Bangladesh Mob Lynching: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक और गंभीर घटना सामने आई है. बुधवार रात करीब 11 बजे राजबाड़ी जिले के होसेनडांगा गांव में एक हिंदू युवक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान 29 वर्षीय अमृत मंडल उर्फ सम्राट के रूप में हुई है, जो उसी गांव का निवासी था.
पुलिस का कहना है कि अमृत पर जबरन वसूली के आरोप थे और इसी को लेकर स्थानीय लोगों ने उस पर हमला कर दिया. यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब महज सात दिन पहले ढाका के पास एक अन्य हिंदू युवक की हत्या का मामला सामने आया था, जिससे देश में कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.
पुलिस का दावा: आपराधिक मामलों में था शामिल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार अमृत मंडल के खिलाफ पांगशा थाने में दो मामले दर्ज थे, जिनमें एक गंभीर आपराधिक मामला भी शामिल बताया गया है. पुलिस ने यह भी कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उसे जबरन वसूली के आरोपों के चलते भीड़ ने निशाना बनाया.
जबरन वसूली करने वाला गिरोह चलाने का दावा
बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोगों का आरोप है कि अमृत एक आपराधिक गिरोह से जुड़ा हुआ था और लंबे समय से जबरन वसूली तथा अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल था. बताया गया है कि वह कुछ समय तक भारत में छिपा रहा था और हाल ही में अपने गांव लौटा था.
रिपोर्ट के अनुसार, 24 दिसंबर की रात अमृत अपने कुछ साथियों के साथ गांव के एक निवासी शाहिदुल इस्लाम के घर पैसे मांगने पहुंचा था. इसी दौरान घर के लोगों ने शोर मचा दिया, जिसके बाद आसपास के लोग इकट्ठा हो गए. इस दौरान अमृत को पकड़ लिया गया और उसकी पिटाई की गई. उसके कुछ साथी मौके से भागने में सफल रहे, जबकि एक अन्य व्यक्ति को हथियारों के साथ पकड़ लिया गया.
एक सप्ताह पहले दीपू चंद्र दास की हत्या
इस घटना से पहले 18 दिसंबर को ढाका के पास एक और हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ हिंसा में मौत हो गई थी. उस मामले ने पूरे देश में आक्रोश और चिंता पैदा कर दी थी. अब जांच में सामने आया है कि जिस आरोप के आधार पर दीपू दास पर हमला किया गया था, उसके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं.
ईशनिंदा के आरोप निराधार, जांच में नहीं मिला सबूत
जांच एजेंसियों के अनुसार, दीपू चंद्र दास पर सोशल मीडिया के जरिए धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया गया था. कहा जा रहा था कि उसने फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. हालांकि, जांच में अब तक ऐसी किसी भी पोस्ट या टिप्पणी के प्रमाण नहीं मिले हैं.
बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) के कंपनी कमांडर मोहम्मद शम्सुज्जमान ने द डेली स्टार को बताया कि जांच में यह साबित नहीं हो सका है कि दीपू दास ने कोई भड़काऊ या आपत्तिजनक सामग्री साझा की थी. इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अफवाह कैसे और किसके द्वारा फैलाई गई.
शेख हसीना का आरोप: अल्पसंख्यकों पर बढ़े अत्याचार
इन घटनाओं के बीच बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग नेता शेख हसीना ने अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में गैर-मुसलमानों के खिलाफ “डरावने और असहनीय अत्याचार” हो रहे हैं.
शेख हसीना का कहना है कि सत्ता में आई सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों की आस्था और सुरक्षा की अनदेखी कर रही है. उन्होंने हाल की मॉब हिंसा की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय लगातार हिंसा का सामना कर रहा है. हसीना ने यह भी कहा कि अगस्त में उनकी सरकार गिरने के बाद से हालात और बिगड़े हैं, हालांकि उन्हें भरोसा है कि बांग्लादेश के लोग इस स्थिति को ज्यादा समय तक स्वीकार नहीं करेंगे.
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