NDA Bihar Seat Sharing: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) में सीट बंटवारे का मसला अब पूरी तरह सुलझ गया है. नई दिल्ली में हुई एक लंबी और अहम बैठक के बाद यह तय हो गया कि बिहार में एनडीए के घटक दल किन-किन सीटों पर चुनावी मैदान में उतरेंगे. इस बैठक में गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व के बीच लंबी चर्चा के बाद सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय किया गया, जिससे लंबे समय से जारी अटकलों पर विराम लग गया है.
बैठक के बाद सामने आए आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) और जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) को बराबर-बराबर 101–101 सीटें दी गई हैं. यानी एनडीए की सबसे बड़ी दो पार्टियां राज्य की कुल 243 विधानसभा सीटों में से 202 सीटों पर मिलकर लड़ेंगी. इसके अलावा चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटें मिली हैं. वहीं, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक जनता दल (RLM) को 6 सीटें दी गई हैं, और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) को भी 6 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की जिम्मेदारी दी गई है.
संगठित व समर्पित NDA...
— Vinod Tawde (@TawdeVinod) October 12, 2025
आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के लिए NDA परिवार के सभी सदस्यों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में आपसी सहमति से सीटों का वितरण पूर्ण किया, जो कि इस प्रकार है–
भाजपा – 101 सीट
जदयू – 101 सीट
लोजपा (रामविलास) – 29 सीट
रालोमो – 06 सीट
हम – 06 सीट
एनडीए के सभी दलों…
चिराग पासवान ने जताया संतोष, कहा- एनडीए में एकता
सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा के बाद एलजेपी (रामविलास) के प्रमुख और जमुई से सांसद चिराग पासवान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए एनडीए की एकता और सहयोग की भावना को रेखांकित किया. उन्होंने लिखा:
"हम एनडीए परिवार ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सीटों का बंटवारा पूरा किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम सभी दल एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे."
उनके इस बयान से स्पष्ट है कि एनडीए में फिलहाल किसी तरह की अंदरूनी खींचतान नहीं है और सभी दल एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं.
सीट बंटवारे पर बनी सहमति से खत्म हुई अनिश्चितता
बीते कुछ हफ्तों से एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे थे. कई छोटे दलों की ओर से अधिक सीटों की मांग की जा रही थी, जिससे गठबंधन के भीतर असंतोष के स्वर सुनाई दे रहे थे. जीतनराम मांझी की पार्टी ने सार्वजनिक रूप से भी अपनी नाराजगी जताई थी और मांग की थी कि उनकी पार्टी को कम से कम 15 सीटें मिलनी चाहिए. लेकिन अब जब फॉर्मूला तय हो गया है, तो यह कहा जा सकता है कि एनडीए एक मजबूत रणनीति के तहत चुनाव में उतरने जा रहा है.
भाजपा-जेडीयू फिर साथ, महागठबंधन के लिए चुनौती
इस बार के विधानसभा चुनाव में खास बात यह है कि लंबे समय तक अलग-अलग राहों पर चलने के बाद भाजपा और जेडीयू एक बार फिर बराबरी की हिस्सेदारी के साथ चुनाव लड़ने जा रहे हैं. नीतीश कुमार और भाजपा के बीच संबंधों में आई तल्खी अब बीते दिनों की बात लगती है, क्योंकि दोनों पार्टियों के बीच तालमेल साफ तौर पर नजर आ रहा है.
एनडीए का यह सीट बंटवारा महागठबंधन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है, जिसमें आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल), कांग्रेस और वाम दल शामिल हैं. महागठबंधन को पहले ही नीतीश कुमार के जाने से बड़ा झटका लगा था और अब एनडीए की एकजुटता उनके लिए परेशानी का सबब बन सकती है.