रामपुर: समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम को शुक्रवार को दो पासपोर्ट रखने के मामले में सात साल की सजा और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है. कोर्ट का यह फैसला आजम खां और उनके परिवार के लिए एक और मुश्किल का कारण बन गया है. यह मामला पहले से ही चर्चा में था और अब्दुल्ला आजम को इससे जुड़ी सजा मिलना उनके राजनीतिक जीवन में एक और विवादित मोड़ है.
अब्दुल्ला आजम पर बढ़ते आरोप और सजा
अब्दुल्ला आजम अकेले ही इस मामले में आरोपित हैं. इससे पहले, दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में आजम खां, उनकी पत्नी और अब्दुल्ला को सजा मिल चुकी है. इसके अलावा, दो पैन कार्ड मामले में भी आजम खां और अब्दुल्ला को सजा हुई थी. इन मामलों के कारण अब्दुल्ला और उनके पिता दोनों ही जेल में बंद हैं. यह सजा उनके खिलाफ दर्ज कई मुकदमों की लंबी श्रृंखला में एक और अहम कड़ी है.
राजनीतिक करियर की शुरुआत और विवादों का दौर
अब्दुल्ला आजम का राजनीतिक जीवन शुरू होते ही विवादों से घिर गया. वह समाजवादी पार्टी से दो बार विधायक बने, लेकिन दोनों बार उनकी विधायकी चली गई. 2017 में राजनीति में कदम रखने के बाद से वह सत्ता का सुख ज्यादा समय तक नहीं ले पाए. उनकी राजनीति में आना और फिर विवादों में घिरना, यह दोनों चीजें एक साथ हुईं.
जेल की सजा और बढ़ते मुकदमे
अब्दुल्ला आजम को दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में 17 महीने तक जेल में रहना पड़ा. जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद, नवंबर 17 को दो पैन कार्ड मामले में उन्हें सजा सुनाई गई. अब वह फिर से अपने पिता के साथ जेल में बंद हैं. उनके खिलाफ मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. सपा सरकार जाने के बाद, 2019 में जिले में उनके खिलाफ 42 नए मुकदमे दर्ज किए गए, और पुराने मुकदमे भी फिर से खोले गए. इन मुकदमों में एक मुरादाबाद के थाना छजलैट में 2008 में दर्ज हुआ था.
मुकदमों की लंबी सूची और न्यायालय में चल रही प्रक्रिया
वर्तमान में, अब्दुल्ला आजम के खिलाफ 41 मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन हैं, जिनमें दो पासपोर्ट का मामला भी शामिल है. शुक्रवार को इसी मामले में फैसला सुनाया गया. इस सजा के बाद अब्दुल्ला आजम के खिलाफ चल रहे मुकदमों की लंबी फेहरिस्त को लेकर उनके राजनीतिक करियर की दिशा पर सवाल उठने लगे हैं.
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