Rahul Gandhi Bihar Election: बिहार की सियासत एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर है. 2025 विधानसभा चुनाव की काउंटिंग जैसे-जैसे चरम पर पहुंच रही है, चुनावी तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती दिख रही है और इस तस्वीर में एनडीए की वापसी लगभग तय नजर आ रही है. शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, जहां बीजेपी-जदयू गठबंधन मजबूत बढ़त बनाए हुए है और महागठबंधन की उम्मीदें धुंधली पड़ती दिख रही हैं. कांग्रेस के आरोप, बयानबाज़ी और राहुल गांधी की ओर से चुनाव से पहले किए गए ‘हाइड्रोजन बम’ वाले दावे भी वोटरों को प्रभावित नहीं कर पाए हैं.
काउंटिंग के शुरुआती चरण में ही बिहार का माहौल गरमा गया. एनडीए जहां 190 सीटों पर आगे दिखाई दे रहा है, वहीं महागठबंधन की पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है और वह सिर्फ 38 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है. बीजेपी 90 और जदयू 80 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि राजद को 29 और कांग्रेस को मात्र 5 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है. इन आंकड़ों से साफ है कि कांग्रेस इस चुनाव में सबसे बड़े नुकसान की ओर बढ़ रही है.
‘वोट चोरी’ का नैरेटिव नहीं चला
चुनाव से पहले कांग्रेस ने जोरदार ढंग से आरोप लगाए थे कि भाजपा वोट चोरी की रणनीति के तहत राज्यों में सरकारें बनाती रही है. राहुल गांधी ने एग्जिट पोल पर भी सवाल खड़े करते हुए सीधे-सीधे भाजपा और चुनाव आयोग पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था. यहां तक कि उन्होंने दावा किया था कि लाखों लोग फर्जी वोट डाल रहे हैं और इस ‘साजिश’ के सबूत मिटा दिए गए हैं. लेकिन बिहार के रुझान इस दावे को जमीन पर टिकता हुआ नहीं दिखा रहे.
‘हाइड्रोजन बम’ की धमक हवा में उड़ गई
चुनावों से पहले राहुल गांधी ने अपने ‘हाइड्रोजन बम’ वाले बयान को काफी प्रचारित किया था, मानो वे कोई बड़ा खुलासा करने जा रहे हों. लेकिन नतीजों की दिशा देखने के बाद ऐसा लग रहा है कि वह बम धमाके से पहले ही फुस्स हो गया. कांग्रेस का वोट बैंक पहले से कमजोर दिख रहा है और उनके दावों और रणनीतियों का असर वोटरों पर नहीं दिखा.
बिहार में कांग्रेस की साख पर बड़ा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन रुझानों से स्पष्ट है कि बिहार की जनता ने एनडीए पर फिर भरोसा जताया है. बीजेपी और जदयू की रणनीति प्रभावी साबित हुई है, जबकि कांग्रेस न सिर्फ सीटों में कमजोर पड़ी है, बल्कि उसकी विश्वसनीयता भी प्रभावित हुई है. यह नतीजे महागठबंधन से ज्यादा पूरे विपक्ष के लिए चेतावनी की तरह हैं.
एनडीए की राह और आसान
बिहार की जनता ने अपने फैसले से साफ संकेत दिया है कि वे ‘वोट चोरी’ जैसे आरोपों में विश्वास नहीं करते. मतदान प्रक्रिया पारदर्शी रही और नतीजे उसी दिशा में जा रहे हैं, जैसा माहौल चुनाव के दौरान नजर आ रहा था. कांग्रेस के आरोप और नाटकीय बयान अब केवल राजनीतिक शोर तक सीमित लग रहे हैं. बिहार के मतदाताओं ने अपना विश्वास स्पष्ट कर दिया है और वर्तमान रुझानों में एनडीए की जीत लगभग तय दिखाई दे रही है.
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