'तीसरे मोर्चे' के रूप में प्रशांत किशोर का जन सुराज बना गेमचेंजर? NDA बनाम INDIA की जंग में नया ट्विस्ट

Bihar Election 2025: बिहार की सियासत एक बार फिर करवट लेने को तैयार है. साल के अंत में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर जहां एक ओर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए का कुनबा फिर से गोलबंद हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ तेजस्वी यादव की अगुवाई में INDIA गठबंधन भी अपने समीकरण साधने में जुटा है.

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Bihar Election 2025: बिहार की सियासत एक बार फिर करवट लेने को तैयार है. साल के अंत में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर जहां एक ओर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए का कुनबा फिर से गोलबंद हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ तेजस्वी यादव की अगुवाई में INDIA गठबंधन भी अपने समीकरण साधने में जुटा है. लेकिन इन सबके बीच, एक तीसरे चेहरे की एंट्री ने इस मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है, और वो हैं प्रशांत किशोर.

पीके की जन सुराज पार्टी (JSP) ने अभी से जमीन पर काम शुरू कर दिया है, और हालिया सर्वे इस बात का संकेत दे रहे हैं कि JSP महज दर्शक नहीं, बल्कि किंगमेकर या कहें डार्क हॉर्स की भूमिका में आ सकती है.

क्या कहता है India Vibes का ताज़ा सर्वे?

'इंडिया वाइब्स' के सर्वे के अनुसार अगर जन सुराज पार्टी को 10% वोट मिलते हैं और उसमें से 5% वोट INDIA ब्लॉक से कटते हैं, तो INDIA को महज़ 34% वोट मिलेंगे. दूसरी ओर, एनडीए को 42% वोट मिलने की संभावना है. यानी स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ता NDA.

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती...

अगर पीके के JSP के 10% वोट शेयर में से 5% एनडीए के वोट कटते हैं, तो सियासी समीकरण उलट सकता है. INDIA ब्लॉक को मिलेगा 39% वोट, NDA को मिलेगा सिर्फ 37% मिल सकता है. यानि 5% वोट ट्रांसफर ही पलट सकता है पूरा खेल.

कांटे की टक्कर, छोटी चालों से बदल सकता है बड़ा खेल

सर्वे का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि अगर JSP दोनों खेमों से बराबर यानी 2.5-2.5% वोट काटती है, और शेष 5% अन्य दलों से लेती है, तो फिर NDA को 39%, INDIA ब्लॉक को 36% मिल सकता है. मतलब, पीके की पार्टी खुद तो भले सत्ता में न आए, लेकिन दूसरों की किस्मत ज़रूर बदल सकती है.

युवाओं की पसंद बनती जन सुराज

सर्वे के मुताबिक 18-24 साल की उम्र के 20% युवा JSP के साथ खड़े हैं. यह इशारा करता है कि पीके की पार्टी परंपरागत वोट बैंक की सीमाएं लांघने में सफल हो सकती है. खास बात यह है कि JSP जाति या धर्म के बजाय ‘सामाजिक संतुलन और विकास नीति’ के आधार पर उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रही है. इसके चलते महागठबंधन और एनडीए, दोनों के कोर वोट बैंक में सेंधमारी की संभावना है.

मौजूदा विधायकों से नाराज़ हैं 54% वोटर

सर्वे के एक और चौंकाने वाले आंकड़े के मुताबिक 54% मतदाता अपने वर्तमान विधायक को वोट नहीं देना चाहते. यह मौजूदा व्यवस्था से नाराज़गी का संकेत है और नई राजनीतिक ताकतों के लिए एक अवसर की तरह देखा जा सकता है.

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