अमेरिका में एक बार फिर गवर्नमेंट शटडाउन का संकट गहराता जा रहा है. अगर अमेरिकी संसद (कांग्रेस) तय समय पर बजट को मंजूरी नहीं देती है, तो मंगलवार आधी रात के बाद से कई अहम सरकारी विभागों का कामकाज ठप हो सकता है. इसका सीधा असर लगभग 9 लाख संघीय कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिन्हें बिना सैलरी के छुट्टी पर भेजा जा सकता है.
यह संकट ऐसे समय में खड़ा हुआ है जब संघीय एजेंसियों में पहले से ही स्टाफ की भारी कमी है. ऐसे में एक और शटडाउन सरकार की कार्यप्रणाली को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है.
गवर्नमेंट शटडाउन: आखिर यह होता क्या है?
हर साल 1 अक्टूबर से अमेरिका में नया वित्त वर्ष शुरू होता है. उससे पहले 438 संघीय एजेंसियों के लिए बजट पास किया जाना अनिवार्य होता है. लेकिन जब कांग्रेस समय पर सहमति नहीं बना पाती, तो या तो एक अस्थायी खर्च बिल पास किया जाता है या फिर सरकार के कुछ हिस्सों में कामकाज पूरी तरह बंद हो जाता है. इसे ही "गवर्नमेंट शटडाउन" कहा जाता है. पिछली बार 2019 में डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में 35 दिन तक शटडाउन चला था, जो अब तक का सबसे लंबा रिकॉर्ड है.
इस बार टकराव की वजह क्या है?
वर्तमान संकट का कारण बना है बजट को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप और डेमोक्रेट-प्रभावित कांग्रेस के बीच तनातनी. मुख्य विवाद स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक कल्याण खर्चों पर केंद्रित है. दोनों पक्षों के बीच समझौता नहीं बन पा रहा, और अगर समय रहते हल नहीं निकला, तो इसका असर केवल सरकारी सेवाओं पर ही नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
किन विभागों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
सरकारी कामकाज रुकने की स्थिति में सबसे अधिक असर स्वास्थ्य और अनुसंधान से जुड़े विभागों पर पड़ेगा
कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?
गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 9 लाख कर्मचारी अस्थायी छुट्टी पर भेजे जा सकते हैं. पिछली बार की तरह इस बार भी कर्मचारियों को बाद में वेतन मिलने की उम्मीद है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि कुछ पदों को स्थायी रूप से खत्म भी किया जा सकता है. सरकार के पास अब सिर्फ मंगलवार तक का वक्त है. अगर तब तक बजट पास नहीं होता, तो बड़ी संख्या में कर्मचारी बिना वेतन के घर बैठने को मजबूर होंगे और देश भर में जरूरी सेवाओं पर असर पड़ेगा.
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