अमेरिका के केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' ने घटाई ब्‍याज दर, भारतीय शेयर बाजार पर इसका क्‍या होगा असर?

अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती करते हुए फेडरल फंड्स रेट को अब 3.50% से 3.75% के दायरे में ला दिया है.

Americas central bank Federal Reserve reduced interest rates
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अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती करते हुए फेडरल फंड्स रेट को अब 3.50% से 3.75% के दायरे में ला दिया है. यह स्तर लगभग तीन साल में सबसे नीचे है. यह लगातार तीसरी बार है जब फेड ने दरों में कमी की है, जिससे इस साल कुल 0.75% की कटौती हो चुकी है.

हालांकि दरों में कटौती की उम्मीद पहले से थी, लेकिन विशेषज्ञ इसे “हॉकिश कट” कह रहे हैं, यानी कटौती तो हुई है, पर फेड का रुख अभी भी सख्त बना हुआ है. इसका संकेत यह है कि फेड निकट भविष्य में तेज़ी से दरें कम करने के मूड में नहीं है.

अमेरिकी अर्थव्यवस्था: ग्रोथ बढ़ी, पर महंगाई चिंता

फेड ने 2026 के लिए अमेरिका की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 2.3% कर दिया है, जो पहले के अनुमान से ज्यादा है. इसका मतलब है कि अमेरिकी आर्थिक गतिविधियाँ अभी भी मजबूत दिख रही हैं.

लेकिन महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है. फेड का मानना है कि मुद्रास्फीति कई सालों तक उसके 2% के लक्ष्य से ऊपर रह सकती है. सितंबर में यह 2.8% पर थी- जो पहले के मुकाबले कम है, लेकिन लक्ष्य से काफी ऊपर.

फेड फिर खरीदेगा ट्रेजरी बॉन्ड, बढ़ेगी लिक्विडिटी

फेड ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए ट्रेजरी सिक्योरिटीज की खरीद दोबारा शुरू करने का ऐलान किया है. बैंक जल्द ही 40 अरब डॉलर के ट्रेजरी बिल्स की खरीदारी शुरू करेगा. इससे अमेरिकी वित्तीय बाजार में तरलता बढ़ेगी और बैंकों के बीच अल्पकालिक उधारी को स्थिरता मिलेगी. इसे बाजार में संभावित तनाव को पहले से कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

वैश्विक बाजारों पर असर: अस्थिरता बढ़ने की आशंका

  • फेड की दर कटौती के बावजूद उनका कठोर रुख बाजारों को मिले-जुले संकेत देता है.
  • दरें घटी हैं, इसलिए अर्थव्यवस्था को समर्थन मिलने की उम्मीद है.
  • लेकिन आगे सीमित कटौती के संकेत और नीति को लेकर मतभेद बाजारों में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं.

टेक और ग्रोथ सेक्टर जैसे संवेदनशील समूहों पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बने रह सकते हैं. वहीं फेड द्वारा बॉन्ड खरीद शुरू करने से शॉर्ट-टर्म में लिक्विडिटी बेहतर हो सकती है, जिससे शुरुआती दौर में बाजारों में राहत दिखाई दे सकती है.

भारत पर क्या होगा असर?

1. FII का मूड बदल सकता है

  • फेड का सख्त टोन यह संकेत देता है कि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं.
  • ऐसे में विदेशी निवेशक (FII) अपनी पूंजी सुरक्षित अमेरिकी परिसंपत्तियों में लगाए रख सकते हैं.

इससे भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश प्रवाह धीमा पड़ सकता है.

2. भारतीय शेयर बाजार में हलचल बढ़ेगी

  • फेड के इस फैसले से भारतीय इक्विटी बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.
  • यदि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड आकर्षक बनी रहती हैं, तो कुछ विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से धन निकाल सकते हैं.

हालांकि भारत की मजबूत घरेलू मांग, स्थिर बैंकिंग व्यवस्था और बेहतर कॉर्पोरेट लाभ इसे अन्य उभरते देशों की तुलना में सुरक्षित विकल्प बनाते हैं.

3. रुपये की चाल प्रभावित होगी

  • यदि डॉलर मजबूत होता है, तो रुपये पर दबाव बनाया जा सकता है.
  • कमजोर रुपया आयात महंगा कर सकता है, जिससे घरेलू महंगाई पर असर पड़ेगा.

फेड के संकेतों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक जल्दबाजी में ब्याज दरों में कटौती करने से बचेगा. RBI अभी महंगाई और वैश्विक जोखिमों को प्राथमिकता दे रहा है. इसलिए संभावना है कि भारतीय केंद्रीय बैंक अपनी नीति को कुछ समय तक स्थिर रखेगा और वातावरण स्पष्ट होने का इंतजार करेगा.

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