Ayodhya Deepotsav World Records: जहाँ आस्था जलती है, वहाँ इतिहास लिखा जाता है. 2025 की दीपावली पर प्रभु श्रीराम की पावन जन्मभूमि अयोध्या ने न सिर्फ दीप जलाए, बल्कि पूरे संसार के सामने यह संदेश भी जला दिया कि जब श्रद्धा और संकल्प मिलते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है.
सरयू के किनारे जैसे ही शाम ने दस्तक दी, राम की पैड़ी से लेकर घाटों की सीढ़ियों तक, लाखों दीपकों की रौशनी ने अंधकार को पराजित कर दिया. और उसी रौशनी में इतिहास की एक और पंक्ति सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई, 26,17,215 दीपकों के साथ एक साथ दीप जलाने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड.
#WATCH | Ayodhya, Uttar Pradesh: CM Yogi Adityanath receives the certificates of 2 new Guinness World Records created during the #Deepotsav celebrations in Ayodhya
— ANI (@ANI) October 19, 2025
Guinness World Record created for the most people performing 'diya' rotation simultaneously, and the largest… pic.twitter.com/cWREYepuwP
दीपों में समाया आस्था का प्रकाश, बना विश्व रिकॉर्ड
अयोध्या ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक संस्कृति है. दीपोत्सव 2025 के अवसर पर सरयू घाट पर हुए इस ऐतिहासिक आयोजन ने दुनियाभर का ध्यान खींचा. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की आधिकारिक टीम ने मौके पर मौजूद रहकर इस उपलब्धि की पुष्टि की और दो नए रिकॉर्ड प्रमाणित किए.
जैसे-जैसे दीप जले, जाग उठा अयोध्या का आत्मा
संध्या होते ही जैसे ही पहला दीप प्रज्वलित हुआ, उसी क्षण अयोध्या की आत्मा जाग उठी. घाटों पर, गलियों में, मंदिरों के आंगन में और घरों की छतों पर दीपों की कतारें एक नई चेतना का प्रतीक बन गईं. ऐसा लगा मानो पूरी अयोध्या प्रभु श्रीराम के स्वागत के लिए फिर से सज गई हो. हर दीप, एक कहानी कह रहा था, राम के आदर्शों की, सीता की मर्यादा की, लक्ष्मण के त्याग की, और हनुमान की भक्ति की.
"यह दीप श्रद्धा और संस्कृति के प्रतीक"
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव की इस सफलता को अयोध्यावासियों की आस्था और उत्तर प्रदेश प्रशासन की समर्पित कार्यशैली का परिणाम बताया. उन्होंने कहा, “ये दीप केवल तेल और बाती से नहीं जले, ये दीप हमारी आस्था, एकता और सनातन संस्कृति के प्रतीक हैं. यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को हमारे गौरवशाली अतीत से जोड़ने का माध्यम है.” उन्होंने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रमाण पत्र को जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह उपलब्धि हर भारतीय की है.
अयोध्या बनी वैश्विक आध्यात्मिक धरोहर
इस आयोजन को देखने के लिए देश भर से ही नहीं, बल्कि अमेरिका, कनाडा, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी हजारों पर्यटक अयोध्या पहुंचे. अयोध्या अब सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र बनती जा रही है.
सज-धज कर खिली रामनगरी, त्रेतायुग की झलक फिर से जीवंत
अयोध्या के हर कोने को दीपों से सजाया गया था. रंग-बिरंगी रंगोलियां, फूलों की मालाएं, और मंत्रों की ध्वनियों से पूरा नगर गूंज उठा. राम की पैड़ी पर कलाकारों ने श्रीराम के जीवन पर आधारित झांकियों से दिव्यता और इतिहास को एक साथ जीवंत कर दिया. ऐसा प्रतीत हुआ मानो त्रेता युग लौट आया हो, जब रामचंद्र जी चौदह वर्ष बाद अयोध्या लौटे थे और नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था.