क्या भारत से शेख हसीना की होगी वापसी? प्रत्यर्पण की मांग...जानें क्या बोला विदेश मंत्रालय?

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर दक्षिण एशिया की राजनीति इन दिनों उथल-पुथल से घिरी हुई है. ढाका की विशेष अदालत द्वारा मानवता के विरुद्ध अपराधों में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद, बांग्लादेश सरकार ने भारत से औपचारिक रूप से उनके प्रत्यर्पण की मांग की है.

Bangladesh written letter to india over sheikh hasina extradition
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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर दक्षिण एशिया की राजनीति इन दिनों उथल-पुथल से घिरी हुई है. ढाका की विशेष अदालत द्वारा मानवता के विरुद्ध अपराधों में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद, बांग्लादेश सरकार ने भारत से औपचारिक रूप से उनके प्रत्यर्पण की मांग की है. इस बीच भारत ने पहला आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट कहा है कि वह इस अनुरोध पर न्यायिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत गंभीरता से विचार कर रहा है.

78 वर्षीय शेख हसीना को पिछले हफ्ते ढाका में एक विशेष न्यायाधिकरण ने उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई. यह सजा 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले व्यापक आंदोलनों पर सरकार की कथित कठोर कार्रवाई के आरोपों के आधार पर दी गई. अदालत के मुताबिक हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है. हसीना और उनके करीबी सहयोगी, पूर्व गृहमंत्री असदुज्जमां खान कमाल, दोनों को समान आरोपों में सजा दी गई.

भारत में रह रहीं हसीना, बांग्लादेश ने मांगा प्रत्यर्पण

पिछले साल व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच 5 अगस्त को शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं. अदालत के फैसले के तुरंत बाद बांग्लादेश सरकार ने भारत को औपचारिक पत्र भेजकर प्रत्यर्पण संधि के आधार पर हसीना को ढाका सौंपने की मांग की. ढाका का दावा है कि दोनों देशों के बीच मौजूद प्रत्यर्पण समझौते के अनुरूप भारत की यह जिम्मेदारी है कि वह उन्हें वापस भेजे.

भारत का जवाब: कानूनी प्रक्रिया जारी, बांग्लादेश के हित प्राथमिकता

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि “इस अनुरोध पर न्यायिक और आंतरिक कानूनी प्रक्रियाओं के तहत गौर किया जा रहा है. हम बांग्लादेश में शांति, लोकतंत्र, समावेशिता और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं और सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक संवाद जारी रखेंगे.” सूत्रों के मुताबिक भारत की प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला कि हसीना को सजा सुनाने की प्रक्रिया में कई “कानूनी खामियां” और “असंवैधानिक नियुक्तियां” शामिल थीं.

हसीना का पलटवार: फैसले को बताया अवैध

शेख हसीना ने अदालत के फैसले को अस्वीकार करते हुए कहा कि “यह एक ऐसे गैर-कानूनी न्यायाधिकरण द्वारा दिया गया फैसला है, जिसकी स्थापना एक अनिर्वाचित, जनादेशहीन सरकार ने की है.”वह लंबे समय से दावा कर रही हैं कि मौजूदा सरकार उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बना रही है.

चुनाव से पहले बढ़ा तनाव, अवामी लीग चुनाव से बाहर

यह फैसला बांग्लादेश के आगामी संसदीय चुनावों से ठीक पहले आया है. फरवरी में होने वाले चुनावों में हसीना की अवामी लीग को भाग लेने से रोक दिया गया है. इससे देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण और भी बढ़ गया है. भारत भी ढाका में हो रहे विकासक्रमों पर कड़ी नजर बनाए हुए है.

खुफिया स्तर पर भी बातचीत जारी

बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान के हालिया भारत दौरे के दौरान उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष अजित डोभाल को ढाका आने का निमंत्रण दिया. प्रवक्ता जायसवाल ने कहा कि इस प्रस्ताव पर समय आने पर विचार किया जाएगा. रहमान पिछले सप्ताह नई दिल्ली में एक सुरक्षा सम्मेलन में भाग लेने आए थे और इसी दौरान दोनों देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई.

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