GBU-57 बम के साथ B-2 जेट उड़ा, फिर मिट्टी में मिला फोर्डो; ट्रंप ने 'दो हफ्ते' बोलकर दुनिया को कैसे किया गुमराह?

जहां बम गिरे हैं, वहां अब सवाल गूंज रहे हैं – क्या ईरान अब अमेरिका पर पलटवार करेगा? और अगर हां, तो कैसे?

B-2 jet GBU-57 bomb Fordow Trump
डोनाल्ड ट्रंप | Photo: ANI

मध्य-पूर्व एक बार फिर युद्ध की लपटों में घिर गया है. 12-13 जून की रात जब दुनिया नींद में थी, तब इज़रायल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर अचानक हमला बोल दिया. इस हमले ने सिर्फ ईरान को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया. शुरुआत में अमेरिका ने खुद को इस कार्रवाई से अलग बताया, लेकिन इज़रायल ने साफ कहा कि उसे ट्रंप प्रशासन की पूरी जानकारी और समर्थन था.

कुछ ही देर में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया—"हम ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने दे सकते. उन्हें 60 दिन दिए गए थे, बातचीत के लिए कोई नहीं आया. इज़रायल का हमला उत्कृष्ट है, लेकिन अमेरिका युद्ध में सीधे शामिल नहीं होना चाहता."

GBU-57 बंकर बस्टर बमों की ज़रूरत थी

हालांकि यह स्थिति ज्यादा देर तक नहीं टिकी. जैसे-जैसे ईरान और इज़रायल के बीच हमलों का सिलसिला तेज़ हुआ, यह स्पष्ट हो गया कि इज़रायल के पास उन गहराई में छिपे ईरानी परमाणु ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता नहीं है, जो ज़मीन से 90 फुट नीचे मौजूद हैं—जैसे फोर्डो, नतांज और इस्फहां. इन ठिकानों को तबाह करने के लिए GBU-57 बंकर बस्टर बमों की ज़रूरत थी, जो सिर्फ अमेरिका के पास हैं.

इसके बाद ट्रंप ने संकेत दिया कि दो हफ्तों में फैसला होगा कि अमेरिका जंग में उतरेगा या नहीं. लेकिन फैसले से पहले ही अमेरिका की ओर से निर्णायक कदम उठाया गया—अमेरिकी एयरबेस से B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स रवाना हो गए. और फिर एक चौंकाने वाला ट्वीट आया—ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी जंगी विमान ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहां में मौजूद परमाणु ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर चुके हैं.

रात 2:30 बजे हमले शुरू हुए

ईरान के समय अनुसार रात 2:30 बजे हमले शुरू हुए. ट्रंप ने कहा कि सभी हमले सफल रहे और फाइटर जेट्स सुरक्षित वापस लौट आए. इज़रायल ने भी पुष्टि की कि यह एक साझा अभियान था. अब डोनाल्ड ट्रंप भारत के समय अनुसार सुबह 7:30 बजे अमेरिकी जनता को संबोधित करने वाले हैं. उन्होंने अपने ट्वीट में "अब शांति की ओर बढ़ते हैं" ऐसा संदेश दिया है—वो भी मोटे कैपिटल अक्षरों में.

वहीं दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने फिर स्पष्ट किया है—"फलस्तीन ही संघर्ष का केंद्र है और उसकी जीत ही अंतिम लक्ष्य है." राष्ट्रपति महमूद पेजश्किया ने साफ किया है कि ईरान किसी भी हालत में यूरेनियम संवर्धन बंद नहीं करेगा. उन्होंने दोहराया कि परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहेगा और जारी रहेगा.

रूस से मिला एस-300, निष्क्रिय?

इस बीच, जैसे ही अमेरिकी विमान ईरानी हवाई सीमा से बाहर निकले, ईरान ने इज़रायल पर पलटवार शुरू कर दिया. इज़रायल की एयर डिफेंस प्रणाली पूरी तरह सक्रिय है, लेकिन अब दोनों देशों के हथियार सीमित हो रहे हैं. इज़रायल की ओर से एक ट्वीट में दावा किया गया है कि तेहरान के पास स्थित ईरानी एयरबेस पर हमला किया गया, जिसमें F-14 लड़ाकू विमान को नष्ट करने की फुटेज भी साझा की गई है. फिलहाल जंग निर्णायक मोड़ पर है. ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम, खासकर रूस से मिला एस-300, निष्क्रिय दिख रहा है. और यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि अमेरिका का यह हमला ईरान को रोकने में कामयाब रहेगा या नहीं. लेकिन इतना तय है—अब हालात तेजी से किसी बड़े निर्णय की ओर बढ़ रहे हैं.

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