भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह राजनीति में लेंगी एंट्री? गिरिराज सिंह से मुलाकात के बाद अटकलें तेज़

Akshara Singh Politics: बिहार का चुनावी रण अब सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है, अब इसमें ग्लैमर का तड़का भी लग चुका है. जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी गलियारों में सिनेमा और संगीत की दुनिया से जुड़े नाम चर्चा में आने लगे हैं.

Bhojpuri actress Akshara Singh enter politics Speculation after meeting Giriraj Singh
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Akshara Singh Politics: बिहार का चुनावी रण अब सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है, अब इसमें ग्लैमर का तड़का भी लग चुका है. जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी गलियारों में सिनेमा और संगीत की दुनिया से जुड़े नाम चर्चा में आने लगे हैं.

इस कड़ी में नया नाम जुड़ा है भोजपुरी फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री अक्षरा सिंह का, जिन्होंने हाल ही में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात की. इस मुलाकात की तस्वीर उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, "गिरिराज सिंह जी से आशीर्वाद मिला." बस फिर क्या था, अटकलों का दौर शुरू हो गया कि क्या अक्षरा सिंह अब राजनीति की पिच पर बैटिंग करने की तैयारी में हैं?

लोकगायिका मैथिली ठाकुर भी आईं चर्चा में

एक दिन पहले ही बिहार की लोकगायिका और यूट्यूब सेंसेशन मैथिली ठाकुर ने विनोद तावड़े और नित्यानंद राय से मुलाकात की थी. उन्होंने कहा, "मेरी आत्मा बिहार से जुड़ी है, और मैं बिहार के लिए काम करना चाहती हूं." उन्होंने खुलकर एनडीए के प्रति अपना समर्थन भी जाहिर किया, जिससे उनके भी सियासी मैदान में उतरने की संभावनाएं तेज हो गई हैं.

भोजपुरी इंडस्ट्री से बढ़ती सियासी दिलचस्पी

यह पहला मौका नहीं है जब भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के नाम राजनीति में छा रहे हैं. इससे पहले पवन सिंह पहले ही बीजेपी में वापसी कर चुके हैं. रितेश पांडे अब प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज का हिस्सा हैं. राधेश्याम रसिया भी चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. वहीं, खेसारी लाल यादव की अखिलेश यादव से मुलाकात ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें बढ़ा दी हैं, हालांकि उन्होंने अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है.

ग्लैमर और जनता की नज़दीकियां

फिल्मी सितारों और गायकों का राजनीति में आना कोई नया चलन नहीं है, लेकिन बिहार की ज़मीन पर इन चेहरों की पकड़ और प्रभाव को देखकर राजनीतिक दल भी इन्हें अपने साथ जोड़ने में पीछे नहीं हैं. ये चेहरे न सिर्फ युवा मतदाताओं को आकर्षित करते हैं, बल्कि आम जनता से सीधे जुड़ाव भी रखते हैं.

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