बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या, कपड़ा फैक्ट्री में बजेंद्र बिसवास को शॉटगन से मारी गोली

Hindu Bajendra Biswas Killed: बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. मैमनसिंह जिले से सामने आई ताजा घटना में एक हिंदू नागरिक की हत्या की खबर ने हालात की गंभीरता को और उजागर कर दिया है. 

Another Hindu murdered in Bangladesh Bajendra Biswas shot with shotgun in textile factory
Image Source: Social Media

Hindu Bajendra Biswas Killed: बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. मैमनसिंह जिले से सामने आई ताजा घटना में एक हिंदू नागरिक की हत्या की खबर ने हालात की गंभीरता को और उजागर कर दिया है. 

पहले दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की मौतों के बाद अब 42 वर्षीय बजेंद्र बिसवास की हत्या ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना एक कपड़ा फैक्ट्री में हुई, जहां कथित तौर पर हिंसा के दौरान बजेंद्र बिसवास को गोली मार दी गई.

फैक्ट्री में कैसे बिगड़े हालात

बताया जा रहा है कि मैमनसिंह की एक कपड़ा फैक्ट्री में किसी बात को लेकर तनाव बढ़ गया, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया. इसी दौरान 22 वर्षीय नोमन मियां ने कथित तौर पर शॉटगन से फायर किया, जिससे बजेंद्र बिसवास की मौके पर ही मौत हो गई.

घटना के समय फैक्ट्री में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. पुलिस ने आरोपी नोमन मियां को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है. मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि बजेंद्र बिसवास अपने गांव की सुरक्षा से जुड़े एक पैरामिलिट्री समूह का हिस्सा थे.

मैमनसिंह में पहले भी हो चुकी है हिंसा

यह पहली बार नहीं है जब मैमनसिंह से ऐसी खबर सामने आई हो. इससे पहले इसी जिले की एक कपड़ा फैक्ट्री से दीपू चंद्र दास को भीड़ जबरन बाहर ले गई थी और बाद में उसकी मौत हो गई थी. 

उस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं पैदा की थीं और बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था को लेकर तीखी आलोचना हुई थी. इन घटनाओं के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि फैक्ट्रियों जैसे कार्यस्थलों में भी हिंसा क्यों बढ़ रही है और सुरक्षा इंतजाम इतने कमजोर क्यों साबित हो रहे हैं.

अमृत मंडल की हत्या और सरकार का रुख

दीपू चंद्र दास के बाद अमृत मंडल की हत्या ने हालात को और संवेदनशील बना दिया था. अमृत को कथित तौर पर भीड़ ने बाजार में मार डाला था. इस मामले में बांग्लादेश सरकार की ओर से बयान आया था कि यह सांप्रदायिक हिंसा नहीं थी, बल्कि उगाही से परेशान लोगों की प्रतिक्रिया थी. आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयानों से सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की और जमीनी हालात को स्वीकार नहीं किया.

एक के बाद एक घटनाएं, सवाल वही

अब बजेंद्र बिसवास की हत्या के बाद फिर वही सवाल सामने हैं. लगातार सामने आ रही इन घटनाओं में पीड़ितों का एक ही समुदाय से होना कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रहा है. इस बार सरकार और प्रशासन की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं.

फिलहाल इतना साफ है कि बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है और बार-बार हो रही हिंसक घटनाएं प्रशासन की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं.

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