आर्मेनिया ने दिया भारत को धोखा! पाकिस्तान से मिलाया हाथ; पिनाका से लेकर तोप तक की हुई डील

दक्षिण एशियाई कूटनीति में एक अहम मोड़ आता दिख रहा है. पाकिस्तान, जिसने अब तक आर्मेनिया को एक देश के रूप में मान्यता नहीं दी थी, अब उसके साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.

Armenia is dealing with pakistan after turkey buys pinaka rocket
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दक्षिण एशियाई कूटनीति में एक अहम मोड़ आता दिख रहा है. पाकिस्तान, जिसने अब तक आर्मेनिया को एक देश के रूप में मान्यता नहीं दी थी, अब उसके साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा सहयोग चरम पर है और दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत कर रहे हैं.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में आर्मेनिया के विदेश मंत्री अररात मिरजोयान से फोन पर बातचीत की. इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और बहुपक्षीय मंचों पर साथ मिलकर काम करने की संभावनाओं पर चर्चा की. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बातचीत के बाद इस्लामाबाद और येरेवान के बीच राजनयिक संबंध स्थापित करने पर सहमति बनी है. इशाक डार ने अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत किया और इसे क्षेत्रीय शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया.

तुरंत बदला रुख, बदली रणनीति

अब तक पाकिस्तान अजरबैजान के पक्ष में खुलकर खड़ा था और तुर्की के साथ मिलकर उसे सैन्य समर्थन भी देता रहा है. नगर्नो-कराबाख संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने अजरबैजान को हथियार और तकनीकी सहायता मुहैया कराई थी. लेकिन अब वही पाकिस्तान आर्मेनिया से नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. इस कूटनीतिक बदलाव की एक बड़ी वजह तुर्की भी माना जा रहा है, जिसने हाल के वर्षों में आर्मेनिया के साथ अपने रिश्तों में सुधार लाने की दिशा में पहल की है. पाकिस्तान इस समय तुर्की की विदेश नीति से गहराई से प्रभावित है.

भारत-आर्मेनिया रक्षा साझेदारी पर असर?

भारत और आर्मेनिया के बीच हाल के वर्षों में रक्षा क्षेत्र में व्यापक सहयोग देखने को मिला है. भारत ने आर्मेनिया को रडार सिस्टम, पिनाका रॉकेट लॉन्चर और आधुनिक तोपखाने सहित कई हथियार सिस्टम्स की आपूर्ति की है. आर्मेनिया आज भारत से हथियार खरीदने वाले प्रमुख देशों में से एक बन चुका है. ऐसे में पाकिस्तान का यह नया रुख भारत के लिए एक रणनीतिक चुनौती बन सकता है. यदि आर्मेनिया पर पाकिस्तानी प्रभाव बढ़ता है, तो यह नई दिल्ली की कूटनीतिक योजना में बड़ा बदलाव ला सकता है.

भूराजनीति में एक और मोड़: मिडिल कॉरिडोर तक पहुंच की तैयारी

एक और दिलचस्प पहलू यह है कि अगर पाकिस्तान और आर्मेनिया के बीच राजनयिक रिश्ते बनते हैं, तो पाकिस्तान को मिडिल कॉरिडोर के ज़रिए यूरोप तक सीधी पहुंच मिल सकती है. यह वही मार्ग है जो भारत भी मध्य एशिया और यूरोप के व्यापार के लिए इस्तेमाल करता है. इस कॉरिडोर से पाकिस्तान को यूरोपीय बाजारों तक कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे उसका भूराजनीतिक कद बढ़ सकता है. वहीं, अमेरिका द्वारा मध्य एशिया में सक्रियता बढ़ाने से ईरान और रूस की असहजता बढ़ी है — ऐसे में भारत को ईरान के साथ मिलकर अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार करने की आवश्यकता होगी.

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