी जुड़ा है.

कैरिबियन क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती उपस्थिति ने अमेरिका को सतर्क कर दिया है. रूस और चीन, लैटिन अमेरिकी देशों में आर्थिक और रक्षा सहयोग बढ़ा रहे हैं. अमेरिका इन देशों में अपना प्रभाव बनाए रखने के लिए अक्सर सैन्य और कूटनीतिक कदम उठाता है. ऐसे में कैरिबियन सागर के आसपास के देशों में शीतयुद्ध जैसी स्थिति बनती दिखाई दे रही है, जहां क्षेत्रीय और वैश्विक ताकतों के बीच शक्ति और प्रभाव का टकराव जारी है.

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