Chirag Paswan Strike Rate: बिहार विधानसभा चुनाव के ताज़ा रुझानों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि राज्य में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने जा रही है. मुकाबला भले ही कड़ा रहा हो, लेकिन सत्ता-विरोधी माहौल की चर्चाओं के बावजूद एनडीए के घटक दलों ने मजबूत उपस्थिति दर्ज की है. दूसरी ओर, महागठबंधन के दलों ने भी कई क्षेत्रों में पिछली बार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है, जो राज्य की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत देता है.
पिछले विधानसभा चुनाव परिणामों पर नज़र डालें तो भारतीय जनता पार्टी ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए लगभग 19.46% वोट शेयर हासिल किया था और 74 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इसके मुकाबले, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू 122 सीटों पर लड़ी थी और उसे 15.39% वोट मिलते हुए कुल 73 सीटें मिली थीं. उस समय चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने एनडीए से अलग होकर 135 सीटों पर किस्मत आजमाई थी, लेकिन उसके खाते में केवल एक ही सीट आई थी.
2025 के चुनाव में बदला समीकरण
इस चुनाव में एनडीए की सीट साझेदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिला. भाजपा और जेडीयू, दोनों ने 101-101 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे. इनके अलावा जेडीयू के हिस्से की अन्य सहयोगी पार्टियों में एचएएम को 6 और आरएलएम को 6 सीटें मिलीं. वहीं दूसरी तरफ, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) एलजेपी (आर) ने इस बार एनडीए के साथ तालमेल में दमदार प्रदर्शन करते हुए कई क्षेत्रों में बढ़त दिखाई है. यह वही पार्टी है जो पिछले चुनाव में लगभग खाली हाथ वापस लौटी थी, लेकिन इस बार रुझानों के अनुसार 22 सीटों पर आगे चल रही है, जो उसके राजनीतिक पुनरुत्थान का संकेत है.
वर्तमान रुझान: कौन कहाँ खड़ा है?
अब तक आए रुझानों में स्थिति काफी स्पष्ट दिखाई दे रही है. एनडीए के भीतर भाजपा 85 सीटों पर आगे है, जेडीयू 75 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि एलजेपी (आर) 22 सीटों पर आगे चल रही है. इसके साथ हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा को 4 और आरएलएम को 2 सीटों पर बढ़त मिल रही है.
विपक्षी खेमे, यानी महागठबंधन की बात करें तो आरजेडी 36 सीटों पर, कांग्रेस 6 सीटों पर और वीआईपी 1 सीट पर आगे है. वाम दलों ने भी अपनी उपस्थिति मजबूत बनाए रखी है, जिसमें सीपीआई-एमएल और अन्य लेफ्ट दल कुल मिलाकर 8 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं.
महागठबंधन की रणनीति और उम्मीदवार
महागठबंधन के तहत इस बार आरजेडी ने 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. कांग्रेस को 60 सीटें मिलीं, जबकि सीपीआई (माले) ने 20, वीआईपी ने 11, सीपीआई ने 6 और सीपीएम ने 4 सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे. महागठबंधन ने सामाजिक न्याय, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी, लेकिन रुझानों से यह प्रतीत होता है कि जनता ने विकास और स्थिर सरकार के वादों को अधिक महत्व दिया है.
जनता का रुझान और राजनीतिक संदेश
रुझानों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि मतदाताओं ने इस बार भी विकास और स्थिर प्रशासन के वादों पर भरोसा जताया है. एनडीए की संयुक्त रणनीति और सीट साझेदारी ने उसे लाभ पहुंचाया है, वहीं महागठबंधन की मजबूत जमीनी पकड़ के बावजूद वह अपेक्षित लहर नहीं बना सका. एलजेपी (आर) का उभार विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो राज्य की राजनीति में भविष्य के नए समीकरणों का आधार बन सकता है.
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