बहराइच में आदमखोर भेड़िये ने फिर मचाया आतंक, 15 दिन में 4 मासूमों को बनाया शिकार, कई लोग घायल

Bahraich News: उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद के महसी व कैसरगंज तहसील में आदमखोर भेड़िये का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है. पिछले 15 दिनों में इस जंगली जानवर ने 4 मासूम बच्चों की जान ले ली है, जबकि दर्जनों ग्रामीण घायल हुए हैं.

Bahraich man-eater wolf attacks 4 children killed dozens injured
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Bahraich News: उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद के महसी व कैसरगंज तहसील में आदमखोर भेड़िये का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है. पिछले 15 दिनों में इस जंगली जानवर ने 4 मासूम बच्चों की जान ले ली है, जबकि दर्जनों ग्रामीण घायल हुए हैं. गन्ने के खेतों की घनी छांव में छिपा भेड़िया अभी भी ग्रामीणों के लिए दहशत का सबब बना हुआ है. वन विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा.

मासूमों की दर्दनाक मौतें

9 सितंबर को परगपुरवा गांव में 4 साल की बच्ची ज्योति को भेड़िये ने अपना शिकार बनाया. इसके बाद बहोरवा गांव में 3 महीने की नवजात संध्या की मौत ने पूरे इलाके को हिला दिया. 13 सितंबर को एक महिला पर हमला हुआ और 20 सितंबर को तीन ग्रामीणों पर दिनदहाड़े हमला हुआ, जिसमें एक बच्चे का शव अब तक नहीं मिला. 24 सितंबर को कैसरगंज तहसील के बाबूलाल पुरवा गांव में 3 साल की बच्ची को भी भेड़िये ने मार डाला. इस लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में रोष इतना बढ़ गया कि उन्होंने वन विभाग की गाड़ी तक तोड़फोड़ कर दी.

गन्ने के खेतों की घनी छांव में छुपा खौफ

बहराइच का यह क्षेत्र गन्ने की पैदावार के लिए जाना जाता है, जहां के घने खेत भेड़िये के लिए आदर्श शिकार और छुपने की जगह बने हुए हैं. वन विभाग द्वारा थर्मल ड्रोन और नाइट विजन कैमरों का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन गन्ने के कारण ये तकनीकें भी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो पा रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यही वजह है कि भेड़िया रात में आसानी से हमला कर पाता है.

भले ही वन विभाग की 20 से अधिक टीमें और सैकड़ों कर्मचारी लगातार खोज अभियान चला रहे हों, लेकिन भेड़िये को पकड़ना अभी भी चुनौती बना हुआ है. तीन जिलों में नियंत्रण कक्ष स्थापित कर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है, फिर भी दहशत कायम है. ग्रामीण रातभर लाठी-डंडे लेकर जागते हैं ताकि बच्चों की सुरक्षा की जा सके. कैसरगंज विधायक आनंद यादव ने इस आतंक को रोकने के लिए ‘शूट एट साइट’ आदेश की मांग भी की है.

डीएम का दौरा और वन विभाग की कोशिशें

डीएम अक्षय त्रिपाठी ने मझारा तौकली और प्रभावित गांवों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने आश्वासन दिया कि अन्य राज्यों से विशेषज्ञ टीमें बुलाकर मामले की गंभीरता से निपटा जा रहा है. डीएफओ राम सिंह यादव ने बताया कि थर्मल ड्रोन, कैमरा ट्रैप और नाइट विजन उपकरणों से भेड़िये की तलाश जारी है और जल्द ही उसे पकड़ा जाएगा. लेकिन सवाल यह है कि कब तक ग्रामीण इस डर के साये में जीने को मजबूर रहेंगे.

पुरानी पीड़ा दोहराई जा रही है

पिछले साल भी महसी क्षेत्र में आदमखोर भेड़िये ने 10 से अधिक बच्चों की जान ली थी. इस साल वही भयावह स्थिति पुनः उत्पन्न हो रही है, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है. ग्रामीण सुरक्षा के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं, वहीं प्रशासन भी इस संकट से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है.

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