दिल्ली पहुंची इथियोपिया के 'हेली गुब्बी' ज्वालामुखी की राख, कई उड़ानें रद्द, DGCA की एडवाइजरी जारी

इथियोपिया में स्थित हेली गुब्बी (Hayli Gubbi) ज्वालामुखी के धमाके के बाद उठा भारी राख का गुबार सोमवार देर रात पहली बार दिल्ली–NCR के आसमान तक पहुंच गया.

Ashes of Ethiopias Haile Gubbi volcano reach Delhi
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इथियोपिया में स्थित हेली गुब्बी (Hayli Gubbi) ज्वालामुखी के धमाके के बाद उठा भारी राख का गुबार सोमवार देर रात पहली बार दिल्ली–NCR के आसमान तक पहुंच गया. मौसम एजेंसियों और सैटेलाइट मॉनिटरिंग संस्थानों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि राख के कण बेहद ऊंचाई वाले वायुमंडलीय स्तरों पर 130 किमी प्रति घंटे की तेज रफ्तार से उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ रहे थे.

यह घटना इसलिए भी खास है क्योंकि यह ज्वालामुखी लगभग 10,000 वर्षों बाद पहली बार सक्रिय हुआ है. रविवार, 23 नवंबर को हुए विस्फोट ने वातावरण में सल्फर डाइऑक्साइड और राख की मोटी परत छोड़ दी, जिसकी वजह से पूर्वी अफ्रीका से लेकर अरब सागर और भारत तक आसमान में व्यापक असर देखा जा रहा है.

राख का गुबार पहले राजस्थान से भारत में दाखिल

मौसम विश्लेषकों के अनुसार राख की यह लहर सबसे पहले भारत के पश्चिमी हिस्से- विशेष रूप से जोधपुर और जैसलमेर के ऊपर वायु क्षेत्र में दिखाई दी. बाद में यह तेज गति से उत्तर-पूर्व दिशा में आगे बढ़ी.

इसे ट्रैक करने वाले मॉडलों ने बताया कि गुबार 25,000 से 45,000 फीट की ऊंचाई पर है, यानी यह आम तौर पर सतह पर सांस लेने योग्य हवा वाले स्तरों से बहुत ऊपर मौजूद है. इसी कारण जमीन पर रहने वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा नहीं माना जा रहा, हालांकि हल्के कणों के गिरने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है.

देर शाम तक यह राख राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के कुछ हिस्सों के ऊपर फैल चुकी थी. अनुमान है कि इसका एक हिस्सा गुजरात के वायुमंडल में भी प्रवेश करेगा.

अगले कुछ घंटों में आसमान का रंग बदल सकता है

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि राख की मौजूदगी के चलते सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आसमान का रंग सामान्य से अलग दिखाई दे सकता है. प्रकाश के बिखरने (स्कैटरिंग) के कारण लालिमा, बैंगनी या हल्के नारंगी रंग अधिक स्पष्ट दिख सकते हैं.

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि हवा में मौजूद इस राख की परत के कारण रात के तापमान और न्यूनतम तापमान में हल्की वृद्धि संभव है. हालांकि, वायु गुणवत्ता पर इसका कितना असर होगा, इसका फिलहाल स्पष्ट अनुमान नहीं लगाया जा सका है क्योंकि अधिकांश राख ऊंचाई पर ही सीमित है.

विमानों के लिए DGCA की सख्त एडवाइजरी

ज्वालामुखी की राख उड़ानों के लिए अत्यंत खतरनाक मानी जाती है. यह इंजन के अंदर जाकर ब्लॉकेज, तापमान बढ़ने, और पायलट के उपकरणों की रीडिंग को प्रभावित कर सकती है. इसी वजह से:

  • DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने सभी भारतीय एयरलाइंस को तत्काल एडवाइजरी जारी की.
  • एयरलाइंस को सुझाव दिया गया कि वे उड़ान मार्ग (रूटिंग) और ईंधन योजना (फ्यूल प्लानिंग) में बदलाव करें.
  • पायलटों को राख प्रभावित क्षेत्रों के ऊपर उड़ान भरने से बचने के लिए कहा गया.
  • NOTAMs, ASHTAMs और मौसम अपडेट पर एयरलाइन डिस्पैच टीमों को लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए.

पायलटों से कहा गया कि इंजन के असामान्य व्यवहार या केबिन में किसी अजीब गंध की तुरंत रिपोर्ट दें.

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