पाक से अजरबैजान की यारी, JF-17 खरीदने की हो रही तैयारी; आर्मेनिया की भारत के Su-30 MKI पर नजर

काकेशस क्षेत्र में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण होते जा रहे हैं. आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच पुराना दुश्मनी भरा रिश्ता अब आधुनिक लड़ाकू विमानों की होड़ में बदलता दिख रहा है. हाल ही में पाकिस्तान और अजरबैजान के बीच हुए 4.6 अरब डॉलर के रक्षा सौदे के तहत 40 JF-17 थंडर विमान मिलने वाले हैं.

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काकेशस क्षेत्र में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण होते जा रहे हैं. आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच पुराना दुश्मनी भरा रिश्ता अब आधुनिक लड़ाकू विमानों की होड़ में बदलता दिख रहा है. हाल ही में पाकिस्तान और अजरबैजान के बीच हुए 4.6 अरब डॉलर के रक्षा सौदे के तहत 40 JF-17 थंडर विमान मिलने वाले हैं, जबकि इसके जवाब में आर्मेनिया ने भारत से Su-30MKI खरीदने की तैयारी तेज कर दी है. यह वही विमान है जिसे भारतीय वायुसेना रूस से लाइसेंस प्राप्त कर स्वदेश में तैयार करती है और जिसे ब्रह्मोस मिसाइल जैसे घातक हथियारों से लैस किया जा सकता है.

पाकिस्तान से मिलने वाले JF-17 थंडर एकल इंजन वाले बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान हैं, जिन्हें पाकिस्तान और चीन ने मिलकर बनाया है. इन विमानों के शामिल होने से अजरबैजान की वायुसेना को नई ताकत मिलेगी. JF-17 के आगमन से उसके हवाई हमले की क्षमता और रक्षात्मक शक्ति दोनों में इज़ाफा होगा.

आर्मेनिया की रणनीति

दूसरी ओर, आर्मेनिया के पास फिलहाल सीमित संख्या में Su-25 फ्रॉगफुट जैसे पुराने विमान हैं. रूस से नए जेट न मिल पाने की स्थिति में उसने भारत की ओर रुख किया है. चर्चा है कि आर्मेनिया भारत से 8 से 12 Su-30MKI लड़ाकू विमान खरीदने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. भारत न सिर्फ इन विमानों का निर्माण करता है बल्कि इनके रखरखाव और अपग्रेड की पूरी सुविधा भी दे सकता है.

Su-30MKI की बढ़त

Su-30MKI एक दोहरे इंजन वाला भारी लड़ाकू विमान है, जो JF-17 की तुलना में बेहतर गति, चढ़ाई क्षमता और पेलोड वहन करने की क्षमता रखता है. इसका अधिकतम टेकऑफ भार 38,800 किलोग्राम है, जबकि JF-17 की सीमा 13,500 किलोग्राम है. ब्रह्मोस मिसाइल के साथ इसकी मारक क्षमता और बढ़ जाती है. इसके अलावा इसमें एंटी-रेडिएशन मिसाइल, स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार, AESA रडार और हाई-बैंड जैमर जैसे आधुनिक उपकरण जोड़े जा सकते हैं.

तनाव का कारण
 
आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच 2020, 2022 और 2023 में तीन बड़े युद्ध हो चुके हैं. नागोर्नो-काराबाख और जांगेजुर गलियारे को लेकर विवाद अब भी सुलझा नहीं है. यही कारण है कि दोनों देश अपने-अपने हथियारों के जखीरे में इज़ाफा कर रहे हैं, ताकि किसी भी संभावित संघर्ष में बढ़त हासिल की जा सके.

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