G-20 की अध्यक्षता मिलते ही ट्रंप का बड़ा ऐलान, इस देश को नहीं देंगे न्योता; सब्सिडी पर भी लगाई रोक

Trump On South Africa: अंतरराष्ट्रीय मंच पर तनाव फिर बढ़ गया है. दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन भले ही वैश्विक संवाद को आगे बढ़ाने का प्रयास था, लेकिन अमेरिका की अनुपस्थिति ने पूरे कार्यक्रम पर सवालों की लकीर खींच दी. 

America Trump presidency of G-20 will not invite South Africa will also ban subsidies
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Trump On South Africa: अंतरराष्ट्रीय मंच पर तनाव फिर बढ़ गया है. दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन भले ही वैश्विक संवाद को आगे बढ़ाने का प्रयास था, लेकिन अमेरिका की अनुपस्थिति ने पूरे कार्यक्रम पर सवालों की लकीर खींच दी. 

ट्रंप प्रशासन ने खुलकर कहा है कि दक्षिण अफ्रीका में ईसाई समुदाय और यूरोपीय मूल के लोगों के खिलाफ हो रही हिंसा पर सरकार की चुप्पी स्वीकार्य नहीं है. इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा निर्णय लिया है जिसने कूटनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है.

ट्रंप की बड़ी घोषणा 

ट्रंप ने घोषणा की है कि अगले साल फ्लोरिडा में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका को आमंत्रित नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही, अमेरिका द्वारा दी जा रही सभी सब्सिडी और सहयोग को बंद करने का निर्णय भी सामने आया है. उनके इस कदम को वॉशिंगटन की ओर से दक्षिण अफ्रीका को एक कड़ा संदेश माना जा रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

शुक्रवार (28 नवंबर, 2025) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका में आयोजित जी-20 सम्मेलन में इसलिए हिस्सा नहीं लिया क्योंकि, उनके अनुसार, दक्षिण अफ्रीकी सरकार अफ्रीकानर्स और डच, फ्रेंच व जर्मन मूल के लोगों के खिलाफ हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को न तो स्वीकार कर रही है और न ही उनसे निपटने के लिए कोई कदम उठा रही है.

ट्रंप ने क्या लिखा?

ट्रंप ने पोस्ट में लिखा कि दक्षिण अफ्रीका में “श्वेत लोगों की हत्याएं की जा रही हैं और उनकी जमीनों व खेतों को छीन लिया जा रहा है.” उन्होंने आगे मुख्यधारा मीडिया पर भी निशाना साधा. अपने शब्दों में उन्होंने कहा कि “सबसे चिंताजनक यह है कि जल्द ही बंद होने वाला न्यूयॉर्क टाइम्स और तथाकथित फेक न्यूज मीडिया इस कथित नरसंहार पर एक शब्द भी नहीं बोल रहा. यही कारण है कि कट्टर वामपंथी मीडिया का झूठ उजागर हो रहा है और वे बंद होते जा रहे हैं.”

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