चुनाव से बाहर करने की कोशिशें बर्दाश्त नहीं... यूनुस के खिलाफ आर पार की लड़ाई लड़ने को तैयार अवामी लीग

Bangladesh Political Crisis: बांग्लादेश इन दिनों अपनी राजनीति के सबसे अस्थिर दौर से गुजर रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं.

Bangladesh sheikh Hasina Awami League ready to fight a tough battle against Yunus
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Bangladesh Political Crisis: बांग्लादेश इन दिनों अपनी राजनीति के सबसे अस्थिर दौर से गुजर रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं. जबकि हसीना फिलहाल भारत में मौजूद हैं, उनकी गैरमौजूदगी में सुनाए गए इस फैसले ने न केवल देश की सियासत को गरमाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय हलकों में भी सवाल उठाए हैं. इसी माहौल में अवामी लीग ने खुलकर सड़कों पर उतरने का ऐलान किया है और 30 नवंबर तक देशभर में विरोध-मार्च की घोषणा कर दी है.

17 नवंबर को बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल ने 78 वर्षीय शेख हसीना और उनके कार्यकाल के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप में फांसी की सजा सुनाई. मुकदमा हसीना की गैरहाजिरी में हुआ, जिसके चलते इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना भी हुई. बांग्लादेश सरकार का दावा है कि हसीना और पूर्व गृहमंत्री दोनों भारत में मौजूद हैं और देश उन्हें प्रत्यर्पित करने की तैयारी कर रहा है.

“राजनीतिक साज़िश का हिस्सा”

अवामी लीग ने अपने आधिकारिक बयान में इस फैसले को मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की “साज़िश” बताया. पार्टी का आरोप है कि हसीना और उनकी पार्टी को अगले साल फरवरी में होने वाले चुनावों से बाहर करने के लिए यह पूरा मामला तैयार किया गया है. अवामी लीग ने ट्राइब्यूनल के फैसले को “गैरकानूनी” बताया और यूनुस के इस्तीफे की मांग की. पार्टी के अनुसार 30 नवंबर तक सभी जिलों और उपजिलों में आंदोलन जारी रहेगा.

“चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने की कोशिशें बर्दाश्त नहीं” 

पार्टी ने कहा कि वे अपने कार्यकर्ताओं और सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर “राष्ट्र-विरोधी साजिशों” का मुकाबला करेंगे. अवामी लीग का दावा है कि स्वतंत्रता सेनानी समर्थक समूहों को चुनावी प्रक्रिया से हटाने की योजना बनाई जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर रोका जाएगा. पार्टी ने साफ चेतावनी दी है कि बांग्लादेश में “धोखे से चुनाव” होने नहीं दिए जाएंगे, और इसी के साथ आंदोलन को देशव्यापी स्वरूप दिया जा रहा है.

2024 की उथल-पुथल और शेख हसीना का देश छोड़ना

5 अगस्त 2024 को छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन और हिंसा के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी. प्रदर्शनकारियों का उग्र समूह जब उनके आवास तक पहुँच गया, तब हसीना को जान बचाकर देश से निकलना पड़ा. इसके तीन दिन बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस अंतरिम प्रशासन के प्रमुख सलाहकार बने. इसके बाद हसीना और उनके निकट सहयोगियों पर देशद्रोह, मानवता के खिलाफ अपराध और आंदोलनकारियों पर कठोर कार्रवाई के आरोप लगाए गए. इन्हीं मामलों में हसीना और तत्कालीन गृहमंत्री को मृत्युदंड सुनाया गया, जबकि एक अन्य साथी राज्य का गवाह बन गया.

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