अमेरिका, इजरायल या फिर... ईरान में विद्रोह के पीछे किसका चल रहा है दिमाग? खामेनेई तक ट्रंप का भी मैसेज पहुंचा

Iran Protest: ईरान की राजधानी तेहरान में 30 दिसंबर, 2025 से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जिनका केंद्रबिंदु मौजूदा शासन के खिलाफ जनता का बढ़ता गुस्सा है. शुरुआत में यह प्रदर्शन महंगाई और आर्थिक संकट के कारण तेहरान के व्यापारियों तक सीमित थे, लेकिन अब यह आंदोलन देश के अन्य हिस्सों तक फैल चुका है.

America Israel the brain behind the rebellion in Iran Trump message also reached Khamenei
Image Source: Social Media

Iran Protest: ईरान की राजधानी तेहरान में 30 दिसंबर, 2025 से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जिनका केंद्रबिंदु मौजूदा शासन के खिलाफ जनता का बढ़ता गुस्सा है. शुरुआत में यह प्रदर्शन महंगाई और आर्थिक संकट के कारण तेहरान के व्यापारियों तक सीमित थे, लेकिन अब यह आंदोलन देश के अन्य हिस्सों तक फैल चुका है. ईरान में बढ़ती महंगाई और रियाल की अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरती कीमत ने आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है. इन हालातों में छात्रों और युवाओं का गुस्सा सड़कों पर खुलकर दिखाई दे रहा है.

विरोध प्रदर्शन अब केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहे. शुरुआत में व्यापारियों और वाणिज्यिक क्षेत्रों में शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे ईरानी Gen Z और छात्रों तक पहुंचा. तेहरान के विश्वविद्यालयों में भी अब छात्र सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. इसके साथ ही इस आंदोलन ने ईरान के कई अन्य शहरों जैसे शिराज, हामेदान और इस्फहान में भी जगह बना ली है.

कई जगहों पर प्रदर्शनकारी और पुलिस आमने-सामने आ गए, और झड़पों में हिंसा भड़क गई. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस दौरान हुई हिंसक झड़पों में लगभग पांच लोगों की मौत हुई है. पुलिस बल ने प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए कुछ जगहों पर हल्का बल प्रयोग किया, लेकिन इससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई.

अमेरिकी प्रतिक्रिया और ट्रंप का बयान

ईरान में चल रहे इस व्यापक आंदोलन पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रतिक्रिया दी. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यदि ईरानी सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाती है या उन्हें चोट पहुंचाती है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा और इसके लिए पूरी तरह तैयार है. ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के मौजूदा हालात पर चिंता बढ़ा दी है.

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद यह भी देखा जा रहा है कि चीन और रूस जैसे देश ईरान की स्थिति पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं. फिलहाल भारत की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

ईरान सरकार की कोशिशें और राष्ट्रपति का संदेश

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने X अकाउंट पर बयान जारी करते हुए प्रदर्शनकारियों से धैर्य रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि सरकार जनता की रोज़ी-रोटी और खरीदने की शक्ति बढ़ाने के लिए काम कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम में सुधार लाया जा रहा है और गृहमंत्री को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर मामले का समाधान करें.

साथ ही खबर यह भी आई है कि केंद्रीय बैंक के गवर्नर का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है. हालांकि, इन कदमों के बावजूद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा कम नहीं हुआ है. यह आंदोलन 2022 के बाद ईरान में सबसे बड़े और गंभीर विरोध प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है.

आर्थिक संकट और महंगाई का असर

ईरान वर्तमान में 40% से अधिक की महंगाई से जूझ रहा है. इसके अलावा पिछले साल जून में इजराइली एयरस्ट्राइक और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है. मौजूदा समय में 42,125 ईरानी रियाल एक अमेरिकी डॉलर के बराबर है, जिससे देश में महंगाई और जीवन यापन की कठिनाईयों का अंदाजा लगाया जा सकता है. पश्चिमी देशों की ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रमों पर लगातार दबाव बना रहता है, जो आर्थिक परिस्थितियों को और चुनौतीपूर्ण बना देता है.

भविष्य की दिशा

अब अंतरराष्ट्रीय और देश की जनता की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या ईरानी सरकार और जनता के बीच बातचीत से कोई समाधान निकल पाएगा या फिर युवा पीढ़ी, खासकर Gen Z, सत्ता के खिलाफ अपनी नाराजगी और आंदोलन को और आगे बढ़ाएगी. दुनिया भर की नजरें ईरान में जारी इस संकट पर बनी हुई हैं और आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार कैसे कदम उठाती है और प्रदर्शनकारियों की मांगों का क्या हल निकलता है.

ये भी पढ़ें- बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या पर भारत ने दिया जवाब, जयशंकर बोले- 'जब आपके पड़ोसी बुरे होते हैं...'