Kupwada Encounter: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में भारतीय सेना ने एक बार फिर आतंकियों की घुसपैठ की साजिश नाकाम कर दी है. शुक्रवार देर रात से शुरू हुए ‘ऑपरेशन पिंपल’ के तहत सुरक्षा बलों ने दो आतंकियों को मार गिराया, जो नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर भारत में घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे. एनकाउंटर के दौरान सेना को भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और पाकिस्तानी सामान मिले हैं, जो यह साबित करते हैं कि आतंक की यह नई साजिश सीधे पाकिस्तान की जमीन से रची गई थी.
सेना की 15वीं कोर (चिनार कॉर्प्स) के जवानों को केरन सेक्टर में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी. इसके बाद इलाके की घेराबंदी की गई और शुक्रवार रात ऑपरेशन शुरू किया गया. जैसे ही घुसपैठिए भारतीय सीमा में दाखिल हुए, सेना ने उन्हें चुनौती दी. जवाबी फायरिंग में दो आतंकी मारे गए, जबकि कुछ अन्य घुसपैठिए अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे. सेना ने बताया कि दोनों आतंकियों का संबंध एक पाकिस्तानी आतंकी संगठन से था, जो हाल के महीनों में घाटी में हमलों की नई योजना बना रहा था.
#UPDATE | OP Pimple | Two terrorists have been neutralised by the security forces in the ongoing operation. Search of the area in progress: Chinar Corps
— ANI (@ANI) November 8, 2025
A joint operation was launched in the Keran sector of Kupwara. Alert troops spotted suspicious activity and challenged, which… https://t.co/dS755lRhvD pic.twitter.com/AxsCY0mQtk
मिले हथियारों से पाकिस्तानी कनेक्शन उजागर
मुठभेड़ के बाद जब इलाके की तलाशी ली गई तो सेना को भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद मिला. बरामद हथियारों में 1 अमेरिकी M4 राइफल, 1 AK-47 असॉल्ट राइफल, 2 ग्लॉक पिस्टल, सैकड़ों राउंड कारतूस, कई हैंड ग्रेनेड शामिल हैं. सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया उन सामग्रियों ने जो आतंकियों के बैग से बरामद की गईं, पाकिस्तान निर्मित सिगरेट, दवाइयां, एनर्जी बार, ड्राई फ्रूट्स और चीनी हैंड ग्रेनेड.
इन सबूतों से यह स्पष्ट हो गया कि ये आतंकी स्थानीय नहीं थे, बल्कि सीधे पाकिस्तान से प्रशिक्षित होकर आए थे. सेना के मुताबिक, उनके पास मौजूद राशन और दवाइयां पाकिस्तानी सैन्य आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी थीं, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस घुसपैठ के पीछे ISI की सीधी भूमिका थी.
पाकिस्तान की नापाक हरकतें जारी
सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद की कोशिशें लगातार जारी हैं. बीते दो महीनों में केवल उत्तर कश्मीर में 5 से अधिक घुसपैठ के प्रयास किए जा चुके हैं, जिनमें से अधिकतर को सेना ने नाकाम किया है.
हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर बार-बार यह कहते हैं कि “उनकी धरती से आतंकवाद को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा,” लेकिन हर एनकाउंटर में बरामद हो रहे पाकिस्तानी हथियार और राशन उनके दावों को झुठला रहे हैं. सेना के एक अधिकारी ने कहा, “जो सबूत हमारे पास हैं, वे साफ बताते हैं कि ये आतंकवादी किसी लोकल मॉड्यूल का हिस्सा नहीं थे. ये पाकिस्तान से प्रशिक्षित होकर आए थे, और उनका उद्देश्य घाटी में एक बार फिर दहशत का माहौल बनाना था.”
खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर
एनकाउंटर के बाद एनआईए और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने जांच शुरू कर दी है. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, यह समूह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के अथमुqam सेक्टर से केरन के जंगलों के रास्ते भारत में घुसा था. खुफिया सूत्रों के मुताबिक, यह ग्रुप आगामी त्योहारों और चुनावी माहौल में घाटी में अस्थिरता फैलाने के मिशन पर था. सेना और खुफिया एजेंसियों ने पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है ताकि भागे हुए आतंकियों को भी पकड़ा जा सके.
‘घुसपैठ की हर कोशिश नाकाम की जाएगी’
भारतीय सेना ने बयान जारी करते हुए कहा है कि LoC पर निगरानी और मजबूत कर दी गई है. उनके द्वारा कहा गया, “हमारी निगरानी प्रणाली और जवाबी कार्रवाई की क्षमता पहले से कहीं अधिक मजबूत है. हर बार जब पाकिस्तान अपनी नापाक साजिश करेगा, उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा.” सेना ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षाबलों को दें ताकि क्षेत्र को पूरी तरह आतंकमुक्त रखा जा सके.
घाटी में फिर दिखा पाकिस्तान का असली चेहरा
एनकाउंटर से एक बार फिर यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान अपनी पुरानी नीतियों से बाज नहीं आ रहा. कूटनीतिक मंचों पर शांति की बातें करने वाला इस्लामाबाद, जमीन पर आतंकवाद को हवा दे रहा है. पाकिस्तानी दवाइयों, राशन और हथियारों की बरामदगी इस बात का पुख्ता सबूत है कि पाक सेना और ISI अब भी घाटी को अस्थिर करने की कोशिशों में जुटे हैं.
स्थानीय जनता का भरोसा सेना के साथ
कुपवाड़ा और आसपास के इलाकों के लोगों ने सेना की इस कार्रवाई की सराहना की है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि आतंकियों की हर साजिश को नाकाम करने के लिए सेना का प्रयास उन्हें सुरक्षित महसूस कराता है.
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