बरेली में हुई हिंसा की घटनाओं को अब लगभग चार दिन हो गए हैं. इस दौरान पुलिस ने लगातार सघन कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में गिरफ्तारियाँ की हैं और हिंसा की योजना से जुड़े कई खुलासे किए हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि यह हिंसा किसी आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि बड़े स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से तैयार की गई थी. इस बीच, मौलाना तौकीर रज़ा और नदीम नाम के दो व्यक्तियों को मुख्य साजिशकर्ताओं के रूप में हिरासत में लिया गया है. कहा जाता है कि नदीम ने व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से लोगों को बरेली बुलाने का काम किया था.
गिरफ्तारी, एफआईआर और दुकानें सील
बहुस्तरीय योजना का खुलासा
पुलिस और जांच एजेंसियों ने यह दावा किया है कि इस हिंसा की तैयारी पहले से की गई थी. खासकर निम्न बिंदु मुख्य हैं:
नदीम के व्हाट्सएप कॉल्स: कहा जा रहा है कि नदीम ने लोगों को व्हाट्सएप कॉल्स भेजकर बरेली बुलाया था, जिससे बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए.
फर्जी हस्ताक्षर का मामला: जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आईएमसी की ओर से जारी एक पत्र पर नदीम, डॉक्टर नफीस और लियाकत खान के हस्ताक्षर थे. लेकिन दस्तावेज की पड़ताल में यह पाया गया कि लियाकत खान का हस्ताक्षर असल में नदीम ने नकली तरीके से तैयार किया था. इस मामले में नदीम के खिलाफ कार्रवाई की संभावना बताई जा रही है.
वायरलेस सेट की चोरी: पुलिस ने दावा किया है कि उपद्रवियों ने एक वायरलेस सेट लूटा था, जिसके जरिए वे पुलिस की मूवमेंट और कार्रवाई की जानकारी ले रहे थे, यह संकेत है कि योजना में पुलिस की गतिविधियों की निगरानी करने की रणनीति शामिल थी.
तौकीर के करीबियों की संपत्ति जब्ती: जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि मौलाना तौकीर के नजदीकी लोगों की लगभग ₹150 करोड़ की संपत्ति को ज़ब्त किया गया है, यह माना जा रहा है कि यह संपत्ति हिंसा की फंडिंग या संबंधित गतिविधियों से जुड़ी हो सकती है.
तौकीर और अन्य आरोपियों की पकड़
मौलाना तौकीर रज़ा मामले के केंद्र में हैं. उनके पास आरोप है कि उन्होंने, या उनके समर्थकों ने, हिंसा की सक्रिय योजना बनाई और उसे लागू किया. नदीम नामक व्यक्ति की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. व्हाट्सऐप के जरिए बुलावा देना, नकली दस्तावेज तैयार करना और पुलिस की गतिविधियों की जानकारी रखना इस पूरी साजिश का हिस्सा हैं.
डॉ. नफीस, जो आईएमसी के प्रवक्ता हैं, उन्हें भी मामले की गहराई से जांच के लिए हिरासत में लिया गया है. पूछताछ और सत्यापन के बाद उन पर भी कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है.
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