बांग्लादेश की राजधानी ढाका एक बार फिर हिंसा और अराजकता की चपेट में आ गई, जहां उग्र भीड़ ने सीधे तौर पर मीडिया संस्थानों को निशाना बनाया. आधी रात से लेकर सुबह तक चले इस उत्पात में देश के दो सबसे बड़े और प्रतिष्ठित अखबार द डेली स्टार और प्रोथोम आलो के दफ्तरों में जमकर तोड़फोड़, आगजनी और लूटपाट की गई. इस घटना ने न सिर्फ पत्रकारों की जान खतरे में डाली, बल्कि बांग्लादेश में स्वतंत्र पत्रकारिता के भविष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
डेली स्टार के अनुसार, काजी नजरुल इस्लाम एवेन्यू स्थित उसके मुख्यालय में हमलावर आधी रात के आसपास जबरन घुस आए. इमारत के अंदर दाखिल होते ही भीड़ ने शीशे के दरवाजे, फर्नीचर और ऑफिस उपकरण तोड़ दिए. कंप्यूटर, कैमरे, हार्ड ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान लूट लिया गया.हमलावरों ने जुलाई आंदोलन से जुड़े शहीदों के पोस्टर भी फाड़ दिए और ग्राउंड फ्लोर व पहली मंजिल पर आग लगा दी. अखबारों के बंडल और फर्नीचर जलने से आग तेजी से ऊपर की मंजिलों तक फैल गई. कुछ उपद्रवी फर्नीचर को घसीटते हुए सड़क पर ले गए और वहीं आग के हवाले कर दिया.
धुएं में फंसे पत्रकार, छत बनी शरणस्थली
आग बढ़ने के साथ ही सीढ़ियों और गलियारों में घना काला धुआं भर गया. जान बचाने के लिए कम से कम 28 पत्रकार और कर्मचारी ऊपर की मंजिलों की ओर भागे और अंततः छत पर शरण लेनी पड़ी. वहां भी सांस लेना मुश्किल हो गया.इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट जायमा इस्लाम ने रात करीब एक बजे सोशल मीडिया पर लिखा कि वह धुएं में फंसी हैं और सांस नहीं ले पा रही हैं. बाहर उनके परिवार, दोस्त और सहकर्मी घंटों तक बेचैनी में खड़े रहे.
फायर ब्रिगेड को भी रोका गया
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ ने दमकल की गाड़ियों को भी आगे बढ़ने नहीं दिया. लगभग चार घंटे तक इमारत घिरी रही. आखिरकार सुबह करीब पांच बजे सेना और फायर फाइटर्स की मदद से सभी कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. इस हमले के चलते अपने 34 साल के इतिहास में पहली बार डेली स्टार का प्रिंट संस्करण प्रकाशित नहीं हो सका.
डेली स्टार का दो टूक संदेश
अखबार ने बयान जारी कर कहा कि यह हमला सिर्फ दो मीडिया संस्थानों पर नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है. डेली स्टार ने साफ कहा—“हम डरेंगे नहीं, हम झुकेंगे नहीं. वे हमारे दफ्तर जला सकते हैं, लेकिन हमारे सच को नहीं.”
प्रोथोम आलो के दफ्तर पर भी कहर
इसी रात करवान बाजार स्थित प्रोथोम आलो के मुख्यालय को भी उग्र भीड़ ने निशाना बनाया. पहले नारेबाजी और धमकियों का दौर चला, फिर सैकड़ों लोग जुटे और हमला शुरू कर दिया. कांच की दीवारें तोड़ी गईं, गेट तोड़कर अंदर घुसा गया और फर्नीचर में आग लगा दी गई.हमलावरों ने जानबूझकर फायर सेफ्टी सिस्टम को नुकसान पहुंचाया, CCTV कैमरे तोड़ दिए और 150 से ज्यादा कंप्यूटर व लैपटॉप लूट लिए. प्रोथोमा प्रकाशन शोरूम से किताबें भी उठा ली गईं. आग इतनी फैली कि आसपास की इमारतें भी चपेट में आने लगीं.
घायल फायर फाइटर्स और कर्मचारी
आग बुझाने पहुंचे दमकल कर्मियों पर भी हमला हुआ. दो फायर फाइटर्स करंट लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए. कई प्रोथोम आलो कर्मचारी भी जख्मी हुए. 27 साल के इतिहास में पहली बार इस अखबार का प्रिंट संस्करण भी प्रकाशित नहीं हो पाया और ऑनलाइन सेवाएं लंबे समय तक ठप रहीं.
ढाका के बाहर भी हिंसा
हिंसा सिर्फ मीडिया दफ्तरों तक सीमित नहीं रही. धनमंडी में सांस्कृतिक संस्थानों पर हमले हुए, चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायोग पर पथराव किया गया और राजशाही में एक राजनीतिक पार्टी का दफ्तर ढहा दिया गया.
सरकार से कार्रवाई की मांग
डेली स्टार और प्रोथोम आलो दोनों ने सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि दोषियों और उन्हें उकसाने वालों की पहचान कर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. अखबारों का कहना है कि इस तरह की हिंसा न सिर्फ देश की आंतरिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश की छवि भी धूमिल करेगी. यह हमला बांग्लादेश के मीडिया इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक माना जा रहा है—जहां सच की आवाज़ को डराने की कोशिश की गई, लेकिन पत्रकारों का संकल्प अब और मजबूत होकर सामने आया है.
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