तेजस से लेकर SU-30MKI तक... बढ़ जाएगी फाइटर जेट की ताकत, Astra MK-III मिसाइल को किया जाएगा इंटीग्रेट

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने अपनी सैन्य क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया था.

Astra MK-III missile will be integrated in Tejas and SU-30MKI
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Astra MK-III: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने अपनी सैन्य क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया था. इस अभियान के दौरान कुछ ऐसी चुनौतियां भी सामने आईं, जिन पर अब पूरी गंभीरता के साथ काम किया जा रहा है. इनका उद्देश्य न सिर्फ कमियों को दूर करना है, बल्कि देश के डिफेंस सिस्टम को तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत व ताकतवर बनाना भी है. इसी रणनीति के तहत एयर वॉरफेयर को नई धार देने के लिए कई आधुनिक मिसाइल प्रणालियों का विकास किया जा रहा है.

इन्हीं अत्याधुनिक हथियारों में से एक है Astra MK-III, जिसे बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) एयर-टू-एयर मिसाइल के तौर पर विकसित किया जा रहा है. यह मिसाइल हवा से हवा में करीब 350 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होगी. लंबी रेंज और अत्यधिक गति के कारण इसे भविष्य की हवाई लड़ाइयों के लिए बेहद घातक हथियार माना जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Astra MK-III का फुल-स्केल प्रोडक्शन वर्ष 2029 से शुरू हो सकता है, जिसके बाद इसे भारतीय वायुसेना में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

तेजस और SU-30MKI में होगा इंटीग्रेशन

Astra MK-III को भारत के प्रमुख लड़ाकू विमानों के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा. इसमें स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस और भारतीय वायुसेना की रीढ़ माने जाने वाले SU-30MKI फाइटर जेट शामिल हैं. इसके शामिल होने से इन विमानों की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. रक्षा विशेषज्ञ इसे चीन की PL-15 मिसाइल का सीधा जवाब मान रहे हैं, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया था.

Astra MK-III का नया नाम: ‘गांडीव’

भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को और मजबूती देने की दिशा में Astra MK-III को आधिकारिक तौर पर ‘गांडीव’ नाम दिया गया है. यह नाम महाभारत के महान योद्धा अर्जुन के दिव्य धनुष गांडीव से प्रेरित है, जिसे अचूक निशाने और अपार शक्ति का प्रतीक माना जाता है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की जा रही यह मिसाइल फिलहाल परीक्षण के चरण में है, लेकिन इसके तकनीकी फीचर्स इसे भविष्य की हवाई लड़ाइयों का गेम-चेंजर बना सकते हैं.

350 किमी तक दुश्मन पर सटीक वार की क्षमता

आधुनिक युद्ध में अब सामने दिख रहे लक्ष्य ही नहीं, बल्कि आंखों से दिखाई न देने वाली दूरी पर मौजूद दुश्मन भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए गांडीव को डिजाइन किया गया है. यह मिसाइल करीब 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद लक्ष्य को 340 से 350 किलोमीटर की दूरी से मार गिराने में सक्षम होगी. वहीं, अगर लक्ष्य 8 किलोमीटर की ऊंचाई पर हो, तब भी इसकी प्रभावी रेंज लगभग 190 किलोमीटर तक रहेगी. इतनी लंबी दूरी भारत को किसी भी संभावित संघर्ष में रणनीतिक बढ़त दिला सकती है.

दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइलों को देगी चुनौती

फिलहाल भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमानों में फ्रांस की मेटियोर मिसाइल तैनात है, जिसकी अधिकतम रेंज लगभग 200 किलोमीटर मानी जाती है. गांडीव इस रेंज से कहीं आगे निकलती दिखाई दे रही है. वैश्विक स्तर पर तुलना करें तो इसकी मारक क्षमता चीन की PL-15 (करीब 300 किमी) और अमेरिका की AIM-174 BVRAAM (लगभग 240 किमी) से भी अधिक होगी. इसके सेवा में आने के बाद भारत के पास दुनिया की सबसे लंबी दूरी की BVR एयर-टू-एयर मिसाइलों में से एक होगी.

अत्याधुनिक तकनीक से लैस मिसाइल

गांडीव मिसाइल में ड्यूल-फ्यूल डक्टेड रैमजेट इंजन का इस्तेमाल किया गया है. यह तकनीक मिसाइल को समुद्र तल से लेकर 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक किसी भी स्तर से लॉन्च करने में सक्षम बनाती है. यह दुश्मन के फाइटर जेट, बमवर्षक विमान, सैन्य ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, ईंधन भरने वाले टैंकर और AWACS जैसे अहम हवाई प्लेटफॉर्म को भी निशाना बना सकती है.

मिसाइल की लॉन्च स्पीड 0.8 से 2.2 मैक के बीच होगी, जबकि लक्ष्य को यह 2.0 से 3.6 मैक की रफ्तार से भेद सकती है. इसकी खासियत यह भी है कि यह अत्यधिक फुर्तीले और तेज मोड़ लेने वाले लड़ाकू विमानों को 20 डिग्री तक के एंगल ऑफ अटैक पर भी निशाना बना सकती है. इसके साथ ही ±10 किलोमीटर की स्नैप-अप और स्नैप-डाउन क्षमता इसे अपने से ऊंचे या नीचे उड़ रहे लक्ष्यों पर भी प्रभावी बनाती है.

परीक्षणों में दिखाई मजबूती

अब तक गांडीव मिसाइल के कई अहम ग्राउंड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं. इनमें बूस्टर टेस्ट, नोज़ल-लेस बूस्टर टेस्ट और सेपरेशन मैकेनिज्म से जुड़े परीक्षण शामिल हैं. फ्लाइट टेस्ट FT-01 और FT-02 के दौरान भी इसके सिस्टम्स ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया है. अगला महत्वपूर्ण चरण इसे भारतीय वायुसेना के किसी लड़ाकू विमान—जैसे SU-30MKI या तेजस—से दागकर परीक्षण करना होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मिसाइल और विमान के सिस्टम्स पूरी तरह तालमेल के साथ काम करते हैं.

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई ताकत

गांडीव मिसाइल न केवल भारत की सैन्य शक्ति को मजबूत करती है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी नई ऊर्जा देती है. भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात लगातार तेजी से बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2023-24 में देश का रक्षा निर्यात 21,083 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 32.5 प्रतिशत अधिक है. पिछले दस वर्षों में रक्षा निर्यात में करीब 31 गुना वृद्धि दर्ज की गई है.

इस निर्यात में लगभग 60 प्रतिशत योगदान निजी क्षेत्र का है, जबकि 40 प्रतिशत हिस्सा रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSU) से आया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही भरोसा जता चुके हैं कि भारत वर्ष 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात लक्ष्य को हासिल कर लेगा.

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