रूस के माथे का सिरदर्द बना ये बेबी ड्रोन, यूक्रेन इसकी मदद से युद्धपोतों को बना रहा निशाना; जानें खासियत

Sea Baby Drones: शनिवार सुबह ब्लैक सी में रूसी शैडो फ्लीट के ऑयल टैंकर पर हुए हमले ने वैश्विक ध्यान एक बार फिर नेवल ड्रोन की तरफ खींच दिया. यह हमला तुर्की तट के पास हुआ और इसकी जिम्मेदारी यूक्रेन ने खुद स्वीकार की. 

baby drone has become a headache for Russia Ukraine is targeting warships with its help
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Sea Baby Drones: शनिवार सुबह ब्लैक सी में रूसी शैडो फ्लीट के ऑयल टैंकर पर हुए हमले ने वैश्विक ध्यान एक बार फिर नेवल ड्रोन की तरफ खींच दिया. यह हमला तुर्की तट के पास हुआ और इसकी जिम्मेदारी यूक्रेन ने खुद स्वीकार की. 

यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि उनके मॉडर्नाइज्ड सी बेबी ड्रोन ने टैंकरों को सीधे निशाना बनाया. यह घटना केवल एक सैन्य घटना नहीं है, बल्कि आधुनिक समुद्री युद्ध की बदलती तस्वीर को दर्शाती है, जिसमें छोटे, तेज और स्मार्ट ड्रोन अब बड़े युद्धपोतों को चुनौती देने लगे हैं.

हमला और क्रू की प्रतिक्रिया

तुर्की के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, ‘विराट’ नाम का टैंकर शुक्रवार को पहले ही एक ड्रोन हमले का शिकार हुआ था. इसके अगले दिन यानी शनिवार सुबह फिर से इसे सी बेबी ड्रोन द्वारा निशाना बनाया गया. इस हमले के दौरान टैंकर के क्रू ने रेडियो पर मदद के लिए आवाज़ लगाई और आपातकालीन संदेश भेजा, जिसमें उन्होंने बताया कि ड्रोन हमला हो गया और स्थिति गंभीर है.

यूक्रेन की एसबीयू (SBU) ने इस हमले का वीडियो भी जारी किया, जिसमें समुद्र की सतह पर ड्रोन को टैंकर की ओर बढ़ते और अंतिम सेकंड में धमाका करते हुए देखा जा सकता है. यह स्पष्ट संकेत है कि सी बेबी ड्रोन ने जहाज को सीधे निशाना बनाया.

सी बेबी ड्रोन: डिजाइन और क्षमताएं

सी बेबी ड्रोन विशेष रूप से सुसाइड नेवल मिशन के लिए विकसित किए गए हैं. ये समुद्र की सतह के बहुत करीब तेज़ी से चलते हैं और लक्ष्य से टकराकर विस्फोट करते हैं. इनका आकार छोटा है, लेकिन मारक क्षमता बहुत अधिक है. विशेषज्ञों के अनुसार, सी बेबी ड्रोन कई विशेषताओं के कारण आधुनिक नौसैनिक युद्ध में बदलाव ला रहे हैं.

ये ड्रोन लगभग 800–900 किलोमीटर की दूरी तय कर सकते हैं और 70–90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकते हैं. हर ड्रोन 300–450 किलो टीएनटी के बराबर विस्फोटक ले जाने में सक्षम होता है. इन्हें रियल-टाइम में सैटेलाइट और AI तकनीक की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे यह लगभग राडार के लिए अदृश्य रहते हैं. इसके अलावा, ये ड्रोन आत्मघाती हमले के साथ-साथ माइन डिलीवरी और रीकॉनिसेंस जैसी भूमिकाओं में भी काम कर सकते हैं.

छोटे आकार और कम लागत के कारण सी बेबी ड्रोन को जल्दी असेंबल किया जा सकता है और बड़े जहाजों की तुलना में लॉजिस्टिक खर्च बहुत कम होता है. यह सभी कारक उन्हें रूस जैसे शक्तिशाली बेड़े के लिए गंभीर खतरा बनाते हैं.

समुद्री युद्ध में सी बेबी का प्रभाव

पिछले दो वर्षों में सी बेबी ड्रोन ने अपनी ताकत कई बार साबित की है. इन ड्रोन ने क्रीमिया ब्रिज पर हमले किए, रूसी जहाज Sergey Kotov को निशाना बनाया, ब्लैक सी फ्लीट के पेट्रोलिंग जहाजों को प्रभावित किया और हाल ही में शैडो फ्लीट के टैंकरों पर हमला किया. इन हमलों ने रूसी समुद्री इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रतिबंधित तेल परिवहन नेटवर्क पर गंभीर दबाव डाला है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में नौसेना युद्ध में बड़े युद्धपोतों की तुलना में छोटे, तेज, छिपकर काम करने वाले ड्रोन ज्यादा निर्णायक होंगे. कम लागत, हाई डैमेज क्षमता और मानवीय जोखिम की कमी जैसे फायदे उन्हें नौसेना रणनीति का केंद्र बना देते हैं.

सी बेबी ड्रोन और भविष्य की नौसेना

विशेषज्ञों के अनुसार, सी बेबी ड्रोन केवल यूक्रेन का हथियार नहीं हैं. ये आने वाले दशक की नौसैनिक रणनीति का नया केंद्र बनते दिख रहे हैं. इनकी मदद से बड़े जहाजों पर निर्भरता कम होती है और दुश्मन की नौसेना पर प्रभावी हमला किया जा सकता है. छोटे आकार, तेज गति, राडार छुपने की क्षमता और सटीक आत्मघाती मिशन इन्हें आधुनिक युद्ध का अत्यंत प्रभावी साधन बनाते हैं.

ब्लैक सी में हालिया हमला इस बात का संकेत है कि भविष्य में समुद्री युद्ध में बड़े युद्धपोतों की जगह स्मार्ट, तेज और छिपकर काम करने वाले ड्रोन ही निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. यह स्पष्ट कर देता है कि समुद्री युद्ध की परिभाषा बदल रही है और छोटे ड्रोन अब बड़े जहाजों के मुकाबले अधिक खतरनाक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं.

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